Trump Greenland U-turn: ग्रीनलैंड पर ट्रंप का बड़ा यू-टर्न, यूरोपीय देशों पर टैरिफ धमकी ली वापस, जानें क्या है नया सीक्रेट डील?

दावोस से बड़ी खबर: क्या ट्रंप ने ग्रीनलैंड को पाने के लिए बदल दी अपनी चाल? यूरोपीय देशों पर 25% टैरिफ की धमकी देने वाले ट्रंप ने अचानक अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। नेटो चीफ मार्क रुट्टे के साथ हुई गोपनीय मुलाकात के बाद 'आर्कटिक सुरक्षा ढांचे' पर बनी सहमति ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। जानें आखिर इस समझौते में ऐसा क्या है?

Trump Greenland U-turn

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 22, 2026

Trump Greenland U-turn: यूरोपीय देशों और अमेरिका के बीच ग्रीनलैंड को लेकर जारी तनाव में एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जिन्होंने पहले ग्रीनलैंड मुद्दे पर यूरोपीय देशों पर भारी टैरिफ लगाने और सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी थी, अब अपने रुख में नरमी लाते दिख रहे हैं। विश्व आर्थिक मंच (WEF) के दौरान नाटो महासचिव मार्क रुट्टे के साथ हुई एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक के बाद, ट्रंप ने प्रस्तावित टैरिफ को फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह व्यावहारिक कदम अंतरराष्ट्रीय संबंधों को और अधिक बिगड़ने से बचाने की एक सोची-समझी रणनीति है।

1 फरवरी से लागू होने वाले टैरिफ पर रोक

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ के माध्यम से दुनिया को इस बड़े फैसले की जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि 1 फरवरी से यूरोपीय देशों पर जो टैरिफ लागू होने वाले थे, उन्हें अब आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। ट्रंप ने इस बदलाव का मुख्य श्रेय नाटो महासचिव मार्क रुट्टे के साथ हुई “सकारात्मक और उपयोगी” चर्चा को दिया। ट्रंप के अनुसार, इस वार्ता ने एक ऐसे नए मार्ग की नींव रखी है जहाँ व्यापारिक युद्ध के बजाय कूटनीति को प्राथमिकता दी जा रही है।

आर्कटिक और ग्रीनलैंड के लिए नया ‘फ्यूचर एग्रीमेंट’

ट्रंप ने अपनी पोस्ट में संकेत दिया कि नाटो प्रमुख के साथ ग्रीनलैंड और समग्र आर्कटिक क्षेत्र के भविष्य को लेकर एक समझौते की रूपरेखा (Framework) तैयार कर ली गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह नया ढांचा अमेरिका और उसके नाटो सहयोगियों, दोनों के रणनीतिक हितों की रक्षा करेगा। ट्रंप ने यह भी साझा किया कि ग्रीनलैंड से संबंधित ‘गोल्डन डोम’ परियोजना पर चर्चा अभी बंद नहीं हुई है। इस जटिल बातचीत का नेतृत्व एक उच्च स्तरीय टीम करेगी, जिसमें उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ शामिल हैं। यह टीम सीधे राष्ट्रपति को रिपोर्ट करेगी।

डेनमार्क ने फैसले का किया स्वागत

अमेरिका के इस कदम से यूरोप में राहत की लहर है। डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमुसेन ने ट्रंप के फैसले पर खुशी जताते हुए इसे एक सकारात्मक मोड़ बताया। उन्होंने कहा कि जिस तनाव के साथ दिन की शुरुआत हुई थी, ट्रंप के इस लचीले रुख ने उसका सुखद अंत कर दिया है। डेनमार्क, जो ग्रीनलैंड पर संप्रभुता रखता है, लंबे समय से अमेरिका की इस “खरीद” या “नियंत्रण” की इच्छा का विरोध करता रहा है, लेकिन बातचीत के इस नए दौर ने सहयोग की उम्मीद जगाई है।

नाटो प्रमुख ने दिलाया 9/11 की एकजुटता का भरोसा

बैठक के दौरान मार्क रुट्टे ने ट्रंप को याद दिलाया कि संकट के समय में नाटो सहयोगी हमेशा अमेरिका के साथ खड़े रहे हैं। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि 9/11 के हमलों के बाद यूरोपीय देशों ने अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी और अपने सैनिकों की कुर्बानी दी। हालांकि ट्रंप ने रुट्टे के इस तर्क को स्वीकार किया और उन्हें एक “भरोसेमंद व्यक्ति” बताया, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि ग्रीनलैंड जैसे मुद्दों पर सहयोगियों की झिझक ने उनके मन में प्रतिबद्धता को लेकर कुछ संदेह पैदा किए थे।

सैन्य नियंत्रण की बयानबाजी से पीछे हटे ट्रंप

दावोस में अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर सैन्य कब्जे जैसी सख्त बयानबाजी से दूरी बनाई। हालांकि, उन्होंने ग्रीनलैंड के रणनीतिक महत्व को कम नहीं होने दिया। उन्होंने इसे अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपरिहार्य बताते हुए कहा कि आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती सक्रियता के कारण ग्रीनलैंड का महत्व बढ़ गया है। ट्रंप ने इसे “बर्फ का एक टुकड़ा” और “ठंडी दूरस्थ जगह” बताते हुए कहा कि विश्व शांति के लिए अमेरिका का यहाँ प्रभावी होना जरूरी है। उन्होंने तर्क दिया कि अमेरिका ने दशकों तक दुनिया की सुरक्षा के लिए जो निवेश किया है, उसके बदले में ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की मांग कोई बहुत बड़ी मांग नहीं है।

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