Trump’s Big Move: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी न्यायपालिका के बीच व्यापारिक नीतियों को लेकर टकराव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के पुराने टैरिफ (सीमा शुल्क) को अवैध घोषित किए जाने के कुछ ही घंटों के भीतर, राष्ट्रपति ने एक जवाबी कार्रवाई की है। ट्रंप ने ओवल ऑफिस से एक नए कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत अब दुनिया के सभी देशों से अमेरिका आने वाले आयात पर 10% का ‘यूनिवर्सल ग्लोबल टैरिफ’ लगाया जाएगा। यह कदम वैश्विक व्यापार जगत में खलबली मचाने वाला है, क्योंकि यह लगभग सभी आयाती वस्तुओं को महंगा कर देगा।
सोशल मीडिया पर एलान: ‘ट्रुथ सोशल’ के जरिए दी जानकारी
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस कड़े फैसले की घोषणा अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर की। उन्होंने गर्व जताते हुए लिखा कि उन्होंने सभी देशों पर 10% वैश्विक टैरिफ लगाने के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और यह तत्काल प्रभाव से लागू होगा। इससे पहले आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने तकनीकी बारीकियों को स्पष्ट करते हुए कहा कि वह 1974 के ‘ट्रेड एक्ट’ की धारा 122 का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यह 10% की दर केवल शुरुआत है और भविष्य में इसे और भी बढ़ाया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: पुराने टैरिफ को बताया था अवैध
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में 6-3 के बहुमत से एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। अदालत ने राष्ट्रपति के उस अधिकार को खारिज कर दिया, जिसके तहत उन्होंने 1977 के ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ (IEEPA) का हवाला देकर बिना कांग्रेस की अनुमति के टैरिफ लगाए थे। अदालत का मानना था कि राष्ट्रपति इस कानून का दुरुपयोग कर रहे हैं। ट्रंप ने इस फैसले पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘बेहद निराशाजनक’ बताया। उन्होंने तंज कसा कि अदालत यह तो मानती है कि राष्ट्रपति व्यापार रोक सकते हैं या प्रतिबंध लगा सकते हैं, लेकिन शुल्क नहीं लगा सकते—यह तर्क उनके लिए हास्यास्पद है।
धारा 122 का सहारा: 150 दिनों का अस्थायी सुरक्षा कवच
सुप्रीम कोर्ट के झटके से उबरने के लिए ट्रंप प्रशासन ने अब 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 को अपना हथियार बनाया है। इसके तहत लगाया गया नया टैरिफ फिलहाल 150 दिनों (लगभग पांच महीने) के लिए प्रभावी रहेगा। इस अवधि के दौरान, ट्रंप प्रशासन अन्य देशों के साथ ‘उचित व्यापार’ सुनिश्चित करने के लिए गहन जांच करेगा। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में धारा 232 (राष्ट्रीय सुरक्षा) और धारा 301 (अनुचित व्यापार प्रथाएं) के तहत और भी सख्त कानूनी कार्रवाइयां और टैरिफ दरें देखने को मिल सकती हैं।
अरबों डॉलर के रिफंड का संकट और आर्थिक भविष्य
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने अमेरिकी खजाने के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। पिछले साल टैरिफ के रूप में वसूले गए लगभग 175 अरब डॉलर अब रिफंड के दायरे में आ सकते हैं। हालांकि, जब ट्रंप से इस भारी-भरकम राशि को वापस करने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला अभी कम से कम दो साल तक अदालती कार्यवाही में उलझा रहेगा। दूसरी ओर, ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने आश्वस्त किया है कि नए कार्यकारी आदेशों के कारण 2026 में सरकार के राजस्व पर कोई खास नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा और टैरिफ से होने वाली कमाई स्थिर रहेगी।
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