France Student Protest : फ्रांस में सितंबर के आखिर से जारी छात्र आंदोलन अब शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों की मांगों से आगे निकलकर बड़े राजनीतिक विवाद का हिस्सा बन गया है। देश के कई हिस्सों में छात्रों और आम लोगों के प्रदर्शन के बीच सुरक्षा बलों के साथ झड़पों की खबरें भी सामने आई हैं। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस की मौजूदा स्थिति पर टिप्पणी करते हुए इसे बड़े पैमाने पर इमिग्रेशन और इस्लाम से जोड़ दिया है।
ट्रंप ने मास इमिग्रेशन को बताया वजह
एएफपी के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को फ्रांस में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया दी। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि फ्रांस में मौजूदा अशांति के पीछे मास इमिग्रेशन की भूमिका है। उन्होंने यह भी कहा कि मामला केवल स्कूलों या शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा नहीं है, बल्कि इस्लाम के जरिए फ्रांस पर कब्जे की कोशिश से संबंधित है। यह बयान सामने आते ही राजनीतिक बहस और तेज हो गई।

छात्रों की मुख्य मांगें शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी
फ्रांस में प्रदर्शन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांगें बेहतर स्कूल सुविधाओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार से संबंधित बताई जा रही हैं। सितंबर के अंत से देशभर के कई हाई स्कूलों के प्रवेश द्वारों को छात्रों ने ब्लॉक किया है। प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर स्थिति तनावपूर्ण हुई और प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षा बलों के बीच झड़पें भी हुईं।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल
मंगलवार को पूरे फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों का व्यापक असर देखने को मिला। रिपोर्ट के अनुसार करीब 2.5 लाख लोग सड़कों पर उतरे। अलग-अलग शहरों में प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। आंदोलन के बढ़ते दायरे ने फ्रांस की आंतरिक राजनीति के साथ-साथ इमिग्रेशन, सामाजिक एकीकरण और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी नई बहस छेड़ दी है।

ट्रंप का यूरोप पर इमिग्रेशन को लेकर पुराना रुख
डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन की ओर से यूरोप में सामाजिक समस्याओं के लिए इमिग्रेशन को जिम्मेदार ठहराने वाली बयानबाजी पहले भी सामने आती रही है। ट्रंप यूरोपीय देशों से अपनी सीमाओं को मजबूत करने की अपील करते रहे हैं। वह पश्चिमी देशों में कथित सामाजिक और सांस्कृतिक गिरावट को लेकर भी चेतावनी देते रहे हैं।
फ्रांस के विरोध को अमेरिकी राजनीति से जोड़ा गया
अमेरिका में अगले महीने होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले फ्रांस के प्रदर्शनों को लेकर अमेरिकी दक्षिणपंथी राजनीतिक खेमे में भी चर्चा तेज हो गई है। ट्रंप के ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ आंदोलन से जुड़े समर्थक सोशल मीडिया पर फ्रांस में प्रदर्शन और अशांति के वीडियो साझा कर रहे हैं। इन पोस्ट के जरिए इमिग्रेशन-विरोधी राजनीतिक संदेश को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।

ग्लेन बेक ने बताया पश्चिमी देशों के लिए चेतावनी
ट्रंप के समर्थक और रूढ़िवादी राजनीतिक टिप्पणीकार ग्लेन बेक ने भी फ्रांस की स्थिति पर प्रतिक्रिया दी। सोमवार को उन्होंने फ्रांस में हुई हिंसा और अशांति को पश्चिमी दुनिया के लिए चेतावनी बताया। इस तरह फ्रांस में शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब अमेरिकी राजनीतिक बहस में भी इमिग्रेशन और संस्कृति से जुड़े मुद्दों के साथ जोड़ा जा रहा है।
अमेरिकी चुनाव से पहले तेज हुई बयानबाजी
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव नजदीक आने के साथ रिपब्लिकन खेमे की ओर से इमिग्रेशन समेत कई सांस्कृतिक और सामाजिक मुद्दों पर बयानबाजी तेज हुई है। ट्रंप की लोकप्रियता में कथित गिरावट और विदेश नीति से जुड़े विवादों के बीच रिपब्लिकन पार्टी के सामने कांग्रेस में अपना प्रभाव बनाए रखने की चुनौती है। ऐसे में फ्रांस का आंदोलन अमेरिकी राजनीति में भी एक नया मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है।
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