Trump China Visit 2026: मध्य पूर्व से लेकर पूर्वी एशिया तक वैश्विक राजनीति का पारा गरमाया हुआ है। एक तरफ इजराइल और अमेरिका के ईरान के साथ संबंध नाजुक दौर से गुजर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्षों की गुप्त मुलाकातों और आधिकारिक यात्राओं ने कूटनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के कथित गुप्त दौरे और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बीजिंग यात्रा ने अंतरराष्ट्रीय समीकरणों को पूरी तरह बदल कर रख दिया है।
नेतन्याहू का यूएई दौरा: इजराइल का दावा और यूएई का इनकार
इजराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए जानकारी दी कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संयुक्त अरब अमीरात का एक गुप्त दौरा किया है। इजराइल के अनुसार, ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ के बीच नेतन्याहू ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद से मुलाकात की। इजराइल ने इस दौरे को दोनों देशों के संबंधों में एक ‘ऐतिहासिक सफलता’ करार दिया है। हालांकि, यूएई ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। यूएई सरकार ने स्पष्टता जाहिर करते हुए कहा है कि न तो इजराइली प्रधानमंत्री वहां आए और न ही किसी प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी की गई।
दक्षिणी लेबनान में हिंसा और तनाव का माहौल
कूटनीतिक दावों के बीच जमीन पर जंग जारी है। इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में अपने सैन्य हमलों को और तेज कर दिया है। ताजा हवाई हमलों में कम से कम 12 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इजराइल का कहना है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए इन ऑपरेशनों को जारी रखेगा। इस बीच, सीजफायर की स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है और किसी भी वक्त स्थिति और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।
ईरान की तीखी प्रतिक्रिया: सुरक्षा एजेंसियों का इनपुट
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने नेतन्याहू के यूएई दौरे की खबरों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा कि इजराइल के प्रधानमंत्री के बयान ने उस सच को स्वीकार कर लिया है, जिसकी जानकारी ईरान की सुरक्षा एजेंसियों ने बहुत पहले ही अपने नेतृत्व को दे दी थी। अरागची ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जो देश इजराइल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ साठगांठ कर रहे हैं और मुस्लिम जगत में फूट डाल रहे हैं, उन्हें सख्त जवाब का सामना करना पड़ेगा।
चीन पहुंचे डोनाल्ड ट्रंप: समुद्री नाकेबंदी खत्म करने पर जोर
इधर, वैश्विक शक्ति संतुलन को साधने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बीजिंग पहुंच चुके हैं। लगभग नौ वर्षों के अंतराल के बाद और अपने दूसरे कार्यकाल की यह उनकी पहली राजकीय यात्रा है। बीजिंग में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ट्रंप का भव्य औपचारिक स्वागत किया। इस यात्रा का सबसे मुख्य उद्देश्य चीन को इस बात के लिए तैयार करना है कि वह ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के कारण उत्पन्न हुई समुद्री नाकेबंदी को खत्म करने में मदद करे।
व्यापारिक तनाव और ताइवान मुद्दा: बातचीत के केंद्र में
ट्रंप और शी जिनपिंग की इस मुलाकात में केवल युद्ध ही नहीं, बल्कि कई पुराने विवाद भी चर्चा का विषय हैं। दोनों नेताओं के बीच व्यापारिक तनाव (Trade War) को कम करने और ताइवान को अमेरिका द्वारा की जा रही हथियारों की बिक्री जैसे संवेदनशील मुद्दों पर गंभीर बातचीत होने की संभावना है। अमेरिका चाहता है कि चीन वैश्विक स्थिरता के लिए अपनी भूमिका निभाए, जबकि चीन अपनी संप्रभुता और आर्थिक हितों को प्राथमिकता दे रहा है।यह हफ्ता वैश्विक कूटनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकता है, जहां एक तरफ मध्य पूर्व में युद्ध की आग है, तो दूसरी तरफ बड़े देशों के बीच समझौतों की कोशिशें जारी हैं।
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