Trump’s Big Offer to India: रूस के बदले वेनेजुएला से तेल खरीदेगा भारत? ट्रंप ने दिया ‘टैरिफ’ से बचने का बड़ा मौका

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को रूसी तेल का मोह छोड़कर वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने का प्रस्ताव दिया है। मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका अब वेनेजुएला के तेल पर नियंत्रण रख रहा है। क्या भारत इस ऑफर को स्वीकार कर 50% तक के भारी टैरिफ से बच पाएगा? जानिए अंदर की बात।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 31, 2026

Trump’s Big Offer to India: वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने भारत को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत दिया है, जिसके तहत भारत जल्द ही वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदना फिर से शुरू कर सकता है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, वाशिंगटन की ओर से यह पेशकश भारत के लिए रूसी तेल के एक ठोस विकल्प के रूप में की गई है। इस कदम का उद्देश्य भारत की रूस पर निर्भरता को कम करना और वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाना है। यह पहल ऐसे समय में हुई है जब भारत आने वाले महीनों में रूस से होने वाले तेल आयात में भारी कटौती करने की योजना बना रहा है।

रूस पर कसता शिकंजा: भारत क्यों कम कर रहा है रूसी कच्चे तेल का आयात?

यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत, रूस के लिए कच्चे तेल का एक बहुत बड़ा बाजार बनकर उभरा था, लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं। अमेरिका ने हाल ही में रूसी तेल के आयात पर टैरिफ (शुल्क) बढ़ा दिए हैं, जिससे रूसी तेल अब भारतीय रिफाइनरियों के लिए पहले की तरह किफायती नहीं रह गया है। सूत्रों के मुताबिक, भारत ने जनवरी में रूस से प्रतिदिन लगभग 12 लाख बैरल तेल आयात किया था, जिसे फरवरी में घटाकर 10 लाख और मार्च तक 8 लाख बैरल प्रतिदिन करने की तैयारी है। भविष्य में यह आंकड़ा गिरकर 5 से 6 लाख बैरल तक भी पहुँच सकता है। रूस की आय कम करना और यूक्रेन युद्ध की फंडिंग रोकना अमेरिका की इस नई रणनीति का प्रमुख हिस्सा है।

पुराने प्रतिबंध और नई संभावनाएं: वेनेजुएला के तेल पर ट्रंप का यू-टर्न?

मार्च 2025 के दौरान, ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर दबाव बनाने के लिए वहां से तेल खरीदने वाले देशों (जिसमें भारत भी शामिल था) पर 25 प्रतिशत का भारी टैरिफ लगाया था। लेकिन अब अमेरिकी रुख में नरमी देखी जा रही है। अमेरिका चाहता है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए वेनेजुएला की ओर रुख करे, ताकि रूस को वैश्विक बाजार से अलग-थलग किया जा सके। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वेनेजुएला का तेल निजी ट्रेडिंग फर्मों के जरिए बेचा जाएगा या वहां की सरकारी तेल कंपनी सीधे भारत को आपूर्ति करेगी, लेकिन इस कूटनीतिक रियायत से भारत को ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर बड़ी राहत मिल सकती है।

स्रोतों में विविधता: भारतीय रिफाइनरियों ने बदली अपनी रणनीति

भारत के केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि भारत अपने कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता लाने पर काम कर रहा है। पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद पिछले साल रूस ने भारत को भारी छूट पर तेल दिया था, लेकिन अमेरिकी टैरिफ बढ़ने के बाद दिसंबर में रूसी तेल का आयात पिछले दो साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। इस कमी को पूरा करने के लिए भारतीय रिफाइनरियों ने अब मिडिल ईस्ट (खाड़ी देशों), अफ्रीका और दक्षिण अमेरिकी देशों से तेल की खरीद बढ़ा दी है। ओपेक (OPEC) देशों की हिस्सेदारी भी भारतीय बाजार में फिर से बढ़ने लगी है।

क्या सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?

अमेरिका की ओर से मिला यह ऑफर भारत के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि भारत वेनेजुएला से फिर से बड़ी मात्रा में तेल आयात करता है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय कीमतों में स्थिरता मिलने की उम्मीद है। वेनेजुएला का तेल भारत की कई रिफाइनरियों के लिए तकनीकी रूप से उपयुक्त है। यह कदम न केवल भारत के ऊर्जा बिल को संतुलित करेगा, बल्कि अमेरिका के साथ द्विपक्षीय संबंधों को भी नई मजबूती प्रदान करेगा। देखना यह होगा कि भारत सरकार और निजी तेल कंपनियां इस नए अवसर का उपयोग किस प्रकार करती हैं।

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