Mamata Banerjee TMC MPs Rebel: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के चौंकाने वाले चुनावी नतीजों के सामने आने के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस वक्त अपने इतिहास के सबसे बड़े और खौफनाक सियासी संकट से गुजर रही है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक बहुत बड़ी और अप्रत्याशित बगावत खड़ी हो गई है।
पार्टी से अलग हुए एक बेहद मजबूत और असंतुष्ट गुट ने दावा किया है कि उन्हें टीएमसी के कम से कम 20 सांसदों का सीधा और पुख्ता समर्थन हासिल है। इस राजनीतिक भूचाल के बीच, कल ही इन बागी सांसदों के एक बड़े धड़े ने पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से बंद कमरे में एक बेहद महत्वपूर्ण मुलाकात भी की थी। इस मुलाकात के बाद से ही बंगाल की राजनीति में अटकलों का बाजार गर्म है और ममता बनर्जी के राजनीतिक किले में मची इस भारी भगदड़ पर अब महाराष्ट्र से शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की बेहद तीखी और आक्रामक प्रतिक्रिया सामने आई है।
UBT प्रवक्ता आनंद दुबे का तृणमूल कांग्रेस के बागियों पर सीधा प्रहार
बताते चले कि, तृणमूल कांग्रेस के भीतर मचे इस घमासान और बगावती सुरों पर करारा हमला बोलते हुए शिवसेना (यूबीटी) के मुख्य प्रवक्ता आनंद दुबे ने बागियों को आड़े हाथों लिया है।
आनंद दुबे ने टीएमसी के बागी नेताओं पर तंज कसते हुए कहा, “जब तक पश्चिम बंगाल में पिछले 15 सालों से ममता बनर्जी की मजबूत सरकार चल रही थी, तब तक यही सब बागी सांसद और विधायक दिन-रात दीदी का महिमामंडन करते थकते नहीं थे। लेकिन अब जब राज्य की सत्ता उनके हाथ से चली गई है और उनकी पार्टी चुनाव हार चुकी है, तो इन नेताओं का असली चरित्र सामने आ गया है। सच तो यह है कि जब भी कोई जहाज डूबने लगता है, तो उसमें से सबसे पहले चूहे ही उतरकर भागते हैं; ठीक उसी प्रकार आज हार के डर से टीएमसी के भीतर भी स्वार्थी नेताओं की भारी सियासी भगदड़ मची हुई है।”
‘संकट के समय कमजोर लोग मैदान छोड़कर भाग जाते हैं’
आनंद दुबे ने अपनी ही पार्टी और एनसीपी (शरद पवार) का उदाहरण देते हुए राजनीतिक निष्ठा का पाठ पढ़ाया। उन्होंने आगे कहा, “चाहे आप महाराष्ट्र में हमारी पार्टी शिवसेना या फिर एनसीपी का इतिहास उठाकर देख लें, जब-जब संगठन पर कोई भारी राजनीतिक तकलीफ या संकट आता है, तो केवल कमजोर और वैचारिक रूप से खोखले लोग ही मैदान छोड़कर भाग खड़े होते हैं। जो नेता वास्तव में मजबूत और वफादार होते हैं, वो विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी पार्टी के साथ मुस्तैदी से टिके रहते हैं।”
‘भारतीय जनता पार्टी की पर्दे के पीछे से रची जा रही है बड़ी साजिश’
शिवसेना यूबीटी नेता ने इस पूरी फूट के लिए सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मुख्य जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में बहुत सारी क्षेत्रीय पार्टियों के भीतर बीजेपी जानबूझकर तोड़फोड़ की गंदी राजनीति करती है, लेकिन हमारे जैसे बहुत से स्वाभिमानी नेता उनके दबाव के आगे नहीं झुकते और अपनी पार्टी में ही रुके रहते हैं।
आनंद दुबे ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस में जो यह मौजूदा बंटवारा और गहरी फूट दिखाई दे रही है, इसके पीछे कहीं न कहीं सीधे तौर पर बीजेपी ही काम कर रही है। भारतीय जनता पार्टी भले ही इस बगावत में खुलकर सामने नहीं आ रही है, लेकिन इसके पीछे की असली हवा हमेशा दिल्ली से ही आती है और देखते ही देखते दिल्ली की यही सियासी हवा बंगाल में आकर एक बड़े राजनीतिक तूफान में तब्दील हो जाती है, जिसे देश की जागरूक जनता अब अच्छी तरह समझ रही है।
‘देश में तुरंत बनना चाहिए एक कड़ा और नया कानून’
अपनी बात को समाप्त करते हुए आनंद दुबे ने देश की मौजूदा लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनाव प्रणाली में बड़े सुधार की वकालत की। उन्होंने बेहद गुस्से में कहा कि ये स्वार्थी नेता पहले किसी पार्टी विशेष के सिंबल (चुनाव चिह्न) पर जनता से वोट मांगकर चुनाव जीतते हैं और फिर बाद में पार्टी छोड़ते ही बेशर्मी से दावा ठोकने लगते हैं कि यह सिंबल ही हमारा है। शिवसेना यूबीटी के मुताबिक, पूरे देश के भीतर जो यह खरीद-फरोख्त और दलबदल की गंदी राजनीति शुरू हुई है, उससे देश के आम मतदाताओं को तुरंत निजात दिलाने की सख्त जरूरत है। आनंद दुबे ने मांग की है कि इस तरह की अनैतिक बगावत और सिंबल की चोरी को हमेशा के लिए रोकने के लिए संसद में तत्काल प्रभाव से एक बेहद कड़ा और नया दलबदल विरोधी कानून बनाया जाना चाहिए।










