TMC MLA Suspend: तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने पार्टी लाइन के खिलाफ काम करने और संगठनात्मक नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में अपने दो विधायकों, संदीपन साहा और ऋतब्रता बनर्जी को तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने यह कदम पार्टी के भीतर अनुशासन बनाए रखने और विपक्षी गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से उठाया है। पार्टी की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि दोनों नेताओं पर लंबे समय से पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के गंभीर आरोप थे, जिसकी समीक्षा के बाद यह सख्त निर्णय लिया गया है।
फर्जी हस्ताक्षर मामले की CID जांच और राजनीतिक हलचल
यह निष्कासन विधानसभा में कथित ‘फर्जी हस्ताक्षर जालसाजी’ मामले के बाद हुआ है। हाल ही में सुवेंदु अधिकारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि इस पूरे मामले की सीआईडी जांच की नींव ही संदीपन साहा और ऋतब्रता बनर्जी द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को सौंपी गई एक शिकायत पर रखी गई थी। इस खुलासे के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई थी। हालांकि, निष्कासन की घोषणा के बाद से ही दोनों नेताओं ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे पार्टी के भीतर आंतरिक कलह और सफाई अभियान के रूप में देख रहे हैं।
संदीपन साहा का बड़ा दावा
पार्टी से निकाले जाने के बाद संदीपन साहा ने अपनी चुप्पी तोड़ी है और इसे एक ‘गंभीर भूल’ करार दिया है। साहा का कहना है कि जिस सूची पर हस्ताक्षर जमा किए गए थे, उसमें कई अनियमितताएं थीं और कई विधायक उस समय मौके पर मौजूद ही नहीं थे। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि सूची की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी उनकी थी, जिसका निर्वहन करने में वे विफल रहे। साहा का दावा है कि दस्तावेजों में विसंगतियों के बावजूद हस्ताक्षर प्रक्रिया आगे बढ़ाना पार्टी नेतृत्व की बड़ी चूक है।
क्या है पूरा ‘फर्जी हस्ताक्षर विवाद’ और SIT का गठन?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब अभिषेक बनर्जी ने पार्टी की ओर से विभिन्न पदों के लिए कुछ नाम प्रस्तावित किए थे, जिसमें शोभनदेब चट्टोपाध्याय, नयना बंद्योपाध्याय और फिरहाद हकीम जैसे बड़े नाम शामिल थे। जब विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस ने इस प्रस्ताव पर विधायकों के हस्ताक्षर वाली सूची मांगी, तो सत्यापन के दौरान कई हस्ताक्षरों में गड़बड़ी पाई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब सीआईडी ने जांच शुरू कर दी है। डीआईजी रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जो फर्जी हस्ताक्षरों की परत दर परत जांच कर रहा है।
TMC में आंतरिक अनुशासन
संदीपन साहा और ऋतब्रता बनर्जी का निष्कासन टीएमसी के लिए एक बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है। विधानसभा के भीतर और बाहर जिस तरह से हस्ताक्षरों को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, उसने पार्टी की छवि को प्रभावित किया है। अब सीआईडी द्वारा गठित एसआईटी की जांच रिपोर्ट ही यह तय करेगी कि आने वाले दिनों में और कितने चेहरे इस विवाद की चपेट में आते हैं। टीएमसी प्रबंधन अब हर हाल में पार्टी के भीतर व्याप्त असंतोष को नियंत्रित करने और अनुशासन बहाल करने की कवायद में जुटा है।










