TMC Crisis: बगावत के बीच काकोली घोष का सख्त रुख, दिया विवादित बयान

टीएमसी में बढ़ती अंदरूनी कलह के बीच काकोली घोष का बयान चर्चा में है। उन्होंने ऐसा क्या कहा जिससे बंगाल की राजनीति में नई बहस छिड़ गई? 20 सांसदों के अलग गुट की चर्चा, नेतृत्व पर सवाल और भविष्य की रणनीति को लेकर कई बड़े संकेत सामने आए हैं।

बगावत के बीच काकोली घोष का सख्त रुख

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जून 9, 2026

TMC Crisis: पश्चिम बंगाल में हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर असंतोष और मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। राज्य में चुनावी परिणामों के बाद पार्टी के अंदर उठ रहे सवालों ने नेतृत्व के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इसी क्रम में पार्टी की वरिष्ठ सांसद Kakoli Ghosh Dastidar ने अपने बयान से राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने साफ कहा कि पार्टी से अलग होने का उनका निर्णय अचानक नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रही असंतुष्टि का परिणाम है। उनके अनुसार, पश्चिम बंगाल में प्रशासनिक स्थिति, शासन से जुड़ी समस्याएं और बेरोजगारी जैसे मुद्दे लगातार बढ़ते गए, जिनसे वे काफी समय से चिंतित थीं।

‘सिर कट जाएगा लेकिन झुकेंगे नहीं’ वाला बयान

एक न्यूज एजेंसी ANI को दिए गए इंटरव्यू में काकोली घोष ने उन आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी, जिनमें उन्हें अवसरवादी बताया जा रहा था। उन्होंने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनका राजनीतिक सफर दशकों पुराना है और वे 2011 में ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद राजनीति में नहीं आईं, बल्कि लंबे समय से सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि वे आलोचनाओं से प्रभावित नहीं होतीं और अपने रुख पर कायम रहेंगी। उनके शब्दों में, “मेरा सिर कट जाएगा लेकिन मैं झुकूंगी नहीं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में काफी संघर्ष देखा है और ऐसे आरोपों का उन पर कोई असर नहीं पड़ता।

राष्ट्रीय हित को बताया प्राथमिकता

अपने बयान में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका ध्यान केवल पार्टी राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि वे राष्ट्रीय हित और देश की सुरक्षा को सर्वोपरि मानती हैं। उनके अनुसार, वर्तमान समय में सबसे बड़ा मुद्दा देश की स्थिरता और सुरक्षा है, जिस पर सभी राजनीतिक दलों को काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आगे की राजनीतिक स्थिति समय के साथ स्पष्ट होगी, लेकिन फिलहाल उनका फोकस बंगाल और देश के व्यापक हितों पर है। उनके अनुसार, “राष्ट्र का मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण है।”

संगठन से दूरी और उपेक्षा का आरोप

काकोली घोष ने पार्टी नेतृत्व के व्यवहार पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि चुनावी नतीजों के बाद जब उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए एक पद से इस्तीफा दिया, तब भी पार्टी की ओर से कोई संवाद नहीं किया गया। उनके अनुसार, न तो किसी वरिष्ठ नेता ने संपर्क किया और न ही स्थिति समझने की कोशिश की गई। उन्होंने इसे “दरकिनार किए जाने” जैसा अनुभव बताया और कहा कि इस तरह की उपेक्षा ने उनके मन में असंतोष को और बढ़ाया।

अलग गुट बनाने की घोषणा और राजनीतिक संकेत

इसी बीच उन्होंने यह भी घोषणा की कि लोकसभा में टीएमसी के लगभग 20 सांसदों के एक समूह ने अलग बैठने की व्यवस्था के लिए लोकसभा अध्यक्ष को औपचारिक अनुरोध दिया है। यह कदम पार्टी के भीतर बढ़ती खींचतान और संभावित विभाजन की ओर संकेत करता है। कुल मिलाकर, काकोली घोष के इस बयान ने टीएमसी के भीतर जारी अंदरूनी तनाव को और उजागर कर दिया है। इससे आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति में और भी बड़े बदलाव देखने की संभावना जताई जा रही है।