Tirupati Temple Laddu Scam: घी में मिलावट पर भड़के रामचंदर राव, पिछली सरकार से मांगी माफी

तिरुपति लड्डू प्रसादम में मिलावटी घी के इस्तेमाल पर तेलंगाना BJP नेता एन. रामचंदर राव ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे करोड़ों हिंदुओं की आस्था का अपमान और 'पब्लिक सेफ्टी' के लिए बड़ा खतरा बताया। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका खारिज करते हुए SIT जांच और राज्य पैनल के बीच के कानूनी पेच पर स्थिति स्पष्ट की है।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

फ़रवरी 25, 2026

Tirupati Temple Laddu Scam: तेलंगाना भाजपा के वरिष्ठ नेता एन. रामचंदर राव ने तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के प्रसिद्ध ‘प्रसादम’ लड्डू बनाने में मिलावटी घी के कथित उपयोग की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने इसे न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बताया, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था का गंभीर अपमान भी करार दिया। इस बीच, कानूनी मोर्चे पर भी इस मामले ने तूल पकड़ लिया है, जहाँ सुप्रीम कोर्ट ने जांच प्रक्रिया को लेकर दायर याचिकाओं पर अपनी टिप्पणी की है।

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प्रसादम की शुद्धता और सुरक्षा पर भाजपा का कड़ा रुख

न्यूज एजेंसी से बातचीत के दौरान एन. रामचंदर राव ने कहा कि लड्डू के घी में मिलावट की पुष्टि करने वाली FSL (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) की रिपोर्ट ने भक्तों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि तिरुपति का लड्डू केवल एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की गहरी आस्था का प्रतीक है। रामचंदर राव के अनुसार, घी में पशु चर्बी या खतरनाक अशुद्धियों का मिला होना एक अक्षम्य अपराध है, जो सीधे तौर पर ‘पब्लिक सेफ्टी’ और धार्मिक रीति-रिवाजों को निशाना बनाता है।

पिछली सरकार की जिम्मेदारी और कानूनी कार्रवाई की मांग

आपको बता दे कि, रामचंदर राव ने इस विवाद के लिए आंध्र प्रदेश की पूर्ववर्ती सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने तर्क दिया कि सत्ता में रहते हुए मंदिरों के प्रबंधन में पारदर्शिता और शुद्धता सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व था। भाजपा नेता ने मांग की कि पिछली सरकार को अपनी विफलताओं के लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून अब अपना काम कर रहा है और इस महापाप के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति या संस्था को बख्शा नहीं जाना चाहिए, क्योंकि यह विश्वासघात बिना दूध के शुद्ध घी के नाम पर किया गया है।

विशेष जांच दल (SIT) और न्यायिक प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप का मामला

इस विवाद का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू कानूनी लड़ाई है। हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर की गई उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें राज्य सरकार द्वारा गठित एक सदस्यीय समिति को चुनौती दी गई थी। यह समिति तिरुपति लड्डू मामले में घी की गुणवत्ता की जांच कर रही SIT (Special Investigation Team) की रिपोर्ट का विश्लेषण करने के लिए बनाई गई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत विभिन्न पक्षों की दलीलों को सुन रही है ताकि जांच निष्पक्ष बनी रहे।

समानांतर जांच समिति और सुब्रमण्यम स्वामी के कानूनी तर्क

सुब्रमण्यम स्वामी ने न्यायालय में दलील दी थी कि जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही SIT जांच का निर्देश दे चुका है और मामला ‘सब-ज्यूडिस’ (विचाराधीन) है, तो राज्य सरकार को एक समानांतर पैनल नहीं बनाना चाहिए। स्वामी का तर्क था कि एक सदस्यीय समिति का गठन चल रही आपराधिक कार्यवाही (Criminal Proceedings) के काम में हस्तक्षेप या ओवरलैप कर सकता है। हालांकि, न्यायिक पीठ ने वर्तमान परिस्थितियों में हस्तक्षेप करने से मना करते हुए जांच प्रक्रिया को सुचारू रूप से जारी रखने का संकेत दिया है।

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