Asaduddin Owaisi: भारतीय राजनीति में एक बार फिर ऐतिहासिक शख्सियतों को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। तेलंगाना भाजपा के अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर तीखा हमला बोलते हुए उन पर इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने और महान स्वतंत्रता सेनानियों के अपमान का आरोप लगाया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब ओवैसी ने टीपू सुल्तान की विरासत का बचाव करते हुए वीर सावरकर पर विवादास्पद टिप्पणी की।
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एन. रामचंदर राव का पलटवार
बताते चले कि, भाजपा नेता एन. रामचंदर राव ने एआईएमआईएम की विचारधारा पर सवाल उठाते हुए कहा कि टीपू सुल्तान को नायक की तरह पेश करना ऐतिहासिक तथ्यों के साथ अन्याय है। एन. रामचंदर राव के अनुसार, मैसूर के शासक टीपू सुल्तान कर्नाटक और आसपास के क्षेत्रों में हिंदुओं पर किए गए कथित अत्याचारों के लिए जिम्मेदार थे। उन्होंने तर्क दिया कि टीपू की नीतियां हमेशा से हिंदू विरोधी रही हैं, लेकिन वोट बैंक की राजनीति के लिए कुछ दल उन्हें महान दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि भारत की जनता ऐसे विकृत इतिहास और झूठे विमर्श को कभी स्वीकार नहीं करेगी।
वीर सावरकर पर ओवैसी की टिप्पणी
असदुद्दीन ओवैसी ने एक जनसभा में दावा किया था कि टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों से लड़ते हुए शहादत दी, जबकि वीर सावरकर ने ब्रिटिश हुकूमत को ‘लव लेटर’ (माफीनामे) लिखे थे। इन आरोपों को खारिज करते हुए रामचंदर राव ने कहा कि विनायक दामोदर सावरकर के खिलाफ दुष्प्रचार कांग्रेस द्वारा गढ़ा गया एक पुराना एजेंडा है, जिस पर अब ओवैसी चल रहे हैं। एन. रामचंदर राव ने कहा कि सावरकर एक महान क्रांतिकारी थे और उनके बारे में फैलाए जा रहे ‘माफी के पत्र’ के दावे पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत हैं।
ओवैसी का पक्ष
विवाद के केंद्र में रहे असदुद्दीन ओवैसी ने टीपू सुल्तान को हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक बताया। उन्होंने महात्मा गांधी की ‘यंग इंडिया’ पत्रिका और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की पुस्तक ‘विंग्स ऑफ फायर’ का हवाला देते हुए कहा कि भारत की आज की रॉकेट तकनीक टीपू के ही सपनों का विस्तार है। ओवैसी ने जोर देकर कहा कि टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के सामने घुटने टेकने के बजाय मैदान-ए-जंग में जान देना बेहतर समझा, जो उन्हें सच्चा राष्ट्रभक्त साबित करता है।
मालेगांव में चित्र विवाद
इतिहास की इस जंग का असर प्रशासनिक स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। मालेगांव नगर निगम के डिप्टी मेयर शान-ए-हिंद निहाल अहमद ने अपने कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाने के अधिकार का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने विरोध को दरकिनार करते हुए कहा कि एक समाजवादी सोच के व्यक्ति होने के नाते उन्हें अपने आदर्शों की फोटो लगाने का पूरा हक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यालय के नवीनीकरण के कारण हटाई गई तस्वीर को काम पूरा होते ही दोबारा सम्मान के साथ स्थापित किया जाएगा।
एंग्लो-मैसूर युद्ध और ‘शेर-ए-मैसूर’ की जटिल विरासत
ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देखें तो 18वीं सदी के मैसूर शासक टीपू सुल्तान एक अत्यंत जटिल व्यक्तित्व रहे हैं। अंग्रेजों के खिलाफ चार एंग्लो-मैसूर युद्धों में उनकी बहादुरी के कारण उन्हें ‘शेर-ए-मैसूर’ की उपाधि मिली। जहां एक ओर उन्हें तकनीकी नवाचार और अंग्रेजों के कट्टर दुश्मन के रूप में देखा जाता है, वहीं दूसरी ओर उनकी धार्मिक नीतियों को लेकर विवाद आज भी भारतीय राजनीति के ध्रुवीकरण का एक बड़ा कारण बना हुआ है।









