योगी सरकार का बड़ा कदम, खाद्य लाइसेंस नियमों में बदलाव, 1 अप्रैल से कारोबारियों के लिए नई व्यवस्था लागू

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के छोटे व्यापारियों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को बड़ी राहत देते हुए योगी सरकार ने खाद्य लाइसेंस और पंजीकरण से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किया है। नए प्रावधानों के तहत अब हर साल खाद्य लाइसेंस का नवीनीकरण कराना अनिवार्य नहीं होगा। यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल से लागू होगी। सरकार ने यह बदलाव खाद्य सुरक्षा और मानक (खाद्य कारोबार का अनुज्ञापन और पंजीकरण) संशोधन विनियम, 2026 के तहत किया है। गजट में प्रकाशन के साथ ही नियम प्रभावी हो चुके हैं और इन्हें एक अप्रैल से लागू किया जाएगा। लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत

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Published On :

मार्च 17, 2026

लखनऊ 

उत्तर प्रदेश के छोटे व्यापारियों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को बड़ी राहत देते हुए योगी सरकार ने खाद्य लाइसेंस और पंजीकरण से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किया है। नए प्रावधानों के तहत अब हर साल खाद्य लाइसेंस का नवीनीकरण कराना अनिवार्य नहीं होगा। यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल से लागू होगी।

सरकार ने यह बदलाव खाद्य सुरक्षा और मानक (खाद्य कारोबार का अनुज्ञापन और पंजीकरण) संशोधन विनियम, 2026 के तहत किया है। गजट में प्रकाशन के साथ ही नियम प्रभावी हो चुके हैं और इन्हें एक अप्रैल से लागू किया जाएगा।

लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं
नए नियमों के अनुसार नगर निगम या स्ट्रीट वेंडर्स (जीविका संरक्षण एवं पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014 के तहत पंजीकृत ठेले-खोमचे और फेरीवाले अब स्वतः ही भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) में पंजीकृत माने जाएंगे। इससे छोटे दुकानदारों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने और लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

पंजीकरण प्रमाणपत्र तुरंत जारी किया जा सकेगा
इस व्यवस्था के दायरे में छोटे खुदरा विक्रेता, स्ट्रीट फूड विक्रेता, अस्थायी स्टॉल संचालक, फूड ट्रक संचालक और कुटीर स्तर के खाद्य उद्योग भी शामिल होंगे। जरूरी दस्तावेज पूरे होने पर अब पंजीकरण प्रमाणपत्र तुरंत जारी किया जा सकेगा।

हालांकि सभी खाद्य कारोबारियों को स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। यदि कोई व्यापारी वार्षिक शुल्क या फूड सेफ्टी अनुपालन से जुड़ा रिटर्न जमा नहीं करता है, तो उसका लाइसेंस या पंजीकरण स्वतः निलंबित माना जाएगा।

निरीक्षण प्रक्रिया में भी बदलाव किया
सरकार ने निरीक्षण प्रक्रिया में भी बदलाव किया है। अब खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण जोखिम आधारित प्रणाली के तहत किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर थर्ड पार्टी से फूड सेफ्टी ऑडिट भी कराया जा सकेगा।

टर्नओवर सीमा में भी बढ़ोतरी
व्यापारियों के संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र गोयल के मुताबिक पहले व्यापारी एक से पांच वर्ष की अवधि के लिए लाइसेंस लेते थे। समय पर नवीनीकरण न कराने पर लाइसेंस निरस्त हो जाता था और उन्हें दोबारा जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। अब इस बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है।

इसके अलावा नियमों में टर्नओवर की सीमा भी बढ़ा दी गई है। पहले 12 लाख रुपये सालाना टर्नओवर तक के कारोबारियों को पंजीकरण मिलता था, जिसे अब बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

यह सीमा बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये कर दी गई
वहीं पहले पांच करोड़ रुपये तक के कारोबारियों को राज्य स्तर से लाइसेंस मिलता था और उससे अधिक टर्नओवर पर केंद्र से लाइसेंस लेना पड़ता था। अब यह सीमा बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये कर दी गई है।

हालांकि जिन कारोबारियों के लाइसेंस या पंजीकरण की वैधता 31 मार्च तक है, उन्हें फिलहाल नवीनीकरण कराना होगा। इसके बाद नए नियम पूरी तरह लागू हो जाएंगे।

 

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