नए भारत की नई खादी को मिल रही वैश्विक पहचान, विन्ध्या वैली-कबीरा बने गुणवत्ता के प्रतीक: राज्यमंत्री जायसवाल

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि खादी केवल वस्त्र नहीं, बल्कि राष्ट्र की गौरवशाली पहचान और आत्मनिर्भर भारत का पथप्रदर्शक है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में खादी को "नए भारत की नई खादी" के रूप में नई पहचान मिली है, जिससे पूरे देश में खादी पुनर्जागरण का सूत्रपात हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश, युवाओं का सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। म.प्र. खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से खादी और ग्रामोद्योग राज्य की प्रगति का सशक्त स्तंभ बन रहे हैं। बुनकर मुद्रा योजना के तहत

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Published On :

मई 11, 2026

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भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि खादी केवल वस्त्र नहीं, बल्कि राष्ट्र की गौरवशाली पहचान और आत्मनिर्भर भारत का पथप्रदर्शक है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में खादी को "नए भारत की नई खादी" के रूप में नई पहचान मिली है, जिससे पूरे देश में खादी पुनर्जागरण का सूत्रपात हुआ है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश, युवाओं का सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। म.प्र. खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से खादी और ग्रामोद्योग राज्य की प्रगति का सशक्त स्तंभ बन रहे हैं। बुनकर मुद्रा योजना के तहत पिछले तीन वर्षों 2023-24 से 2025-26 में कुल 194 बुनकरों को 268.50 लाख रुपये का ऋण वितरित किया गया है। वर्ष 2023-24 में 44 बुनकरों को 21.40 लाख, 2024-25 में 147 बुनकरों को 231.80 लाख और 2025-26 में 3 बुनकरों को 15.30 लाख रुपये का ऋण दिया गया। उन्होंने कहा कि गांधीजी के ‘ग्राम स्वराज’ और ‘गाँव की ओर जाओ’ संदेश को साकार करते हुए बोर्ड ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, परंपरागत कारीगरी को आधुनिक नवाचार से जोड़ने और सांस्कृतिक गौरव को बढ़ाने का कार्य कर रहा है।

कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  दिलीप जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के "आत्मनिर्भर भारत, भारत में बनाओ, स्वदेशी के लिए मुखर, स्टार्टअप इंडिया" जैसे अभियानों और "सबका साथ, सबका विकास" मंत्र ने खादी एवं ग्रामोद्योग को वैश्विक पहचान दिलाई है। "स्थानीय से वैश्विक" का दृष्टिकोण कारीगरों और ग्रामीण उद्यमियों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ रहा है।

राज्यमंत्री  जायसवाल ने कहा कि भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय द्वारा 50 हजार से 5 लाख तक की ऋण सुविधा व्यक्तिगत बुनकर, उद्यमी, स्व-सहायता समूह, हथकरघा संगठन और सहकारी समितियों को दी जा रही है। बुनकरों की सामाजिक सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री जीवन बीमा योजना में तीन वर्षों में 616 बुनकर और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में 840 बुनकर बीमित किए गए। प्रधानमंत्री जीवन बीमा योजना में 436 रुपये वार्षिक शुल्क पर 2 लाख का जीवन बीमा और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में मात्र 20 रुपये वार्षिक शुल्क पर 2 लाख का दुर्घटना बीमा मिल रहा है।

राज्यमंत्री  जायसवाल ने कहा कि म.प्र. खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड सूती, ऊनी, रेशमी एवं पॉलीवस्त्र खादी के साथ मसाले, साबुन, जड़ी-बूटी उत्पाद एवं हस्तनिर्मित वस्तुओं को बढ़ावा दे रहा है। विपणन के लिए "विन्ध्या वैली" और "कबीरा" जैसे नाम स्थापित किए गए हैं जो गुणवत्ता और परंपरा के प्रतीक हैं। "अपना हाथ – अपना साथ" के मार्गदर्शन में महिला स्व-सहायता समूहों, कारीगरों और उद्यमियों को तकनीकी एवं वित्तीय सहयोग दिया जा रहा है।

प्रबंध संचालक  माल सिंह भयड़िया ने बताया कि महात्मा गांधी जी के "गाँव की ओर चलो" आह्वान से प्रेरित होकर मंडल ने ग्रामोद्योग को आर्थिक एवं सामाजिक परिवर्तन का सशक्त साधन बनाया है। सुव्यवस्थित योजनाओं से ग्रामीण कारीगरों के उत्पादों को उचित बाजार मिल रहा है। बोर्ड की नई अंतरजाल साइट कारीगरों, उद्यमियों एवं समाज के बीच मजबूत सेतु का कार्य करेगी। प्रशिक्षण कार्यक्रम और प्रदर्शनियाँ प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को भी संरक्षित कर रही हैं।

तीन वर्षों की प्रगति एक नजर में

  •     बुनकर मुद्रा योजना: 194 बुनकरों को 268.50 लाख रुपये का ऋण वितरित
  •     प्रधानमंत्री जीवन बीमा योजना: 616 बुनकर बीमित
  •     प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना: 840 बुनकर बीमित

 

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