महाकाल वन मेला “समृद्ध वन, खुशहालजन थीम पर 11 से 16 फरवरी तक

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उज्जैन में बुधवार को शाम 4 बजे दशहरा मैदान, सेठी नगर उज्जैन में वन मेले का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव एम.एफ.पी. पार्क द्वारा निर्मित प्राकृतिक "होली रंग गुलाल'' एवं "महाकाल स्मृति उपहार'' का विमोचन करेंगे। साथ ही वन विभाग की एक नवीन पहल "महाकाल वन प्रसादम'' का भी शुभारंभ करेंगे। महाकाल वन मेला "समृद्ध वन, खुशहालजन'' थीम पर आधारित होगा, जो 11 से 16 फरवरी 2026 तक चलेगा। महाकाल की नगरी उज्जैन में वन मेले का आयोजन पहली बार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव वन विभाग की प्रदर्शनी का शुभारंभ कर अवलोकन

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फ़रवरी 10, 2026

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भोपाल.

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उज्जैन में बुधवार को शाम 4 बजे दशहरा मैदान, सेठी नगर उज्जैन में वन मेले का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव एम.एफ.पी. पार्क द्वारा निर्मित प्राकृतिक "होली रंग गुलाल'' एवं "महाकाल स्मृति उपहार'' का विमोचन करेंगे। साथ ही वन विभाग की एक नवीन पहल "महाकाल वन प्रसादम'' का भी शुभारंभ करेंगे। महाकाल वन मेला "समृद्ध वन, खुशहालजन'' थीम पर आधारित होगा, जो 11 से 16 फरवरी 2026 तक चलेगा। महाकाल की नगरी उज्जैन में वन मेले का आयोजन पहली बार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव वन विभाग की प्रदर्शनी का शुभारंभ कर अवलोकन करेंगे। साथ ही वन मंडलाधिकारी एवं प्रबंध संचालक, जिला यूनियन दक्षिण पन्ना एवं वन रक्षक, जिला यूनियन दक्षिण पन्ना को प्रशस्ति-पत्र प्रदान करेंगे। कार्यक्रम में वन, पर्यावरण राज्यमंत्री  दिलीप सिंह अहिरवार, अपर मुख्य सचिव वन एवं प्रशासक, मध्यप्रदेश राज्य लघु वनोपज संघ  अशोक बर्णवाल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख  व्ही.एन. अंबाडे और प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश राज्य लघु वनोपज संघ डॉ. समिता राजौरा उपस्थित रहेंगे।

मेले में प्रदेश के वनवासियों द्वारा एकत्र की जाने वाली अकाष्ठीय वनोपज के प्रदर्शन, संरक्षण, संवर्धन, प्रसंस्करण एवं विपणन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मेले का आयोजन किया जा रहा है। वन मेला प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता के वैभव को प्रदर्शित करने का एक सशक्त माध्यम है। अकाष्ठीय वनोपज संग्राहक, वन धन केन्द्रों, प्राथमिक लघु वनोपज समितियाँ, व्यापारीगण, हर्बल और आयुर्वेदिक उद्योग के प्रतिनिधि इस आयोजन में भाग लेंगे और अपने उत्पादों का प्रदर्शन एवं विक्रय करेंगे। वनों में उपलब्ध अकाष्ठीय वनोपज व्यापक तौर पर ग्रामीण आजीविका का महत्वपूर्ण माध्यम है। प्रदेश में अकाष्ठीय वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा हुआ है।

वन मेले में लगभग 250 भव्य एवं आकर्षक स्टॉल्स लगाये जा रहे हैं, जिसमें 16 स्टॉल्स विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी के लिये, 76 स्टॉल्स प्राथमिक लघु वनोपज समितियों एवं वन धन केन्द्रों के लिये, एक भव्य स्टॉल विंध्य हर्बल्स के लिये, 5 स्टॉल्स लघु वनोपज के जीवंत प्रदर्शन के लिये, ओपीडी (नि:शुल्क चिकित्सीय परामर्श) के लिये 50 स्टॉल्स आरक्षित रखे गये हैं। इसके अलावा 76 स्टॉल्स निजी क्षेत्र के स्टॉल धारकों के लिये और 16 स्टॉल्स फूड जेन के लिये रखे गये हैं। मेले में किड्स जोन, व्हील चेयर्स, गोल्फ कार्ट, सिटिंग एरिया, वॉटर पाइंट, सेल्फी पाइंट की सुविधाएँ भी आगंतुकों को उपलब्ध रहेंगी। मेले में क्रेता-विक्रेता सम्मेलन, आयुर्वेर्दिक डॉक्टर्स एवं परम्परागत वैद्यों द्वारा नि:शुल्क चिकित्सीय परामर्श, ज्ञानवर्धक सांस्कृतिक कार्यक्रम और परम्परागत भोज्य पदार्थों की उपलब्धता रहेगी।

वन मेले में चीता परिवार एवं डायनासोर का विशाल स्कल्पचर, वरिष्ठ नागरिकों के लिये व्हील-चेयर एवं गोल्फ कॉर्ट की सुविधा, ओपीडी में उपचार कराने वाले लोगों के लिये पृथक से बैठक व्यवस्था, महाकाल मंदिर से मेला परिसर तक नि:शुल्क बस सुविधा, बच्चों के लिये आकर्षक एवं मजेदार किड्स जोन की सुविधा, फूड जोन में बाँधवगढ़ का गोंडी व्यंजन, छिंदवाड़ा का वन भोज रसोई और अलीराजपुर का दाल पानिया आकर्षण का विशेष केन्द्र रहेगा।

 

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