रांची से गुमला-डालटेनगंज तक हाईवे को मिलेगा नया लुक, झारखंडी लोककला से सजेंगी सड़कें

 रांची  झारखंड की राजधानी रांची से गुमला और डालटेनगंज की ओर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग को सोहराय चित्रकला से सजाया जाएगा। राष्ट्रीय राजमार्ग को झारखंडी कला से सजाने की शुरुआत रांची से होगी। ओवरब्रिज के किनारे को पारंपरिक कलाकृति से सजाया जाएगा। रांची में एनएच 75 और एनएच 23 के किनारे झारखंडी कलाकारों से सोहराय चित्रकला बनवाई जाएगी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) के रांची क्षेत्रीय कार्यालय ने झारखंडी लोक कला को बढ़ावा देने के मकसद से यह कार्य शुरू करने का निर्णय लिया है। जल्द ही इसका शुभारंभ हो जाएगा। इस कदम का उद्देश्य झारखंड की समृद्ध लोककला एवं

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Published On :

अक्टूबर 30, 2026

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 रांची
 झारखंड की राजधानी रांची से गुमला और डालटेनगंज की ओर जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग को सोहराय चित्रकला से सजाया जाएगा। राष्ट्रीय राजमार्ग को झारखंडी कला से सजाने की शुरुआत रांची से होगी। ओवरब्रिज के किनारे को पारंपरिक कलाकृति से सजाया जाएगा। रांची में एनएच 75 और एनएच 23 के किनारे झारखंडी कलाकारों से सोहराय चित्रकला बनवाई जाएगी।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) के रांची क्षेत्रीय कार्यालय ने झारखंडी लोक कला को बढ़ावा देने के मकसद से यह कार्य शुरू करने का निर्णय लिया है। जल्द ही इसका शुभारंभ हो जाएगा। इस कदम का उद्देश्य झारखंड की समृद्ध लोककला एवं सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहित करने के साथ राष्ट्रीय राजमार्गों की सुंदरता को बढ़ावा देना है।

निकट भविष्य में झारखंड में और जगहों पर भी एनएच को पारंपरिक लोक कला से सजाने की योजना है। एलिवेटेड कारिडोर पर सोहराय का चित्रांकन रांची शहर को विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान प्रदान करेगा। गुजरने वाले लोगों को समृद्ध झारखंडी कला और परंपरा से रूबरू होने का अवसर मिलेगा।

न रासायनिक रंग न ब्रश, मिट्टी से सोहराय का चित्रांकन
झारखंड की सोहराय कला बेहद अनूठी है। संताल, मुंडा, उरांव, गूंज जनजाति के लोग अपने घर एवं पशुशाला की दीवारों पर सोहराय कला के तहत अलग अलग आकृति बनाते हैं। दीपावली और फसल काटने के मौसम में सोहराय बनाने में लोग आनंद की अनुभूति करते हैं।

इसमें न रासायनिक रंग का उपयोग होता है न ब्रश का। चूना, दूधिया और लाल मिट्टी, हेमेटाइट पत्थर, काली मैंगनीज का इसे बनाने में उपयोग किया जाता है। ब्रश की जगह दातून, बांस की तिल्ली, कपड़ा, कंघी, तना, पत्ता आदि का उपयोग होता है। प्रकृति, पशु पक्षी, इंसान की सामूहिकता, परिवार, खेती आदि की कलाकृति बनाई जाती है।

लोग झारखंड से होकर सड़क से गुजरते हैं तो उन्हें यहां के जन जीवन को देखने का मौका मिलता है। सोच है कि यहां की संस्कृति से लोग अवगत हो। इसी सोच के साथ रांची में राष्ट्रीय राजमार्ग के कुछ हिस्से में सोहराय कला को प्रदर्शित की दिशा में पहल की गई है। भविष्य में इसके विस्तार पर भी विचार किया जाएगा।
    -संतोष कुमार आर्य, जीएम, एनएचएआइ, झारखंड

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एनएच के किनारे पौधरोपण पर हाई कोर्ट ने दिए कई दिशा-निर्देश
हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की अदालत में हजारीबाग-बरही सड़क (एनएच-33) के चौड़ीकरण के दौरान पेड़ों की कटाई से जुड़े मामले में गुरुवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद में अदालत ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) और वन विभाग को पौधरोपण एवं पौधों के संरक्षण के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं।

खंडपीठ ने कहा कि सड़क किनारे पौधे लगाते समय दो पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखी जाए, ताकि उनका समुचित विकास हो सके। कोर्ट ने संबंधित दिशा-निर्देशों के साथ मामले में स्वत: संज्ञान लेकर दर्ज जनहित याचिका का निष्पादन कर दिया।

पूर्व की सुनवाई में एनएचएआई ने मौखिक रूप से कोर्ट को बताया था कि पौधों की निगरानी के लिए एक मानिटरिंग एजेंसी नियुक्त कर ली गई है। एजेंसी स्थल निरीक्षण कर लगाए गए पौधों की स्थिति की जांच करेगी। साथ ही उनके संरक्षण और देखभाल की व्यवस्था का भी जायजा लेगी।

न्याय मित्र देंगे पौधरोपण पर सुझाव
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने न्याय मित्र को निर्देश दिया कि वह हजारीबाग-बरही सड़क (एनएच-33) के किनारे पौधरोपण के संबंध में एनएचएआइ और वन विभाग को आवश्यक सुझाव दें। दोनों विभाग इन सुझावों पर विचार करते हुए उचित कदम उठाएं, ताकि पौधों के विकास और संरक्षण को सुनिश्चित किया जा सके।

इससे पहले एनएचएआइ की ओर से कोर्ट में शपथ पत्र दाखिल कर बताया गया कि राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे आवश्यक संख्या में पौधे लगा दिए गए हैं। प्राधिकरण ने यह भी बताया कि सड़क के करीब 15 किलोमीटर लंबे एक हिस्से में कुछ स्थान ऐसे हैं, जहां निर्धारित तरीके से पौधरोपण करना संभव नहीं था। ऐसे स्थानों पर भी उपयुक्त वैकल्पिक पौधे लगाए जाएंगे।