दुर्लभ दस्तावेजों और ऐतिहासिक चित्रों में दिखेगी रामनगरी की विरासत

अयोध्या। भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या की हजारों वर्षों पुरानी आस्था, संघर्ष और पुनरुत्थान की कहानी अब विशेष ऐतिहासिक प्रदर्शनी के जरिए लोगों के सामने होगी। दीपोत्सव-2026 के अवसर पर रामकथा पार्क में ‘अयोध्या: आस्था, संघर्ष और पुनरुत्थान’ शीर्षक से यह प्रदर्शनी लगाई गई है। इसमें अयोध्या की प्राचीन आध्यात्मिक विरासत से लेकर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा तक की यात्रा को ऐतिहासिक दस्तावेजों, दुर्लभ चित्रों, पांडुलिपियों और मानचित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। प्रदर्शनी 8 और 9 नवंबर को आम जनता के लिए खुली रहेगी। प्रदर्शनी की शुरुआत अयोध्या की प्राचीन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से होगी।

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Published On :

नवम्बर 8, 2026

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अयोध्या। भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या की हजारों वर्षों पुरानी आस्था, संघर्ष और पुनरुत्थान की कहानी अब विशेष ऐतिहासिक प्रदर्शनी के जरिए लोगों के सामने होगी। दीपोत्सव-2026 के अवसर पर रामकथा पार्क में ‘अयोध्या: आस्था, संघर्ष और पुनरुत्थान’ शीर्षक से यह प्रदर्शनी लगाई गई है। इसमें अयोध्या की प्राचीन आध्यात्मिक विरासत से लेकर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा तक की यात्रा को ऐतिहासिक दस्तावेजों, दुर्लभ चित्रों, पांडुलिपियों और मानचित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। प्रदर्शनी 8 और 9 नवंबर को आम जनता के लिए खुली रहेगी।

प्रदर्शनी की शुरुआत अयोध्या की प्राचीन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से होगी। इसमें संस्कृत ग्रंथों और पांडुलिपियों, विशेष रूप से 'अयोध्या माहात्म्य' में वर्णित अयोध्या की महिमा, सूर्यवंश की परंपरा और मां सरयू के आध्यात्मिक महत्व को दर्शाया गया है। इसके बाद वर्ष 1528 से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों, श्रीराम जन्मभूमि से संबंधित सिख परंपरा और वर्ष 1855 तथा 1858 की घटनाओं को अभिलेखीय दस्तावेजों और ऐतिहासिक संदर्भों के साथ प्रस्तुत किया गया है। महंत रघुबर दास की ओर से वर्ष 1885 में दायर मुकदमे और वर्ष 1949 की महत्वपूर्ण घटनाओं को भी इसमें जगह दी गई है।

प्रदर्शनी में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के विभिन्न चरणों को भी क्रमबद्ध तरीके से दिखाया गया है। इसमें गोरक्षपीठ की तीन पीढ़ियों महंत दिग्विजयनाथ, महंत अवैद्यनाथ और महंत योगी आदित्यनाथ के योगदान के साथ धर्म संसद, राम-जानकी रथयात्रा, रामशिला पूजन, वर्ष 1990 की कारसेवा और वर्ष 1992 के घटनाक्रम को शामिल किया गया है। इसके साथ ही वर्ष 1993 में भूमि अधिग्रहण, पुरातात्विक सर्वेक्षण और उत्खनन से जुड़े प्रसंगों को भी प्रदर्शित किया गया है।

श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े लंबे न्यायिक सफर को भी प्रदर्शनी में विशेष स्थान दिया गया है। इसमें वर्ष 2010 के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले से लेकर 9 नवंबर 2019 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सुनाए गए ऐतिहासिक निर्णय तक की पूरी यात्रा को क्रमबद्ध ढंग से दर्शाया गया है। अभिलेखीय दस्तावेजों और ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से दर्शक इस मामले से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं और न्यायिक प्रक्रिया के विभिन्न पड़ावों को जान सकेंगे।

प्रदर्शनी के अंतिम हिस्से में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण पड़ावों को दिखाया गया है। इसमें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास का गठन, 5 अगस्त 2020 को मंदिर निर्माण के लिए हुआ भूमिपूजन, मंदिर की स्थापत्य कला और शिल्पकला तथा 22 जनवरी 2024 को हुई रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा को शामिल किया गया है। इसके साथ ही 25 नवंबर 2025 को धर्मध्वजा आरोहण, 19 मार्च 2026 को श्रीराम यंत्र की स्थापना और अयोध्या के दीपोत्सव की गौरवशाली यात्रा को भी प्रदर्शित किया जाएगा।

दुर्लभ अभिलेखीय संदर्भों, ऐतिहासिक चित्रों, पांडुलिपियों, दस्तावेजों और मानचित्रों के जरिए तैयार यह प्रदर्शनी अयोध्या के इतिहास को केवल पढ़ने का नहीं, बल्कि उसे दृश्य रूप में समझने का अवसर देगी। प्राचीन धार्मिक परंपराओं से लेकर आधुनिक समय में मंदिर निर्माण तक की घटनाओं को एक ही स्थान पर क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत किया गया है। इसका मूल भाव ‘आस्था की अनंत धारा, इतिहास की अमर गाथा’ रखा गया है, जो अयोध्या की सांस्कृतिक निरंतरता और ऐतिहासिक यात्रा को रेखांकित करता है।

यह प्रदर्शनी केवल ऐतिहासिक घटनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि अयोध्या की आस्था, सांस्कृतिक विरासत, जनभागीदारी और पुनरुत्थान की यात्रा को समझने का अवसर भी है। 8 और 9 नवंबर को रामकथा पार्क में आयोजित इस प्रदर्शनी का अवलोकन आम नागरिकों के साथ शोधार्थी, विद्यार्थी, इतिहास और संस्कृति में रुचि रखने वाले लोग तथा देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु कर सकेंगे। प्रदर्शनी में प्रवेश जनसामान्य के लिए खुला रहेगा।

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