अफगान बादशाह जहीर शाह की निशानी पर चलेगा हथौड़ा, दारुल उलूम ने लिया बड़ा फैसला

देवबंद यूपी के देवबंद में दारुल उलूम से 86 वर्ष पुरानी अफगानिस्तान के बादशाह की निशानी हटेगी। अफगानिस्तान के बादशाह ने 1940 में अपने नाम पर दारुल उलूम में बाब-ए-जाहिर गेट बनवाया था। अफगानिस्तान के पूर्व शासक के नाम से बना बाब-ए-जाहिर (जाहिर द्वार) को संस्था ने उसकी जर्जर हालत के चलते मिस्मार (गिराने) करने का निर्णय लिया है। इससे पहले वर्ष 2006 में भी इस गेट को हटाने का प्रस्ताव हुआ था लेकिन अफगानिस्तान के पूर्व शासक ने उनके द्वारा बनवाए गए गेट को हटवाने से इंकार कर संस्था को इससे अवगत करा दिया था। दारुल उलूम के चार

Wrriten By :

Editor

Published On :

अगस्त 21, 2026

देवबंद
यूपी के देवबंद में दारुल उलूम से 86 वर्ष पुरानी अफगानिस्तान के बादशाह की निशानी हटेगी। अफगानिस्तान के बादशाह ने 1940 में अपने नाम पर दारुल उलूम में बाब-ए-जाहिर गेट बनवाया था। अफगानिस्तान के पूर्व शासक के नाम से बना बाब-ए-जाहिर (जाहिर द्वार) को संस्था ने उसकी जर्जर हालत के चलते मिस्मार (गिराने) करने का निर्णय लिया है। इससे पहले वर्ष 2006 में भी इस गेट को हटाने का प्रस्ताव हुआ था लेकिन अफगानिस्तान के पूर्व शासक ने उनके द्वारा बनवाए गए गेट को हटवाने से इंकार कर संस्था को इससे अवगत करा दिया था।

दारुल उलूम के चार प्रमुख द्वार में से एक प्रमुख बाब-ए-जहीर शाह को हटाने का निर्णय ले लिया गया है। जिसके लिए संस्था के नायब मोहतमिम मौलाना खालिक मद्रासी ने बाकायदा नोटिस भी जारी किया है। 1359 हिजरी (1940) में अफगानिस्तान के बादशाह रहे जहीर शाह ने अपने स्वंय के खर्चे से दारुल उलूम के छात्रावास परिसर में गेट बनवाया था। गेट में दोनों तरफ बच्चों के हिफ्ज (कुरआन के कंठस्थ याद करने) की कक्षाओं का निर्माण कराया गया था। इसीलिए इस गेट का नाम बाब-ए-जाहिर पड़ा।

वर्ष 1958 में अपने भारत दौरे के दौरान बादशाह जहीर शाह दारुल उलूम देवबंद भी आए थे। संस्था के सबसे लंबे समय 50 वर्षों तक मोहतमिम रहे कारी मुहम्मद तैय्यब ने उनका स्वागत किया था। अब 86 वर्ष पुराने बाब-ए-जाहिर गेट को संस्था ने हटाने का निर्णय लिया है। हालांकि वर्ष 2006 में भी संस्था द्वारा परिसर में नए भवनों के निर्माण के दौरान इस गेट को हटाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन उस समय जहीर शाह ने उसे हटाए जाने के निर्णय का विरोध जताते हुए संस्था को अवगत कराया था।

इस दौरान संस्था द्वारा गेट के दोनों ओर नए छात्रावास भवन के निर्माण के चलते गेट की मरम्मत अथवा जीर्णोद्धपार की कार्रवाई भी नहीं की गई। अब जर्जर होने की बात कहकर जहीर शाह के इंतकाल के 19 वर्षों बाद इसे हटाने का पूर्ण निर्णय ले लिया गया है। दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना खालिक मद्रासी ने गेट को हटाए जाने की पुष्टि करते हुए कहा कि गेट की इमारत जर्जर हालत में पहुंच गई जिसे सुरक्षा की दृष्टि से हटाया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगले दो दिनों में गेट को हटा दिया जाएगा ताकि भविष्य में किसी हादसे से बचा जा सके।