US हमलों के बाद होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ा तनाव, तेल-गैस सप्लाई प्रभावित होने की आशंका, ट्रैफिक स्लो

 नई दिल्ली अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर भी साफ दिखाई देने लगा है. अमेरिकी सेना द्वारा लगातार दूसरे दिन ईरान के कई ठिकानों पर हमलों के बाद होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है. भारत समेत लगभग आधी दुनिया को तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई इसी समुद्री रास्ते से गुजरती है, इसलिए इस इलाके में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।  होर्मुज से गुजरने वाला समुद्री ट्रैफिक अब लगभग रुक गया है. फिलहाल ज्यादातर जहाज सिर्फ उस उत्तरी

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Published On :

जुलाई 10, 2026

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 नई दिल्ली

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर भी साफ दिखाई देने लगा है. अमेरिकी सेना द्वारा लगातार दूसरे दिन ईरान के कई ठिकानों पर हमलों के बाद होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है. भारत समेत लगभग आधी दुनिया को तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई इसी समुद्री रास्ते से गुजरती है, इसलिए इस इलाके में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। 

होर्मुज से गुजरने वाला समुद्री ट्रैफिक अब लगभग रुक गया है. फिलहाल ज्यादातर जहाज सिर्फ उस उत्तरी समुद्री मार्ग का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसे ईरान ने मंजूरी दी है. वहीं ओमान और अमेरिका के समर्थन वाले दक्षिणी कॉरिडोर में जहाजों की आवाजाही बेहद कम हो गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के घंटों में सिर्फ एक अमेरिकी मंजूरी वाले सुपरटैंकर और एक ईरानी कंटेनर जहाज को स्ट्रेट पार करते देखा गया। 

डेटा फर्म Kpler के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका-ईरान के अंतरिम समझौते के बाद पिछले तीन सप्ताह में प्रतिदिन औसतन 34 कमोडिटी जहाज होर्मुज से गुजर रहे थे. 24 जून को यह संख्या 59 तक पहुंच गई थी. लेकिन ताजा सैन्य टकराव के बाद यह आंकड़ा तेजी से गिर गया है. युद्ध के दौरान अधिकांश दिनों में 20 से भी कम जहाज इस रास्ते से गुजर पाए। 

होर्मुज पर कंट्रोल के लिए कोई भी नुकसान उठाने को तैयार ईरान!
अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, सैन्य और रक्षा मामलों के विशेषज्ञ एलेक्स अलफिराज शीर्स का कहना है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण बनाए रखने के लिए अमेरिका के साथ बड़े संघर्ष का जोखिम उठाने को भी तैयार है. उनके मुताबिक, ईरान इस जलमार्ग को अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत मानता है और भविष्य की किसी भी बातचीत में इसे दबाव बनाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है। 

वहीं अमेरिका और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों पर भी दबाव है कि वे यह सुनिश्चित करें कि होर्मुज पूरी तरह ईरान के नियंत्रण वाला समुद्री क्षेत्र न बन जाए. विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अंतरिम समझौता पूरी तरह खत्म तो नहीं हुआ है, लेकिन मौजूदा हालात में वह बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच चुका है। 

अमेरिका ने ईरान में किए कई बड़े स्ट्राइक, रेलवे पुल भी ध्वस्त
इस बीच ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम समझौते और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन का आरोप लगाया है. ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका ने दो रेलवे पुलों समेत कई ठिकानों पर हमला किया और इसे होर्मुज में जहाजों पर हमलों के जवाब के रूप में पेश करना "झूठा बहाना" है. ईरान का दावा है कि अमेरिकी हमलों में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई है और कई अन्य घायल हुए हैं। 

अमेरिका के हमले के बाद कतर, कुवैत और बहरीन पर हमला
उधर ईरान ने कतर, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले का भी दावा किया है. वहीं होर्मुज के आसपास स्थित बुशेहर, चाबहार, बंदर अब्बास, सीरिक, जास्क और अबू मूसा द्वीप समेत कई इलाकों में धमाकों की खबरें सामने आई हैं. अगर दोनों देशों के बीच तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो दुनिया की सबसे अहम तेल सप्लाई रूट पर लंबा असर पड़ सकता है. इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों, गैस सप्लाई, शिपिंग लागत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है। 

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