Iran-Israel War: ईरान और इजरायल के बीच छिड़ा संघर्ष अब अपने सबसे भयावह दौर में पहुंच गया है। पिछले नौ दिनों से जारी इस भीषण युद्ध में ईरान को अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य शक्ति का सामना करना पड़ रहा है। वाशिंगटन और यरूशलम के निरंतर हवाई हमलों ने ईरान की कमर तोड़ दी है, हालांकि तेहरान अब भी अपनी मिसाइल शक्ति के दम पर जवाबी कार्रवाई की कोशिश कर रहा है। लेकिन इस सैन्य टकराव के बीच प्रकृति और पर्यावरण ने जो रूप अख्तियार किया है, उसने पूरी दुनिया को हतप्रभ कर दिया है। तेहरान के आसमान से बरसती ‘काली बारिश’ ने युद्ध की विभीषिका को एक नया और डरावना आयाम दे दिया है।
तेल रिफाइनरियों पर भीषण बमबारी: धुएं के गुबार में छिपा तेहरान
शनिवार की रात तेहरान के लिए किसी कयामत से कम नहीं थी। जब शहर के निवासी गहरी नींद में थे, तभी इजरायल और अमेरिका के लड़ाकू विमानों ने राजधानी के रणनीतिक ठिकानों पर सटीक हमले किए। इस हमले का मुख्य निशाना ‘शाहरान फ्यूल डिपो’ और ‘अल्बोर्ज’ की विशाल तेल रिफाइनरियां थीं। धमाके इतने जोरदार थे कि उनकी गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई। इन रिफाइनरियों में लगी भीषण आग के कारण लाखों टन कच्चा तेल और रासायनिक ईंधन जलकर खाक हो गया, जिससे निकलने वाला घना काला धुआं तेहरान के आसमान पर एक अभेद्य चादर की तरह छा गया।
आसमान से बरसा ‘काला जहर’: रसायनों और तेल की जानलेवा बारिश
रविवार की सुबह जब तेहरान में बादल बरसे, तो नजारा देखकर लोग सिहर उठे। आसमान से गिरने वाली बूंदें पारदर्शी नहीं बल्कि गहरे काले रंग की थीं। वैज्ञानिकों का मानना है कि रिफाइनरियों पर हुए हमलों से निकले हाइड्रोकार्बन और कालिख वातावरण में मौजूद नमी के साथ मिल गए, जिससे यह जहरीली बारिश हुई। इस पानी से कच्ची महक और तेल जैसी गंध आ रही है। सड़कों, घरों और गाड़ियों पर जमा होती यह काली परत युद्ध के पर्यावरणीय दुष्प्रभावों का जीता-जागता प्रमाण है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही वैश्विक स्तर पर चिंताएं बढ़ गई हैं।
स्वास्थ्य चेतावनी और इमरजेंसी अलर्ट: जहरीली बारिश से बचने की सलाह
ईरानी रेड क्रिसेंट ने इस स्थिति को देखते हुए तत्काल ‘हेल्थ इमरजेंसी’ घोषित कर दी है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस बारिश के पानी में सल्फर, नाइट्रोजन ऑक्साइड और अन्य घातक रसायनों का मिश्रण है। यह पानी त्वचा के संपर्क में आने पर गंभीर जलन और एलर्जी पैदा कर सकता है। साथ ही, वातावरण में मौजूद इन सूक्ष्म कणों के सांस के जरिए फेफड़ों में जाने से श्वसन संबंधी गंभीर बीमारियां होने का खतरा है। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों को सख्त हिदायत दी है कि वे घरों से बाहर न निकलें और खिड़की-दरवाजे बंद रखें।
ईरान का पलटवार: कुवैत एयरपोर्ट और बहरीन के जल संयंत्र पर हमला
अपनी धरती पर हो रहे हमलों से तिलमिलाए ईरान ने अब जवाबी कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने खाड़ी क्षेत्र के उन देशों को निशाना बनाना शुरू किया है जो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट के फ्यूल टैंकों पर आत्मघाती ड्रोन हमले किए हैं, जिससे वहां की हवाई सेवाओं में व्यवधान पैदा हो गया है। इसके अलावा, बहरीन के एक प्रमुख वाटर प्लांट (जल शोधन संयंत्र) को भी निशाना बनाया गया है। ईरान ने स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि उसकी तेल रिफाइनरियां सुरक्षित नहीं हैं, तो वह पूरे क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को अस्थिर कर देगा।










