खाते में 25 लाख होने पर भी शिक्षक को इलाज के लिए नहीं मिला पैसा

जमशेदपुर. सोनारी निवासी झारखंड सरकार की सेवानिवृत्त शिक्षिका अंजलि बोस की मौत ने बैंकिंग सिस्टम और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खाते में करीब 25 लाख रुपए जमा होने के बावजूद समय पर इलाज के लिए राशि नहीं मिल सकी और अंजलि बोस की जान चली गई। विडंबना यह रही कि जिस मदद के लिए स्वजन कई दिनों तक भटकते रहे, वही सहायता उनकी मौत के दो घंटे बाद अस्पताल पहुंची। शुक्रवार के तड़के अंजलि बोस का एमजीएम अस्पताल में निधन हो गया। डाक्टरों ने पहले ही बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पताल में रेफर करने

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Published On :

जनवरी 10, 2026

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जमशेदपुर.

सोनारी निवासी झारखंड सरकार की सेवानिवृत्त शिक्षिका अंजलि बोस की मौत ने बैंकिंग सिस्टम और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खाते में करीब 25 लाख रुपए जमा होने के बावजूद समय पर इलाज के लिए राशि नहीं मिल सकी और अंजलि बोस की जान चली गई।

विडंबना यह रही कि जिस मदद के लिए स्वजन कई दिनों तक भटकते रहे, वही सहायता उनकी मौत के दो घंटे बाद अस्पताल पहुंची। शुक्रवार के तड़के अंजलि बोस का एमजीएम अस्पताल में निधन हो गया। डाक्टरों ने पहले ही बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पताल में रेफर करने की सलाह दी थी, लेकिन इलाज में सबसे बड़ी बाधा पैसा नहीं बल्कि बैंक की प्रक्रिया बन गई।

नॉमिनी नहीं होने से हुई मुश्किल

सेवानिवृत्ति के समय मिली पूरी राशि अंजलि बोस ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सोनारी शाखा में जमा कर रखी थी। अविवाहित होने के कारण उन्होंने खाते में किसी को नामिनी नहीं बनाया था। स्वजनों का कहना है कि अंजलि बोस की तबीयत लगातार बिगड़ने की जानकारी बैंक अधिकारियों को दी जाती रही। अस्पताल से लेकर बैंक शाखा तक चक्कर लगाए गए, लेकिन हर बार कानूनी अड़चन का हवाला देकर मदद से इनकार कर दिया गया। छोटी बहन गायत्री बोस अपनी बड़ी बहन के इलाज के लिए दर-दर भटकती रहीं, मगर सिस्टम पसीजने को तैयार नहीं हुआ। मामले की गंभीरता को देखते हुए भाजपा के पूर्व नेता विकास सिंह को इसकी जानकारी दी गई। उन्होंने तुरंत अस्पताल पहुंचकर स्थिति देखी और सीधे उपायुक्त को मामले से अवगत कराया। उपायुक्त के हस्तक्षेप के बाद देर रात बैंक अधिकारियों से संपर्क साधा गया और सहायता की पहल शुरू हुई।

देरी से पहुंचा पैसा

इसके बाद शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे बैंक के जिम्मेदार अधिकारी पैसा लेकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सुबह 8 बजे ही अंजलि बोस ने दम तोड़ दिया था। अस्पताल पहुंचने पर बैंक अधिकारियों को स्वजनों के गुस्से का सामना करना पड़ा। बाद में अधिकारियों ने स्वजनों से माफी मांगते हुए भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने की बात कही। विकास सिंह ने साफ कहा कि यदि बैंक अधिकारियों ने यही काम समय रहते कर दिया होता, तो अंजलि बोस की जान बचाई जा सकती थी। यह मामला केवल एक व्यक्ति की मौत का नहीं, बल्कि उस सिस्टम की संवेदनहीनता का प्रतीक बन गया है, जहां खाते में लाखों रुपये होते हुए भी इलाज के अभाव में एक शिक्षिका को अपनी जान गंवानी पड़ी। यह घटना एक कड़ा सवाल छोड़ जाती है,क्या सरकारी नियम और बैंक की प्रक्रियाएं इंसान की जान से भी ऊपर हो गई हैं?

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