Tamil Nadu Assembly: तमिलनाडु विधानसभा में उस समय भारी राजनीतिक टकराव देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री जोसेफ विजय (थलापति विजय) के एक कथित शारीरिक इशारे को लेकर विपक्षी दल द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) ने कड़ा ऐतराज जताया। डीएमके ने सदन के भीतर पूर्व मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन की ‘बॉडी शेमिंग’ किए जाने का गंभीर आरोप लगाया। सदन से लेकर सड़क और सोशल मीडिया तक बढ़ते विवाद के बाद मुख्यमंत्री विजय को सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा।
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विजय की सफाई

‘हाव-भाव अनजाने में हुआ, किसी को आहत करने का इरादा नहीं’ सदन में हुए हंगामे और विपक्ष के तीखे हमलों के बाद मुख्यमंत्री विजय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की।
उन्होंने लिखा, “मैं पूरी तरह स्पष्ट करना चाहता हूं कि 7 सितंबर को विधानसभा में अपने वक्तव्य के दौरान मेरे जो हाव-भाव और शारीरिक भाषा (बॉडी लैंग्वेज) सामने आई, वह पूरी तरह अनजाने में हुई थी। यह किसी भी रूप में जानबूझकर नहीं किया गया था। मेरा सभी से अनुरोध है कि इसे किसी की भावनाओं को व्यक्तिगत स्तर पर ठेस पहुंचाने अथवा किसी का उपहास उड़ाने के इरादे से की गई कार्रवाई के रूप में न देखा जाए।”
विधानसभा में तीखी नोकझोंक

तमिलनाडु विधानसभा में सत्ताधारी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) और मुख्य विपक्षी दल DMK के बीच टकराव की स्थिति उस समय बनी, जब 1975 के आपातकाल के दौर में एम. के. स्टालिन की ‘मीसा’ (MISA – मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट, 1971) के तहत हुई ऐतिहासिक गिरफ्तारी का मुद्दा उठा।
सदन में बहस के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने स्टालिन के बार-बार मीसा का संदर्भ देने पर कटाक्ष किया। बोलते समय उन्होंने अपने दाहिने हाथ की हथेली को अपने जबड़े पर रखा। विपक्ष का आरोप है कि यह इशारा सीधे तौर पर स्टालिन के उस टूटे हुए जबड़े की ओर था, जिसे आपातकाल के दौरान पुलिसिया प्रताड़ना का परिणाम बताया जाता रहा है।
मीसा गिरफ्तारी पर उठाए गए सवाल
मुख्यमंत्री विजय ने अपने भाषण के दौरान विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा था कि उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हर विषय पर मीसा का हवाला देने लगते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि हर सामान्य मुद्दे पर मीसा की दुहाई दी जाएगी, तो विधायी कामकाज कैसे चलेगा? उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मीसा के वास्तविक इतिहास और पृष्ठभूमि से सभी भली-भांति वाकिफ हैं। हालांकि, भाषण के दौरान जबड़े पर हाथ रखने के उनके अंदाज को विपक्ष ने मर्यादा के खिलाफ करार दिया।
विपक्ष का जोरदार विरोध

विजय के इस इशारे को DMK ने सर्वसम्मति से ‘बॉडी-शेमिंग’ और व्यक्तिगत हमला बताते हुए सदन में जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। डीएमके विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) जेसीडी प्रभाकर के कक्ष के बाहर कड़ा विरोध प्रदर्शन किया और धरने पर बैठ गए।
विपक्षी सदस्यों ने मांग उठाई कि मुख्यमंत्री द्वारा सदन में किए गए विवादित इशारे और संबंधित टिप्पणियों को विधानसभा की आधिकारिक कार्यवाही के रिकॉर्ड से तत्काल हटाया जाए। सदन की गरिमा और वरिष्ठ नेता के सम्मान के उल्लंघन पर निष्पक्ष व्यवस्था दी जाए। हंगामे और विरोध की तीव्रता को देखते हुए मार्शलों को हस्तक्षेप करना पड़ा और प्रदर्शनकारी सदस्यों को जबरन बाहर निकाला गया। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य के राजनीतिक पारे को अत्यधिक गर्मा दिया है।










