Taj Mahal Security: आगरा के विश्व प्रसिद्ध ताजमहल की सुरक्षा व्यवस्था पर रविवार को बड़ा सवाल खड़ा हो गया। ताजमहल के पश्चिमी गेट के पास हजारों बैग लावारिस हालत में पेड़ों और लोहे की सुरक्षा जालियों पर टंगे नजर आए। हैरानी की बात यह रही कि इतनी बड़ी संख्या में बैग लटके होने के बावजूद सुरक्षा में तैनात जवानों ने उनकी जांच तक नहीं की। मामला ताजमहल के संवेदनशील यलो जोन का है, जहां सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत होती है।
दरअसल, ताजमहल के अंदर बैग और दूसरे सामान ले जाने की अनुमति नहीं है। इसी वजह से पर्यटक अपना सामान बाहर बने लॉकर में रखते हैं। लेकिन रविवार को पर्यटकों की भारी भीड़ और लॉकर की व्यवस्था कम पड़ने के कारण लोगों ने अपने बैग बाहर ही पेड़ों और जालियों पर टांग दिए और ताजमहल देखने चले गए।
PET परीक्षा के बाद ताजमहल में उमड़ी भीड़
बताते चले कि, रविवार को शहर में PET परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा में शामिल होने के लिए करीब 45 हजार अभ्यर्थी आगरा पहुंचे थे। उनके साथ बड़ी संख्या में अभिभावक भी मौजूद थे। परीक्षा की पाली खत्म होने के बाद कई अभ्यर्थी और उनके परिजन ताजमहल घूमने पहुंच गए। वीकेंड होने के कारण पहले से ही यहां पर्यटकों की अच्छी-खासी भीड़ थी।

पश्चिमी गेट पर पर्यटकों का हुजूम उमड़ पड़ा। ताजमहल के अंदर बैग ले जाने पर रोक होने के कारण लोगों ने बाहर लगे लोहे के सुरक्षा ग्रिल और आसपास के पेड़ों को ही सामान रखने की जगह बना लिया। देखते ही देखते बड़ी संख्या में बैग वहां लटक गए। इसके बावजूद सुरक्षा में तैनात जवानों की नजर इन पर नहीं पड़ी या उन्होंने इन्हें गंभीरता से नहीं लिया।
ताजमहल के यलो जोन में सुरक्षा चूक
ताजमहल का यलो जोन सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। ऐसे इलाके में बड़ी संख्या में बिना जांच के बैग पड़े रहना सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामी को दिखाता है। किसी भी लावारिस सामान की जांच करना सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है। इसके बावजूद हजारों बैग खुले में लटके रहे।

इस लापरवाही से किसी बड़ी सुरक्षा घटना का खतरा भी पैदा हो सकता था। खासकर ताजमहल जैसी अंतरराष्ट्रीय पहचान वाली ऐतिहासिक इमारत की सुरक्षा में इस तरह की चूक को सामान्य नहीं माना जा सकता। सवाल यह भी है कि जब प्रवेश द्वारों से पहले दो स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था होने का दावा किया जाता है, तो इतनी बड़ी संख्या में बैग बिना जांच के कैसे रह गए?
कैसे हुई इतनी बड़ी चूक?
ताजमहल की सुरक्षा के लिए पुलिस, सीआईएसएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियां तैनात रहती हैं। परिसर और आसपास के इलाकों में निगरानी के लिए हाईटेक कैमरों का भी इस्तेमाल किया जाता है। सुरक्षा पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके बावजूद परीक्षा के बाद उमड़ी भीड़ के सामने पूरी व्यवस्था कमजोर नजर आई।
यह पहला मौका नहीं है, जब किसी बड़ी परीक्षा के बाद ताजमहल के बाहर इस तरह बैग टंगे दिखाई दिए हों। इससे पहले भी बड़े एग्जाम के बाद लॉकर फुल होने पर पर्यटक अपना सामान बाहर छोड़कर चले जाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब हर बार इसी तरह की स्थिति बनती है, तो प्रशासन की तरफ से पहले से कोई ठोस इंतजाम क्यों नहीं किए जाते? भीड़ बढ़ने की आशंका के बावजूद अतिरिक्त जांच और निगरानी की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
रविवार को 35,800 पर्यटकों ने किया ताजमहल का दीदार

रविवार को वीकेंड के चलते ताजमहल में पर्यटकों की भारी भीड़ रही। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के रिकॉर्ड के मुताबिक, पूरे दिन में कुल 35,800 पर्यटक ताजमहल देखने पहुंचे। इनमें 32,941 भारतीय पर्यटक, 2,484 विदेशी पर्यटक और 294 सार्क देशों के पर्यटक शामिल थे। भीड़ को देखते हुए सीआईएसएफ और एसएसआई के अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती भी की गई थी। इसका मकसद पर्यटकों को किसी तरह की परेशानी से बचाना था। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में पर्यटकों की आवाजाही के बीच बाहर लावारिस बैगों का जमा होना सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल खड़े कर गया।
DCP ने दिए जांच के आदेश
मामले को लेकर डीसीपी सिटी मनोज कुमार ने बताया कि ताजमहल के पश्चिमी गेट के पास यलो जोन में पार्क की जाली पर अभ्यर्थियों द्वारा बैग टांगकर ताजमहल देखने जाने का मामला सामने आया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच कराई जा रही है।
उन्होंने साफ कहा कि ताजमहल की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब देखना होगा कि जांच में सुरक्षा व्यवस्था की इस चूक के लिए कौन जिम्मेदार पाया जाता है और भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है। क्योंकि सवाल सिर्फ लावारिस बैगों का नहीं, बल्कि देश की सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल ताजमहल की सुरक्षा का है।











