पसीना ही बताएगा रोग! IIIT DM छात्र की नई खोज ने मेडिकल दुनिया में लगाई क्रांति

जबलपुर  आजकल यूथ एक से बढ़कर एक एक्सपेरीमेंट कर रही है, जो सफल भी हो रही है. खास बात यह है कि उनका यह इनोवेशन आम लोगों के लिए भी होता है. जो उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में काम कर सकता है. कुछ इसी तरह का कमाल जबलपुर ट्रिपल आईटी डीएम (IIITDM) कॉलेज के एक छात्र ने कर दिखाया है. छात्र ने आम एलाइनमेंट स्वेट बैंड बनाया है. यह डिवाइस पसीने में होने वाले परिवर्तन से शरीर में होने वाली बीमारी की जानकारी दे देगा. छात्र की इस खोज को पेटेंट भी मिल गया है. पसीने से बीमारी पता लगाने

Wrriten By :

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Published On :

फ़रवरी 4, 2026

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जबलपुर
 आजकल यूथ एक से बढ़कर एक एक्सपेरीमेंट कर रही है, जो सफल भी हो रही है. खास बात यह है कि उनका यह इनोवेशन आम लोगों के लिए भी होता है. जो उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में काम कर सकता है. कुछ इसी तरह का कमाल जबलपुर ट्रिपल आईटी डीएम (IIITDM) कॉलेज के एक छात्र ने कर दिखाया है. छात्र ने आम एलाइनमेंट स्वेट बैंड बनाया है. यह डिवाइस पसीने में होने वाले परिवर्तन से शरीर में होने वाली बीमारी की जानकारी दे देगा. छात्र की इस खोज को पेटेंट भी मिल गया है.

पसीने से बीमारी पता लगाने वाली डिवाइस का आया ख्याल

जबलपुर में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ इनफर्मेशन टेक्नोलॉजी डिजाइन इन मैन्युफैक्चरिंग (IIITDM) जबलपुर केंद्र सरकार के इस कॉलेज में इंजीनियरिंग के 2700 से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं. इसी संस्थान के एक छात्र मयूर पाटील ने एक आइडिया तैयार किया. जिसमें मयूर ने देखा कि अभी तक मानव शरीर में बीमारियों की जांच के लिए खून का इस्तेमाल किया जाता है. मयूर ने मेडिकल की कुछ पुस्तक पढ़ी थी.

जिसमें उसने पाया था कि बीमारी के दौरान जिस तरह खून में परिवर्तन होता है. उसी तरह का परिवर्तन पसीने में भी आता है और पसीने के माध्यम से भी बीमारियों का पता लगाया जा सकता है. इसके बाद मयूर पाटील ने जानकारी ली कि क्या अभी कोई ऐसी डिवाइस है, जिसे पसीने के जरिए शरीर में होने वाले परिवर्तन का पता लगाया जा सके.

मयूर का आइडिया आया पसंद

मयूर पाटील ने यह बात कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अविनाश रविराजन से चर्चा की. मयूर पाटील ने एक सिनॉप्सिस जमा की. जिसमें उन्होंने एक स्वेट बैंड के बारे में जानकारी दी. वह एक इस तरह का स्वेट बैंड बनाना चाहते हैं. जिसे शरीर पर लगाने के बाद वह पसीने के आधार पर एक डेटाबेस तैयार करेगा. उसके बाद यदि पसीने में कोई परिवर्तन होता है, तो उसकी जानकारी मिलेगी और शरीर में होने वाले हार्मोनल चेंज भी इसके जरिए देखे जा सकेंगे.

मयूर पाटील का आइडिया डॉक्टर अविनाश रवि राजन को पसंद आया. उन्होंने एक टीम के जरिए तैयारी शुरू की. मयूर पाटील ने बताया कि "हमने लंबी तैयारी के बाद एक घड़ीनुमा बेल्ट और कई सेंसर लगाए, जिनमें नैनो तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इन्हें शरीर के उसे हिस्से पर लगाया गया. जहां का पसीना हमें टेस्ट करना है. लंबी मेहनत के बाद स्वेट बैंड तैयार हो गया."

R एलाइनमेंट बैंड

डॉ अविनाशा रवि राजन ने बताया कि "हमने इस बैंड का नाम आर एलाइनमेंट बैंड रखा है. इसमें 3 लेयर तैयार की गई है, इसमें लगे कैपेसिटर पसीने से चार्ज होते हैं. फिर उससे मिले डाटा को मैग्नीफाइंग डिवाइस में डालकर पहले से प्रूवन डाटा से मैच किया जाता है. इसमें पसीने की पीएच वैल्यू भी देखी जाती है. हमने इसे आर्म के लिए तैयार किया था, लेकिन इस शरीर के किसी भी दूसरी ग्रंथि के लिए तैयार किया जा सकता है, क्योंकि हर ग्रंथि से अलग किस्म का पसीना निकलता है.

बिना नुकसान पहुंचाए, शरीर की परेशानी बताएगा बैंड

उन्होंने बताया कि यह एक किस्म का प्रेडिक्शन मॉडल है, लेकिन इसमें शरीर को बिना हानि पहुंचाए इस्तेमाल किया जा सकता है. यदि इससे निकलने वाली किसी जानकारी से शरीर के किसी परिवर्तन का पता लगता है, तो उसकी जांच आगे की जा सकती है. सामान्य लोगों के साथ ही यह एथलीट के लिए बहुत काम का है. मयूर पाटील का कहना है कि बैंड बनाने के बाद हमने इसका मेडिकल टेस्ट भी शुरू किया. जबलपुर के कई जाने-माने डॉक्टर के साथ इसका टेस्ट किया गया. उन सभी ने हमें जो रिपोर्ट दी, उसने हमारा हौसला बढ़ाया.

बैंड का मिला पेटेंट

डॉ अविनाश रवि राजन ने बताया कि "बैंड तैयार होने के बाद इसे पेटेंट के लिए भेजा गया. बहुत जल्दी ही हमारी इस खोज को पेटेंट भी मिल गया." मयूर पाटील ने बताया कि "इस आर्म एलाइनमेंट बैंड की वजह से उन्हें बहुत इज्जत मिली. देश के कई जाने-माने प्रोफेसर ने उनकी खोज की सराहना की. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज बेंगलुरु से इस खोज को सेकंड प्राइज मिला है. इसके साथ ही डीआरडीओ के डायरेक्टर ने भी इस खोज की सराहना की है.

फिलहाल यह बैंड लगभग ₹30000 की लागत में तैयार हुआ था, लेकिन अब भी इसकी लागत कम करने वाले हैं, हालांकि अभी उनकी पढ़ाई चल रही है, लेकिन उनकी कोशिश इसे एक स्टार्टअप बनाने की है. यह बैंड स्वस्थ आदमी को पहले ही अलर्ट कर देगा कि उसके शरीर में कोई तकलीफ आने वाली है."

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