
UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों अयोध्या में रामलला के दर्शन को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान पर अपनी जनता पार्टी के अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने प्रतिक्रिया दी है। बलरामपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने अखिलेश यादव को अपने पिता और सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव से सीख लेने की सलाह दी।
स्वामी प्रसाद मौर्य का कहना है कि धर्म और आस्था हर व्यक्ति का निजी विषय है। किसी भी व्यक्ति को अपनी आस्था के हिसाब से पूजा-पाठ करने और अपने धर्म को मानने की पूरी आजादी है। लेकिन राजनीति में धर्म का दिखावा करना और इसे जनता के सामने पेश करना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि नेताओं को धर्म के नाम पर राजनीति करने के बजाय जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
मुलायम सिंह यादव का जिक्र कर अखिलेश को दी सीख
स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपनी बात रखते हुए मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक जीवन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने मुलायम सिंह यादव का दौर देखा है। मुलायम सिंह यादव हनुमान जी के परम भक्त थे, लेकिन राजनीति में सक्रिय रहने के बावजूद उन्होंने कभी धर्म के नाम पर दिखावा नहीं किया।

मौर्य ने कहा कि मुलायम सिंह यादव तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और दो बार नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली। इसके बावजूद उनकी राजनीति में जनता के प्रति जवाबदेही सबसे अहम रही। उन्होंने धर्म और आस्था को व्यक्तिगत विषय बताते हुए कहा कि नेताओं को अपने राजनीतिक कामकाज और जनता के प्रति जिम्मेदारियों पर ध्यान देना चाहिए।उनके इस बयान को अखिलेश यादव की अयोध्या यात्रा से जुड़े सवालों और बीजेपी की ओर से लगातार हो रही आलोचना के संदर्भ में देखा जा रहा है।
‘अखिलेश यादव भाजपा के रास्ते पर चलने की कोशिश कर रहे हैं’
स्वामी प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें अपने पिता मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक तौर-तरीकों से सबक लेना चाहिए। उनके मुताबिक, धर्म और आस्था का इस्तेमाल लोगों को दिखाने के लिए नहीं होना चाहिए। व्यक्ति किस भगवान को मानता है और किस तरह पूजा करता है, यह उसका अपना फैसला है।

मौर्य ने कहा कि अगर कोई नेता अपनी धार्मिक आस्था का प्रदर्शन करके राजनीति करता है, तो इसे दिखावा कहा जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव बीजेपी के रास्ते पर चलने की कोशिश कर रहे हैं।उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी राजनेता की असली जवाबदेही जनता के प्रति होती है। राजनीति करने वालों को धर्म का सहारा लेकर समाज को बांटने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उनके मुताबिक, धर्म का इस्तेमाल लोगों के बीच दूरी पैदा करने के लिए किया जाता है, तो यह धर्म की भावना के अनुरूप नहीं है।
अखिलेश यादव ने अयोध्या में रामलला के दर्शन पर क्या कहा था?

दरअसल, अखिलेश यादव से अयोध्या में राम मंदिर जाकर रामलला के दर्शन करने को लेकर सवाल पूछा गया था। इस पर उन्होंने कहा था कि वह पहले इटावा में बन रहे केदारेश्वर मंदिर में पूजा करेंगे। इसके बाद अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करेंगे।अखिलेश यादव पहले भी इस बात को दोहरा चुके हैं। उनके इस बयान को लेकर बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के नेता लगातार सवाल उठाते रहे हैं। विपक्षी नेताओं की धार्मिक आस्था और मंदिरों में दर्शन को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में अक्सर बयानबाजी देखने को मिलती है।
धर्म, आस्था और राजनीति पर फिर तेज हुई बयानबाजी
स्वामी प्रसाद मौर्य के ताजा बयान ने अयोध्या में रामलला के दर्शन को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। एक तरफ अखिलेश यादव ने पहले केदारेश्वर मंदिर में पूजा और फिर अयोध्या जाने की बात कही है, तो दूसरी तरफ मौर्य ने इस पूरे मामले में मुलायम सिंह यादव के उदाहरण के जरिए उन्हें नसीहत दी है।
अब इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो सकती है कि आगामी चुनावों से पहले धर्म, आस्था और जनता के मुद्दों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दल किस तरह अपनी रणनीति बनाते हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह मुद्दा आने वाले दिनों में भी चर्चा में रहने की संभावना है।











