Swami Avimukteshwaranand Controversy: आश्रम में शिष्यों का शोषण? स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और कई VIPs पर सनसनीखेज खुलासे

प्रयागराज की स्पेशल POCSO कोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और अन्य के खिलाफ नाबालिगों के यौन शोषण मामले में FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने आश्रम के बड़े अधिकारियों और VIPs की संलिप्तता के साथ-साथ विदेशी फंडिंग और राजनीतिक संरक्षण के गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की निष्पक्ष जांच करेगी।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

फ़रवरी 26, 2026

Swami Avimukteshwaranand Controversy:  प्रयागराज की एक विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत के आदेश के बाद ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने अब मीडिया के सामने आकर सनसनीखेज दावे किए हैं, जिसमें उन्होंने केवल मुख्य आरोपी ही नहीं, बल्कि आश्रम के प्रभावशाली अधिकारियों और कुछ विशिष्ट व्यक्तियों (VIPs) की संलिप्तता की बात कही है।

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आश्रम के रसूखदार लोगों और VIPs पर गंभीर दावे

बताते चले कि, बुधवार को मीडिया से मुखातिब होते हुए आशुतोष ब्रह्मचारी ने आरोप लगाया कि युवा शिष्यों के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटनाएं किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं थीं। उनके अनुसार, इस पूरे प्रकरण में आश्रम से जुड़े बड़े अधिकारी और कई रसूखदार लोग (VIPs) भी शामिल थे। ब्रह्मचारी ने दावा किया कि इन प्रभावशाली लोगों की छत्रछाया में शिष्यों का शोषण किया गया, जो एक गहरे और संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करता है।

प्रमुख नामजद आरोपी और राजनीतिक संरक्षण के आरोप

अपनी शिकायतों को विस्तार देते हुए ब्रह्मचारी ने विशेष रूप से प्रकाश उपाध्याय, बालमुकुंदानंद और अरविंद जैसे नामों का उल्लेख किया। इसके साथ ही, उन्होंने एक चौंकाने वाला आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के एक डिप्टी चीफ मिनिस्टर परोक्ष रूप से इन संतों का समर्थन कर रहे हैं। ब्रह्मचारी ने न केवल नैतिक आधार पर, बल्कि संत की धार्मिक साख और कथित तौर पर मिलने वाली विदेशी फंडिंग (Foreign Funding) की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।

स्पेशल पॉक्सो कोर्ट का आदेश और झूंसी पुलिस की जांच

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, यह पूरा मामला तब गरमाया जब प्रयागराज के एडीजे (रेप और पॉक्सो स्पेशल कोर्ट) विनोद कुमार चौरसिया ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और अन्य के विरुद्ध प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का सख्त निर्देश दिया। कोर्ट ने धारा 173(4) के तहत दायर प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए झूंसी पुलिस को आदेश दिया है कि पीड़ितों की गोपनीयता और सम्मान को सुरक्षित रखते हुए एक निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित की जाए।

धार्मिक स्थलों पर कथित घटनाओं का विवरण

शिकायतकर्ता ने मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर और विद्यामठ जैसे पवित्र धार्मिक स्थलों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि इन स्थानों पर नाबालिगों के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। ब्रह्मचारी के अनुसार, इन घटनाओं ने सनातन परंपरा की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। दूसरी ओर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यह उन्हें और हिंदू धर्म की छवि को धूमिल करने के लिए रची गई एक सोची-समझी साजिश है।

आगामी कानूनी प्रक्रिया और प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल, मामले में नामजद अन्य पदाधिकारियों या आरोपियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पुलिस अब कोर्ट के निर्देशानुसार साक्ष्य जुटाने और पीड़ितों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू करेगी। चूंकि मामला बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल है, इसलिए पूरे देश की नजरें इस जांच के परिणामों पर टिकी हुई हैं।

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