Avimukteshwaranand Saraswati News: झूंसी पॉक्सो मामले में शंकराचार्य को राहत, बोले- ‘अधर्म की हार और सत्य का उदय हुआ’

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को यौन उत्पीड़न के एक मामले में अग्रिम जमानत दे दी है। प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज इस पॉक्सो मामले में राहत मिलने के बाद शंकराचार्य ने इसे 'सत्य की जीत' बताया। उन्होंने कहा कि वे गौ-सेवा और अपने धार्मिक कार्यों को निरंतर जारी रखेंगे।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

मार्च 26, 2026

Avimukteshwaranand Saraswati News: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के लिए कानूनी मोर्चे पर बड़ी राहत की खबर आई है। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे शंकराचार्य को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बुधवार (25 मार्च) को अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) प्रदान कर दी। इस अदालती फैसले के बाद मठ में उत्सव का माहौल है और स्वामी जी ने इसे सत्य की शाश्वत विजय करार दिया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय और कानूनी राहत

बताते चले कि, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मामले की गंभीरता और तथ्यों पर विचार करने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की जमानत याचिका पर फैसला सुनाया। न्यायालय ने उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान करते हुए राहत दी है। इससे पहले भी अदालत ने उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी थी, जिससे उन्हें पुलिसिया कार्रवाई से तात्कालिक सुरक्षा मिली हुई थी। न्यायमूर्ति ने मामले की मेरिट को देखते हुए यह आदेश पारित किया, जिससे उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच

आपको बता दे कि, प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज यह मामला नाबालिगों के कथित शोषण और पॉक्सो अधिनियम की धाराओं के तहत दर्ज किया गया था। प्रयागराज की विशेष पॉक्सो अदालत के निर्देश पर दर्ज इस प्राथमिकी (FIR) में शिष्यों के साथ दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए गए थे। हालांकि, बचाव पक्ष ने इन आरोपों को साजिश करार दिया था। उच्च न्यायालय ने अब स्पष्ट किया है कि याचिकाकर्ता को पुलिस जांच में पूरी तरह सहयोग करना होगा, ताकि मामले की तह तक पहुंचा जा सके।

शंकराचार्य का बयान

अदालती आदेश के बाद जब मीडिया ने शंकराचार्य से उनके विरोधियों के बारे में सवाल किया, तो उन्होंने इसे व्यक्तिगत हार-जीत से ऊपर बताया। उन्होंने कहा कि यह धर्म और सत्य की जीत है। उनके अनुसार, असत्य चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः उसकी पराजय निश्चित है। उन्होंने विरोधियों पर सीधा हमला करने के बजाय आध्यात्मिक लहजे में कहा कि जो भी विजय की आकांक्षा रखता है, उसे सदैव सत्य के मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।

मठ में बटुकों का उत्साह

अदालती राहत की खबर मिलते ही मठ परिसर जयकारों से गूंज उठा। शंकराचार्य ने बताया कि बटुकों और शिष्यों में भारी उत्साह है, जिन्होंने बाजा बजाकर और धार्मिक नारों के साथ इस फैसले का स्वागत किया। अपनी भविष्य की कार्ययोजना पर बात करते हुए स्वामी जी ने स्पष्ट किया कि वे विचलित हुए बिना अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन करते रहेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि गौ-सेवा और सनातन धर्म का प्रचार उनके जीवन का मुख्य लक्ष्य बना रहेगा।

प्रयागराज पुलिस की जांच

झूंसी थाने में दर्ज इस संवेदनशील मामले में पुलिस की निष्पक्ष जांच जारी है। यद्यपि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने अगले कानूनी कदम या रणनीति पर कोई भी टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया है, लेकिन उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया पर अपना पूर्ण विश्वास जताया है। फिलहाल, उच्च न्यायालय के इस सुरक्षात्मक आदेश ने शंकराचार्य को अपने धार्मिक और सामाजिक कार्यों को निर्बाध रूप से जारी रखने का अवसर प्रदान किया है।