Rajya Sabha Election: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (एनसीपी-एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र के कद्दावर नेता और राज्य सरकार में मंत्री छगन भुजबल को लेकर एक बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। नई दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए सुले ने कहा कि छगन भुजबल का नेतृत्व केवल महाराष्ट्र की सीमाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार मिलना चाहिए। सुप्रिया सुले ने साफ तौर पर कहा कि यदि अनुभवी ओबीसी नेता भुजबल राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका बढ़ाना चाहते हैं, तो इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
भुजबल की राष्ट्रीय क्षमता की सराहना
सुप्रिया सुले ने छगन भुजबल के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि उनके भाषण देने की शैली, संसदीय कौशल और विचार अत्यंत प्रभावशाली रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि लंबे समय से उनका व्यक्तिगत मानना है कि भुजबल जैसे नेता को एक बड़े राष्ट्रीय मंच की आवश्यकता है। सुले के अनुसार, यदि भुजबल को राज्यसभा के लिए नामित किया जाता, तो देश को निश्चित रूप से उनके अनुभवों और नेतृत्व का लाभ मिलता। बारामती सांसद ने इसे एक मजबूत राष्ट्रीय नेतृत्व के उभार के अवसर के रूप में देखा।
राज्यसभा सदस्यता की इच्छा और महाराष्ट्र की राजनीतिक सरगर्मी
सुप्रिया सुले ने खुलकर स्वीकार किया कि छगन भुजबल की इच्छा संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में जाने की है। उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में राज्यसभा की एक सीट उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी, जिसे लेकर काफी समय से अटकलें थीं कि भुजबल इस दौड़ में सबसे आगे हो सकते हैं। हालांकि, एनसीपी ने इस सीट के लिए राजेंद्र जैन को अपना उम्मीदवार बनाया है। भुजबल की भविष्य की भूमिका और राष्ट्रीय राजनीति में उनकी संभावित सक्रियता को लेकर सुले का यह बयान काफी मायने रखता है।
अटकलों के केंद्र में OBC नेता की भविष्य की राजनीतिक रणनीति
आपको बता दे कि, छगन भुजबल महाराष्ट्र के सबसे वरिष्ठ और प्रभावशाली ओबीसी नेताओं में शुमार किए जाते हैं। हाल के दिनों में उनकी पार्टी और राज्य की राजनीति में उनकी स्थिति को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। सुले का यह समर्थन कि ‘भुजबल दिल्ली जाना चाहते हैं तो इसमें गलत क्या है’, इस बात को मजबूती देता है कि गठबंधन के भीतर या बाहर, भुजबल की आकांक्षाएं अब दिल्ली के गलियारों तक पहुंच चुकी हैं। क्या यह बयान आने वाले समय में भुजबल के लिए केंद्र की राजनीति का कोई नया द्वार खोलेगा, यह देखने वाली बात होगी।
सियासी दांव-पेच और गठबंधन की नई कूटनीतिक तस्वीर
सुप्रिया सुले के इस बयान ने विपक्षी गठबंधन में चर्चाओं का एक नया दौर शुरू कर दिया है। जहाँ एक ओर राज्य की राजनीति में महायुति और महाविकास अघाड़ी के बीच घमासान जारी है, वहीं इस तरह के बयान राजनीतिक समीकरणों को नया रूप दे सकते हैं। क्या सुले का यह बयान भुजबल के लिए समर्थन है या फिर कोई सोची-समझी कूटनीतिक चाल, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल, ओबीसी नेता के राष्ट्रीय मंच पर सक्रिय होने की पैरवी ने एक बार फिर महाराष्ट्र की सियासत को केंद्र में ला खड़ा किया है।










