
Supreme Court SIR : उत्तर प्रदेश समेत देश के विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रहे विवाद के बीच 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होनी है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत INDIA ब्लॉक के 13 नेताओं ने इस मामले में याचिका दायर की है। याचिका पर मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ सुनवाई करेगी। विपक्षी नेताओं ने निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की है।
SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची पर विपक्ष के सवाल
याचिका में निर्वाचन आयोग के फैसलों को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। विपक्ष ने कथित अनियमितताओं की जांच और मताधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। इस राजनीतिक विवाद में ‘वोट की चोरी’ का आरोप भी लगाया गया है। विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। हालांकि, मतदाता सूची में गड़बड़ी से जुड़े आरोपों और उनके आधार का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

रजिस्ट्री की आपत्तियों के कारण टली थी सुनवाई
इस याचिका पर सुनवाई की प्रक्रिया पहले प्रभावित हुई थी। सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका में कुल 14 कमियां बताई थीं, जिसके कारण इसे 13 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया जा सका। इन कमियों में पहचान से जुड़े अस्पष्ट दस्तावेज, गायब या पढ़ने में मुश्किल पन्ने, कुछ याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे की कमी और 220 रुपये की कोर्ट फीस का कम होना शामिल था। बाद में इन आपत्तियों को दूर कर याचिका दोबारा दाखिल की गई।
13 याचिकाकर्ताओं ने रखीं ये प्रमुख मांगें
बताया गया है कि दस्तावेजों से जुड़ी कमियां ठीक करने के बाद याचिका में दो और याचिकाकर्ताओं को शामिल किया गया। इसके बाद कुल याचिकाकर्ताओं की संख्या 13 हो गई। विपक्ष ने अदालत से SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने और निर्वाचन आयोग के संबंधित फैसलों की न्यायिक समीक्षा करने की मांग की है।

स्वतंत्र तकनीकी कमेटी से ऑडिट कराने की मांग
याचिका में 24 जून 2025 से शुरू हुई SIR प्रक्रिया से जुड़े ECINET और ERONET सिस्टम के दस्तावेज, बैठकों के कार्यवृत्त, आंतरिक टिप्पणियां और लॉग अदालत में प्रस्तुत करने की मांग की गई है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में तकनीकी विशेषज्ञों की स्वतंत्र समिति बनाने का अनुरोध किया गया है। यह समिति मतदाता सूची से हटाए गए नामों और संबंधित तकनीकी प्रक्रियाओं का निष्पक्ष ऑडिट कर सकेगी।
हटाए गए नामों की बूथवार सूची सार्वजनिक करने की मांग
विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों की बूथवार सूची और नाम हटाने के कारण सार्वजनिक किए जाएं। उनका कहना है कि किसी नागरिक का नाम हटाने से पहले उसे नोटिस और अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए। याचिका में बिना उचित प्रक्रिया के नाम हटाने पर रोक लगाने की मांग भी शामिल है।

मताधिकार की सुरक्षा पर अदालत से हस्तक्षेप की अपील
याचिका में कथित संवैधानिक उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई, ऑनलाइन फॉर्म-6 से जुड़े पुराने नियम बहाल करने और नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए आवश्यक निर्देश देने की मांग की गई है। अब सुनवाई के दौरान अदालत का रुख और आगे की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी। याचिकाकर्ताओं की मांगों पर अंतिम निर्णय न्यायालय ही करेगा।
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