Supreme Court New Judges : सुप्रीम कोर्ट में पांच नए जजों की नियुक्ति, जानें कौन हैं शीर्ष अदालत के नए न्यायाधीश

Supreme Court 5 New Judges Appointment News: सीजेआई सूर्यकांत के नेतृत्व वाले कॉलेजियम की सिफारिश पर मुहर लगाते हुए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में 5 नए जजों की नियुक्ति को हरी झंडी दे दी है! स्वीकृत संख्या 38 होने के बाद कोर्ट की वर्किंग स्ट्रेंथ अब 37 हो गई है। जानिए कौन हैं वो 4 हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और सीधे बार से प्रमोट होने वाली इकलौती महिला वकील।

Supreme Court New Judges

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 1, 2026

Supreme Court New Judges : देश की शीर्ष अदालत में न्याय प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पांच नए जजों की नियुक्ति को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण फैसले के तहत चार अलग-अलग राज्यों के हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों और सुप्रीम कोर्ट की एक वरिष्ठ महिला अधिवक्ता को शीर्ष अदालत का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने सोमवार, 1 जून 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस ऐतिहासिक निर्णय की आधिकारिक घोषणा की। इस कदम से न्यायपालिका में लंबित मामलों के बोझ को कम करने और अदालती कार्यवाही को गति देने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

स्वीकृत संख्या में बढ़ोतरी

हाल ही में केंद्र सरकार ने एक बड़े कदम के तहत विशेष अध्यादेश लागू करके सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को 34 से बढ़ाकर 38 कर दिया था। इस नई व्यवस्था और हालिया पांच नियुक्तियों के बाद अब देश की सबसे बड़ी अदालत में कुल 38 पदों में से 37 पद पूरी तरह भर चुके हैं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट अब लगभग अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर सकेगा, जिससे न्याय के इंतजार में बैठे लाखों लोगों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। इन सभी पांचों नामों की आधिकारिक सिफारिश पिछले सप्ताह ही भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा सरकार को भेजी गई थी।

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सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में जिन पांच प्रतिष्ठित कानूनी विशेषज्ञों को नियुक्त किया गया है, उनमें न्यायिक क्षेत्र का लंबा अनुभव रखने वाले चेहरे शामिल हैं। इस सूची में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू, बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री चंद्रशेखर, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव सचदेवा और जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण पल्ली का नाम शामिल है। इन चार अनुभवी जजों के साथ ही सुप्रीम कोर्ट की जानी-मानी वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना को भी इस प्रतिष्ठित पद के लिए चुना गया है।

1. जस्टिस शील नागू: पर्यावरण और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मामलों के विशेषज्ञ

1 जनवरी 1965 को जन्मे जस्टिस शील नागू का पैतृक न्यायिक जुड़ाव मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से रहा है। सर्वोच्च न्यायालय में अपनी इस नई और बड़ी जिम्मेदारी से ठीक पहले वे पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। जस्टिस नागू ने वर्ष 1987 में कानूनी वकालत की शुरुआत की थी और उन्होंने अपने करियर में सिविल, संवैधानिक तथा सेवा से जुड़े पेचीदा मामलों में असाधारण विशेषज्ञता हासिल की। साल 2011 में उन्हें मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का अतिरिक्त जज और 2013 में स्थायी जज बनाया गया था, जिसके बाद जुलाई 2024 में उन्होंने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ ली। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और निजता के अधिकार जैसे विषयों पर कई नजीर बनने वाले फैसले दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट में उनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2029 तक रहेगा।

2. जस्टिस श्री चंद्रशेखर: झारखंड का प्रतिनिधित्व और बड़े मुकदमों का अनुभव

जस्टिस श्री चंद्रशेखर वर्तमान में बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। रांची (झारखंड) में जन्मे जस्टिस चंद्रशेखर ने दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की और 1993 में पेशेवर वकालत की दुनिया में कदम रखा। साल 2013 में वे झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने और बाद में उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। उन्होंने अपने कार्यकाल में सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ और मालेगांव विस्फोट जैसे देश के कई सबसे संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मामलों की सुनवाई की है। उनकी इस नियुक्ति को इसलिए भी बेहद खास माना जा रहा है क्योंकि लंबे समय से सुप्रीम कोर्ट में झारखंड राज्य का कोई प्रतिनिधित्व नहीं था। जस्टिस चंद्रशेखर मई 2030 में अपनी सेवाओं से सेवानिवृत्त होंगे।

3. जस्टिस संजीव सचदेवा: दो दशक तक बार काउंसिल का नेतृत्व करने का तजुर्बा

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत जस्टिस संजीव सचदेवा का जन्म 26 दिसंबर 1964 को हुआ था। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) और कैंपस लॉ सेंटर से अपनी उच्च शिक्षा पूरी की। दिल्ली हाईकोर्ट से अपने शानदार न्यायिक सफर की शुरुआत करने वाले जस्टिस सचदेवा को अप्रैल 2013 में वहां का अतिरिक्त जज और मार्च 2015 में स्थायी जज नियुक्त किया गया था। साल 2024 में उनका तबादला मध्य प्रदेश हुआ, जहां जुलाई 2025 में उन्होंने मुख्य न्यायाधीश का पदभार संभाला। जज बनने से पहले उन्होंने दो दशकों से भी अधिक समय तक बार काउंसिल ऑफ इंडिया के स्थायी वकील के रूप में कार्य किया था। सर्वोच्च न्यायालय में उनका कार्यकाल लगभग साढ़े तीन वर्षों का होने वाला है।

4. जस्टिस अरुण पल्ली: मध्यस्थता और लोक अदालतों के जरिए विवाद सुलझाने में माहिर

18 सितंबर 1964 को पटियाला में जन्मे जस्टिस अरुण पल्ली वर्तमान में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के गरिमामयी पद पर आसीन थे। उन्होंने साल 1988 में पंजाब विश्वविद्यालय से लॉ की डिग्री ली और पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में अपनी वकालत शुरू की। वह 2004 से 2007 तक पंजाब राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता भी रहे। दिसंबर 2013 में उन्हें जज के रूप में पदोन्नत किया गया और बाद में अप्रैल 2025 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में जिम्मेदारी संभाली। हरियाणा राज्य विधि सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में उन्होंने मध्यस्थता और लोक अदालत के माध्यम से हजारों पुराने विवादों को आपसी सहमति से सुलझाने में अद्भुत भूमिका निभाई थी। सुप्रीम कोर्ट में उनका कार्यकाल तीन वर्ष से थोड़ा अधिक होगा।

5. वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना: बार से सीधे जज बनने वाली देश की दूसरी महिला

इस पूरे नियुक्ति सत्र में सबसे ज्यादा ध्यान और चर्चा वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना की हो रही है। जस्टिस इंदु मल्होत्रा के बाद वी. मोहना भारत के न्यायिक इतिहास में केवल दूसरी ऐसी महिला बन गई हैं, जिन्हें बार (वकालत) से सीधे प्रमोट करके सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया जा रहा है। अब वे जस्टिस बी.वी. नागरत्ना के साथ सुप्रीम कोर्ट की दो कार्यरत महिला न्यायाधीशों में से एक होंगी और देश के इतिहास की 12वीं महिला जज बनेंगी।

27 जून 1966 को तमिलनाडु के कोयंबटूर में जन्मीं मोहना ने 1988 में लॉ कॉलेज से स्नातक किया और 1996 में सुप्रीम कोर्ट में ‘एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड’ बनीं। साल 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा दिया। वह सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिलाने, वरिष्ठ नागरिकों के संपत्ति अधिकारों और कर्नाटक हिजाब प्रतिबंध जैसे कई ऐतिहासिक मामलों में अदालत के सामने पेश हो चुकी हैं। वकालत के पेशे से सीधे जज बनने के कारण उनका कार्यकाल तुलनात्मक रूप से लंबा यानी लगभग पांच साल का होगा और वह जून 2031 में रिटायर होंगी।

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