Prashant Kishor News: बिहार चुनाव रद्द करने की मांग पर SC सख्त, जन सुराज पार्टी को लगाई कड़ी फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को चुनौती देने वाली जन सुराज पार्टी की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। प्रशांत किशोर की पार्टी ने आचार संहिता के दौरान महिलाओं को 10,000 रुपये बांटने का आरोप लगाया था। CJI सूर्य कांत ने कड़ी फटकार लगाते हुए याचिकाकर्ता को पटना हाई कोर्ट जाने की सलाह दी।

Prashant Kishor News

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

फ़रवरी 6, 2026

Prashant Kishor News: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों को चुनौती देने वाली प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज पार्टी’ को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने न केवल चुनाव रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार किया, बल्कि याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाते हुए पटना हाई कोर्ट जाने की सलाह दी।

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चुनाव रद्द करने की मांग और अनुच्छेद 32

बताते चले कि, जन सुराज पार्टी ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में मांग की गई थी कि बिहार में हुए हालिया विधानसभा चुनावों को पूरी तरह रद्द कर नए सिरे से मतदान कराया जाए। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक ही रिट याचिका के माध्यम से पूरे राज्य के चुनाव को चुनौती देना वैधानिक रूप से उचित नहीं है।

आचार संहिता उल्लंघन और महिलाओं को नकद हस्तांतरण

आपको बता दे कि, पार्टी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सीयू सिंह ने दलील दी कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के दौरान राज्य सरकार ने महिलाओं के खातों में 10-10 हजार रुपये ट्रांसफर किए। याचिका में इसे ‘भ्रष्ट आचरण’ (Corrupt Practice) करार देते हुए आरोप लगाया गया कि इसने चुनाव में ‘लेवल प्लेइंग फील्ड’ यानी समान अवसर के सिद्धांत को नष्ट कर दिया।

CJI सूर्य कांत की कड़ी फटकार और लोकप्रियता का मुद्दा

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत जन सुराज पार्टी के रुख पर काफी सख्त नजर आए। उन्होंने टिप्पणी की कि जनता द्वारा चुनाव में नकारे जाने के बाद राजनीतिक दल लोकप्रियता हासिल करने के लिए अदालत का सहारा ले रहे हैं। CJI ने पूछा कि जब पार्टी चुनाव में सब कुछ हार गई, तभी उसे इन खामियों की याद क्यों आई? कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपनी ‘सद्भावना’ (Bonafide) साबित करने की चुनौती भी दी।

फ्रीबीज बनाम जनकल्याण पर न्यायिक दृष्टिकोण

जब याचिकाकर्ता ने नकद वितरण को चुनावी रिश्वत बताया, तो CJI ने टिप्पणी की कि यह राशि महिलाओं की सहायता के लिए दी गई हो सकती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ‘फ्रीबीज’ या मुफ्त योजनाओं के व्यापक मुद्दे पर अदालत पहले से विचार कर रही है, लेकिन किसी चुनाव में पराजित दल के कहने पर न्यायिक हस्तक्षेप करना लोकतंत्र के लिए सही परंपरा नहीं है।

इलेक्शन पिटीशन और कानूनी प्रक्रिया का पालन

जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कानूनी आधार पर सवाल किया कि नियमों की किस धारा के तहत पूरे चुनाव को शून्य घोषित किया जा सकता है? कोर्ट के कड़े रुख को देखते हुए जन सुराज के वकील ने चुनाव रद्द करने वाली विशेष प्रार्थना पर जोर न देने की बात कही। अंततः, पीठ ने मामले की गंभीरता और क्षेत्राधिकार को देखते हुए याचिकाकर्ता को संबंधित उच्च न्यायालय (पटना हाई कोर्ट) जाने का निर्देश दिया।

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