Summit on Water: केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय की ओर से जल शक्ति विभाग से जुड़े विभिन्न विभागों की दो दिवसीय ‘डिपार्टमेंटल समिट ऑन वाटर’ बैठक आयोजित की गई। दिल्ली में 2 और 3 सितंबर को हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में देश के अलग-अलग राज्यों से जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी और पंचायत विभाग से जुड़े मंत्री शामिल हुए। छत्तीसगढ़ की ओर से उपमुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव ने बैठक में हिस्सा लिया।
देश को जल सुरक्षित बनाने के लक्ष्य पर हुआ मंथन
बैठक में राज्यों के मंत्रियों ने अपने-अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने बताया कि बैठक का मुख्य उद्देश्य साझा रणनीति तैयार करते हुए देश को भविष्य के लिए जल सुरक्षित बनाने की दिशा में आगे बढ़ना रहा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के साथ देश जल सुरक्षा के मामले में भी मजबूत हो, इस पर व्यापक चर्चा की गई।
जल परियोजनाओं के समय पर पूरा होने की चुनौतियों पर चर्चा
समिट के दौरान देशभर में संचालित विभिन्न जल परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने में सामने आ रही चुनौतियों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। अरुण साव के मुताबिक, परियोजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान आने वाली प्रशासनिक, तकनीकी और स्थानीय स्तर की समस्याओं को दूर करने के लिए बेहतर समन्वय और प्रभावी रणनीति की आवश्यकता है। बैठक में राज्यों ने इन चुनौतियों से निपटने के अपने अनुभव भी साझा किए।
ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध पेयजल आपूर्ति पर जोर
ग्रामीण इलाकों में लोगों को नियमित और निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराने को लेकर भी बैठक में विशेष चर्चा हुई। अरुण साव ने बताया कि आने वाले समय में ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है। ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया, जिससे लोगों को किसी भी मौसम या परिस्थिति में पेयजल की समस्या का सामना न करना पड़े।
गिरते भूजल स्तर को लेकर बढ़ती चिंता
बैठक में देश के कई हिस्सों में लगातार गिर रहे भूजल स्तर को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि भूजल संरक्षण और उसके स्तर को बनाए रखना आने वाले वर्षों में बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए स्थानीय स्तर पर जल संरक्षण के उपायों को प्रभावी तरीके से लागू करने और लोगों की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
रिचार्ज पिट और रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर चर्चा
भूजल स्तर को सुधारने के लिए रिचार्ज पिट के निर्माण और वर्षा जल संचयन यानी रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसे उपायों पर भी विस्तार से विचार हुआ। इसके साथ ही ‘कैच द रेन’ जैसे अभियानों को अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत पर चर्चा की गई। इन प्रयासों का उद्देश्य बारिश के पानी को संरक्षित करना और उसे भूजल स्तर बढ़ाने के लिए उपयोग में लाना है।
जल संरक्षण में जनभागीदारी को बताया अहम
अरुण साव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए भविष्य की जल सुरक्षा के लिए एक दूरदर्शी दिशा दी है। उनके मुताबिक, जल संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें आम नागरिकों की भागीदारी भी बेहद महत्वपूर्ण है। सामूहिक प्रयासों से ही देश के जल संसाधनों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
छत्तीसगढ़ में जल संसाधनों के संरक्षण पर फोकस
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार जल संसाधनों के संरक्षण को लेकर गंभीरता से काम कर रही है। राज्य में वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और उपलब्ध जल के उचित उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। जल के संरक्षण के साथ-साथ इसके विवेकपूर्ण इस्तेमाल को भी सरकार अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर रही है।
2047 तक जल सुरक्षित भारत की दिशा में प्रयास
दिल्ली में हुई इस बैठक में जल सुरक्षा को विकसित भारत के व्यापक लक्ष्य से जोड़कर देखा गया। राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, जल परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन, ग्रामीण पेयजल आपूर्ति और भूजल संरक्षण जैसे मुद्दों को भविष्य की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया। छत्तीसगढ़ सरकार ने भी जल संरक्षण और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
जल संकट से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
अरुण साव के मुताबिक, आने वाले समय में जल संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है, इसलिए अभी से प्रभावी कदम उठाना जरूरी है। वर्षा जल का अधिकतम संरक्षण, भूजल का पुनर्भरण और पानी का संतुलित उपयोग जल सुरक्षा की दिशा में अहम भूमिका निभाएगा। केंद्र और राज्यों के साझा प्रयासों तथा जनभागीदारी से देश को 2047 तक जल सुरक्षित बनाने के लक्ष्य को मजबूत आधार मिलने की उम्मीद है।
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