Sukhjinder Singh Randhawa News: पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने शुक्रवार (3 जुलाई, 2026) को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में एक महत्वपूर्ण मुलाकात की। इस बैठक के बाद रंधावा ने स्पष्ट किया कि उनकी यह चर्चा राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा स्थिति पर केंद्रित थी। रंधावा ने बताया कि उन्होंने दो महीने पहले ही आतंकवाद, नार्को-टेररिज्म (नशीले पदार्थों के व्यापार से जुड़ा आतंकवाद) और राज्य की असुरक्षित परिस्थितियों को लेकर गृह मंत्री को पत्र लिखा था, जिसके बाद उन्हें इस चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया था।
राजनीतिक अटकलों पर रंधावा का खंडन
जैसे ही रंधावा और अमित शाह की मुलाकात की खबर सार्वजनिक हुई, पंजाब के राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर शुरू हो गया। इसे देखते हुए कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “मीडिया के कुछ वर्गों द्वारा मेरी इस मुलाकात को जो शरारतपूर्ण राजनीतिक रंग दिया जा रहा है, मैं उसका पूरी तरह खंडन करता हूं।” रंधावा ने दोहराया कि उनका एकमात्र उद्देश्य पंजाब की सुरक्षा के प्रति अपनी चिंताएं केंद्र सरकार के समक्ष रखना था, और यह मुलाकात पूर्व निर्धारित थी।
हाईकमान की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
मुलाकात के दौरान पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही संगठनात्मक खींचतान पर भी चर्चा हुई। जब उनसे पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की आवश्यकता के बारे में पूछा गया, तो रंधावा ने पार्टी हाईकमान की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, “ऐसी स्थिति पैदा ही नहीं होनी चाहिए थी। अगर अंत में वही होना था जो पहले से तय था, तो फिर पार्टी नेतृत्व के साथ इतनी सारी बैठकों का क्या औचित्य था?” रंधावा ने पर्यवेक्षकों की सूची और निर्णयों को लेकर स्पष्टता की कमी पर निराशा जताई और कहा कि इस पर जवाब तो आलाकमान या अजय माकन ही दे सकते हैं।
विपक्षी दलों और समर्थकों की नजरें टिकीं
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब पंजाब कांग्रेस में आंतरिक असंतोष गहरा गया है। एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक नेतृत्व में बदलाव की मांग को लेकर लामबंद हैं, तो दूसरी तरफ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का दिल्ली दरबार में पहुंचना राजनीतिक सरगर्मियों को और तेज कर रहा है। रंधावा का गृह मंत्री से मिलना और सार्वजनिक रूप से पार्टी हाईकमान पर सवाल उठाना यह दर्शाता है कि राज्य इकाई में सब कुछ ठीक नहीं है। अब देखना यह होगा कि क्या केंद्र सरकार रंधावा द्वारा उठाए गए सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर कोई ठोस कदम उठाती है, या यह मामला केवल राजनीतिक विवाद तक ही सीमित रह जाता है।










