Sugar Price Hike: देशभर में आम लोगों की रसोई का अहम हिस्सा मानी जाने वाली चीनी के दामों में अचानक आई तेजी ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। त्योहारों के सीजन से ठीक पहले चीनी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का असर अब घरों के बजट से लेकर मिठाई कारोबार तक पर दिखाई देने लगा है। पिछले कुछ दिनों में चीनी के भाव जिस तेजी से बढ़े हैं, उसने बाजार और ग्राहकों दोनों को हैरान कर दिया है।
Share Market Today: शेयर बाजार ने मारी जोरदार वापसी, सेंसेक्स 500 अंक
20 दिनों में 20 रुपये की बढ़ोतरी
बाजार में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब 20 दिन पहले तक चीनी 45 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बिक रही थी। लेकिन अब इसकी कीमत बढ़कर 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। यानी बहुत कम समय में शक्कर के दाम में लगभग 20 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कीमतों में इस अचानक उछाल ने उपभोक्ताओं को परेशान कर दिया है। दिलचस्प बात यह है कि बाजार के कई व्यापारी भी इस तेजी की स्पष्ट वजह बताने में असमर्थ नजर आ रहे हैं। ग्राहकों के साथ-साथ कारोबारी भी बढ़ती कीमतों को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं।
त्योहारों से पहले बढ़ी चिंता
रक्षाबंधन, जन्माष्टमी और अन्य त्योहारों का मौसम शुरू होने वाला है। ऐसे समय में चीनी की कीमत बढ़ना सीधे तौर पर त्योहारों की तैयारियों पर असर डाल सकता है। मिठाइयों, पेय पदार्थों और कई खाद्य उत्पादों में चीनी का व्यापक उपयोग होता है। ऐसे में शक्कर महंगी होने से इन उत्पादों की लागत भी बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चीनी के दाम इसी तरह ऊंचे बने रहे, तो आने वाले दिनों में मिठाइयों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इससे त्योहारों के दौरान लोगों को अधिक खर्च करना पड़ सकता है।
मिठाई कारोबार पर भी पड़ेगा असर
चीनी के बढ़ते दामों का सबसे अधिक प्रभाव मिठाई उद्योग और छोटे कारोबारियों पर पड़ने की संभावना है। हलवाई और मिठाई दुकानदार बड़ी मात्रा में चीनी का उपयोग करते हैं। कच्चे माल की लागत बढ़ने से उनके उत्पादन खर्च में भी वृद्धि होगी। यदि लागत लगातार बढ़ती है, तो दुकानदारों के पास मिठाइयों के दाम बढ़ाने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं बचेगा। इसका सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा और त्योहारों के दौरान मिठाइयों की खरीदारी महंगी हो सकती है।
सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए उठाया कदम
चीनी की बढ़ती कीमतों और संभावित जमाखोरी को देखते हुए सरकार ने भी सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने चीनी के भंडारण को लेकर नई सीमा तय की है, ताकि बाजार में कृत्रिम कमी पैदा न हो और कीमतों को नियंत्रित रखा जा सके। नई व्यवस्था के तहत अब व्यापारी और कंपनियां पहले की तुलना में कम मात्रा में चीनी का स्टॉक रख सकेंगी। जहां पहले लगभग 30 दिनों का स्टॉक रखने की अनुमति थी, वहीं अब इसे घटाकर 15 दिनों तक सीमित कर दिया गया है।
कब से लागू होगा नया नियम?
सरकार द्वारा तय की गई यह स्टॉक सीमा 1 सितंबर से लागू होगी और 30 नवंबर तक प्रभावी रहेगी। इस अवधि में व्यापारियों और कंपनियों को निर्धारित सीमा के भीतर ही चीनी का भंडारण करना होगा। सरकार का उद्देश्य बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना और जमाखोरी पर रोक लगाना है, ताकि त्योहारों के दौरान उपभोक्ताओं को अनावश्यक महंगाई का सामना न करना पड़े। हालांकि, आने वाले दिनों में चीनी की कीमतों का रुख क्या रहेगा, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
क्रेडिट कार्ड बिल में 46 पैसे बकाया, लगा ₹1,200 से ज्यादा चार्ज; जानें नियम










