Sudan Civil War: कोर्डोफान में ड्रोन हमलों से मची तबाही, 77 की मौत से कांपा सूडान, रोंगटे खड़े कर देगी ये रिपोर्ट

सूडान के कोर्डोफान से आई रिपोर्ट रोंगटे खड़े कर देने वाली है। यहाँ विस्थापितों के आश्रय स्थल और बाजारों पर हुए ड्रोन हमलों ने 77 से अधिक लोगों को मौत की नींद सुला दिया। मासूम बच्चों और महिलाओं की चीखें आज भी हवाओं में तैर रही हैं। क्या दुनिया इस नरसंहार को रोक पाएगी?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 19, 2026

Sudan Civil War:  सूडान का कोर्डोफान क्षेत्र इन दिनों भीषण हिंसा और तबाही का केंद्र बना हुआ है। पिछले कुछ दिनों से जारी लगातार ड्रोन हमलों ने इस इलाके को श्मशान में तब्दील कर दिया है। ‘सूडान डॉक्टर्स नेटवर्क’ की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अलग-अलग स्थानों पर हुए इन हमलों में कम से कम 77 बेगुनाह लोगों की जान चली गई है, जबकि दर्जनों अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे सूडान का यह गृहयुद्ध अपने तीसरे साल की दहलीज पर पहुँच रहा है, हिंसा का स्वरूप और अधिक घातक होता जा रहा है। इन हमलों ने न केवल जान-माल का नुकसान किया है, बल्कि जीवन रक्षक सहायता अभियानों को भी पूरी तरह ठप कर दिया है।

आरएसएफ (RSF) पर गंभीर आरोप और गृहयुद्ध की भयावहता

इस रक्तरंजित संघर्ष में पैरामिलिट्री रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) पर घनी आबादी वाले नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। अप्रैल 2023 में सूडानी सेना और आरएसएफ के बीच शुरू हुई वर्चस्व की यह जंग अब एक पूर्ण युद्ध का रूप ले चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़े रूह कंपा देने वाले हैं; अब तक इस संघर्ष में 40,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और लगभग 1.2 करोड़ लोग अपना घर छोड़ने पर मजबूर हुए हैं। जानकारों का कहना है कि दूरदराज के इलाकों तक पहुंच न होने के कारण वास्तविक मृतक संख्या सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है।

रणनीतिक युद्धक्षेत्र बना कोर्डोफान: सेना बनाम आरएसएफ

एसीएलईडी (ACLED) के विश्लेषकों के अनुसार, युद्ध का केंद्र अब पश्चिम की ओर स्थानांतरित हो गया है, जिससे कोर्डोफान एक “प्रमुख युद्धक्षेत्र” बन गया है। हाल ही में सूडानी सेना ने दावा किया था कि उसने दक्षिण कोर्डोफान की राजधानी कडुगली और डिलिंग शहर पर आरएसएफ की दो साल पुरानी घेराबंदी को तोड़ दिया है। हालांकि, जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। घेराबंदी आंशिक रूप से कम जरूर हुई है जिससे कुछ दवाइयां और खाद्य सामग्री शहरों तक पहुँची है, लेकिन नियंत्रण की लड़ाई अभी भी उतनी ही तीव्र है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, घेराबंदी ढीली होने के बाद से आरएसएफ ने ड्रोन हमलों की आवृत्ति बढ़ा दी है, जो सीधे तौर पर अस्पतालों और बाजारों को निशाना बना रहे हैं।

नागरिकों में दहशत: अस्पतालों और बाजारों पर गिरते बम

कडुगली और डिलिंग के निवासियों के लिए जीवन एक दुःस्वप्न बन गया है। स्थानीय निवासी वालिद मोहम्मद और उमरान अहमद ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि ड्रोन हमले अब रोजाना की बात हो गए हैं। ये हमले रणनीतिक सैन्य ठिकानों के बजाय उन जगहों पर किए जा रहे हैं जहाँ आम नागरिक मौजूद होते हैं। बाजारों में खरीदारी करते लोग या अस्पतालों में इलाज करा रहे मरीज इन आधुनिक हथियारों का शिकार बन रहे हैं। इस स्थिति ने पूरे क्षेत्र में डर और आतंक का माहौल पैदा कर दिया है, जिससे लोग अपने ही घरों में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र की सख्त चेतावनी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने सूडान में बढ़ते ड्रोन युद्ध पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि नागरिक बुनियादी ढांचों जैसे स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों पर हमले अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन हैं। यूएन प्रवक्ता स्टेफेन दुजार्रिक ने संकेत दिया है कि दोनों ही पक्ष (सेना और आरएसएफ) नागरिकों के खिलाफ ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, सूडानी सैन्य अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि वे नागरिक ढांचे को निशाना नहीं बनाते। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय समुदाय सूडान में तत्काल युद्धविराम की मांग कर रहा है ताकि बढ़ते मानवीय संकट को रोका जा सके।

Read More: The Kerala Story 2 Controversy: ‘द केरला स्टोरी 2’ पर भड़के सीएम विजयन, क्या फिर होगा फिल्म पर बैन?