Haryana News: बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर श्रीलंका की उच्चायुक्त महिषिनी कोलोन कुरुक्षेत्र पहुँचीं। उन्होंने श्रीकृष्ण संग्रहालय का अवलोकन किया और बौद्ध धर्म से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों के महत्व पर प्रकाश डाला।
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बौद्ध स्थलों की महत्ता
महिषिनी कोलोन ने कहा कि भारत में गौतम बुद्ध से जुड़े अनेक ऐतिहासिक स्थल हैं जिन्हें भारत सरकार और राज्य सरकारों ने संरक्षित किया है। ये स्थल आने वाली पीढ़ियों को भाईचारे और बौद्ध शिक्षाओं को आगे बढ़ाने का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने हरियाणा में बुद्ध से जुड़े स्थलों को नए सिरे से मान्यता देने को सराहनीय बताया।
श्रीकृष्ण संग्रहालय में दर्शन

श्रीकृष्ण संग्रहालय में उच्चायुक्त ने करनाल के असंध स्तूप, अग्रोहा का प्राचीन टीला, यमुनानगर का सुघ (प्राचीन श्रुघ्न), चनेटी स्तूप, बौद्ध विहार, आदि बद्री और टोपरा कलां के बारे में जानकारी ली।
- असंध स्तूप से विभिन्न कालों के अवशेष मिले हैं जिन्हें बौद्ध स्तूप के रूप में पहचाना गया।
- अग्रोहा के उत्खनन में आवासीय संरचनाओं के साथ बौद्ध स्तूप के अवशेष मिले।
- सुघ को ह्वेनसांग ने बौद्ध संस्थानों से युक्त समृद्ध नगर बताया था।
- चनेटी स्तूप से वृत्ताकार संरचना और रेलिंग अवशेष प्राप्त हुए।
- आदि बद्री से मठीय संरचना और टेराकोटा अवशेष मिले।
- टोपरा कलां को सम्राट अशोक के स्तंभ का मूल स्थान माना जाता है।
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ऐतिहासिक संदर्भ
महिषिनी कोलोन ने अलेक्जेंडर कनिंघम और ह्वेनसांग के विवरणों का उल्लेख किया।
- कनिंघम ने यानेसर क्षेत्र में प्राचीन विहारों और स्तूप स्थलों के अवशेष पाए।
- ह्वेनसांग ने 7वीं शताब्दी में यानेसर का भ्रमण कर यहाँ तीन विहारों में 700 भिक्षुओं की उपस्थिति दर्ज की। उन्होंने अशोक द्वारा निर्मित विशाल स्तूप का भी उल्लेख किया।
साहित्यिक महत्व
- पाली साहित्य में कुरुक्षेत्र का उल्लेख मिलता है जहाँ बुद्ध के उपदेशों का वर्णन है।
- वैदिक ग्रंथों में कुरुक्षेत्र को सरस्वती नदी से जुड़ा पवित्र क्षेत्र बताया गया है। इसे धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना गया।
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