Sonam Wangchuk: सोनम वांगचुक का चीन को दो टूक जवाब, लद्दाख पर बयान देकर क्यों घिरे?

सोनम वांगचुक ने लद्दाख पर चीन के बयान का कड़ा जवाब देते हुए केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि लद्दाख को विधानसभा, छठी अनुसूची और संवैधानिक सुरक्षा देने से जुड़े वादों पर सरकार पीछे हट रही है। गृह मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक के बाद उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर की।

Sonam Wangchuk

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अक्टूबर 17, 2026

Sonam Wangchuk: जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने लद्दाख को लेकर चीन के बयान पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने साफ कहा कि चीन को लद्दाख के बारे में टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। इसके साथ ही वांगचुक ने अपनी ही सरकार पर भी निशाना साधा। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार ने लद्दाख के लोगों से जो वादे किए थे, उन्हें पूरा नहीं किया जा रहा है। वांगचुक ने एक वीडियो जारी कर चीन के बयान से लेकर गृह मंत्रालय के अधिकारियों के साथ हुई बैठक तक का पूरा मुद्दा उठाया।

चीन के विदेश मंत्रालय के बयान पर सोनम वांगचुक का पलटवार

चीन के विदेश मंत्रालय के बयान पर सोनम वांगचुक का पलटवार

बताते चले कि, सोनम वांगचुक ने अपने वीडियो में चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग के बयान का जिक्र किया। उनके मुताबिक, चीन की प्रवक्ता ने लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश के रूप में मान्यता नहीं देने की बात कही थी। इस पर वांगचुक ने पलटवार करते हुए कहा कि चीन को लद्दाख के बारे में बोलने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर चीन लद्दाख को मान्यता नहीं देता, तो लद्दाख के लोग भी उसके दावों को स्वीकार नहीं करते। वांगचुक का यह बयान चीन की टिप्पणी के जवाब में आया है।

सोनम वांगचुक ने तिब्बत का मुद्दा उठाकर चीन को घेरा

आपको बता दे कि, वांगचुक ने चीन पर निशाना साधते हुए तिब्बत का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोगों के लिए पड़ोसी तिब्बत है, न कि चीन। उन्होंने सवाल किया कि चीन तिब्बत को कब खाली करेगा और वहां के लोगों को उनका अधिकार कब लौटाएगा। वांगचुक के मुताबिक, चीन के बयान के विरोध में लेह अपेक्स बॉडी के नेताओं ने भी प्रेस वार्ता की और इस टिप्पणी की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोग भारत के साथ रहे हैं और आगे भी देश के साथ रहेंगे।

लद्दाख के मुद्दे पर केंद्र सरकार से नाराज क्यों हैं सोनम वांगचुक?

चीन के बयान पर नाराजगी जताने के बाद वांगचुक ने केंद्र सरकार को भी घेरा। उन्होंने लद्दाख के नेताओं और गृह मंत्रालय के अधिकारियों के बीच हुई बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें इस बातचीत से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन नतीजों ने निराश किया। वांगचुक ने तंज कसते हुए कहा, “हमें तो अपनों ने लूटा, गैरों में क्या दम था।” उनका कहना है कि चीन के बयान का विरोध करना अपनी जगह है, लेकिन जब अपने ही देश की सरकार वादे पूरे नहीं करती, तो लद्दाख के लोग अपनी बात किससे कहें?

लद्दाख को छठी अनुसूची का दर्जा देने के वादे पर विवाद

लद्दाख को छठी अनुसूची का दर्जा देने के वादे पर विवाद

वांगचुक ने कहा कि वर्ष 2019 में लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। उस समय लोगों को उम्मीद दिलाई गई थी कि आगे चलकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा और क्षेत्र को संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा देने पर भी कदम उठाए जाएंगे। उनके मुताबिक, लद्दाख के लोगों ने इन आश्वासनों पर भरोसा किया, लेकिन अब उन्हें लगता है कि सरकार अपने वादों से पीछे हट रही है। उन्होंने यह भी कहा कि लद्दाख के लोगों ने अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाया है, फिर भी उनकी उम्मीदें पूरी नहीं हुईं।

विधानसभा और अनुच्छेद 371 को लेकर भी उठाए सवाल

सोनम वांगचुक ने दावा किया कि बैठक के दौरान लद्दाख को विधानसभा देने की बात तो कही गई, लेकिन प्रस्तावित व्यवस्था में उसकी शक्तियों को लेकर सवाल बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव के अधिकार और प्रशासनिक नियंत्रण जैसे मुद्दे भी चिंता का विषय हैं। वांगचुक ने अनुच्छेद 371 से जुड़ी मांगों का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि इन मुद्दों पर भी लोगों को निराशा हाथ लगी है।

चीन के खिलाफ सख्त रुख, केंद्र से वादे पूरे करने की मांग

वांगचुक ने कहा कि लद्दाख के लोग देश की सुरक्षा और संप्रभुता के साथ खड़े हैं, लेकिन उन्हें अपनी ही सरकार से भी न्याय और सम्मान की उम्मीद है। उन्होंने सरकार के वादों और मौजूदा रुख के बीच अंतर पर सवाल उठाए। वांगचुक के मुताबिक, लद्दाख के लोग अपनी जमीन, पहचान और लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा चाहते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा कि जब लोगों की मांगों पर सुनवाई नहीं होती, तो वे अपनी बात लेकर कहां जाएं। अब इस पूरे विवाद में केंद्र सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।