Sonam Wangchuk: 2047 तक विकसित देश नहीं बनेगा भारत? वांगचुक ने सही नेतृत्व के लिए मांगी ‘शांतिपूर्ण क्रांति’

सोनम वांगचुक ने स्वतंत्रता दिवस से पहले भारत के भविष्य को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने 2047 तक देश को विकसित और सम्मानित राष्ट्र बनाने के लिए राजनीतिक नेतृत्व चुनने के तरीके में बदलाव की अपील की। वांगचुक ने इसे “शांतिपूर्ण क्रांति” और “भारत का दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन” बताते हुए नागरिकों से सक्षम नेताओं की पहचान करने को कहा।

Sonam Wangchuk

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 14, 2026

Sonam Wangchuk: एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने भारत की प्रति व्यक्ति आय और विकास की मौजूदा रफ्तार को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि देश में वर्तमान परिस्थितियां इसी तरह जारी रहीं तो 2047 तक भारत के विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो सकता है। वांगचुक ने पड़ोसी देशों की आर्थिक प्रगति का उदाहरण देते हुए देश में बड़े बदलाव की आवश्यकता बताई।

कई पड़ोसी देशों की प्रगति का दिया उदाहरण

अपने वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा कि करीब पांच दशक पहले भारत के बराबर या उससे पीछे रहने वाले कई देश आज विकास के कई पैमानों पर आगे निकल चुके हैं। उन्होंने थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, श्रीलंका और बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत को 2047 तक वैश्विक स्तर पर सम्मानित और मजबूत राष्ट्र बनाए रखने के लिए व्यवस्था में गंभीर बदलाव जरूरी हैं।

राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं समस्याएं

वांगचुक ने देश की शासन व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं को किसी एक राजनीतिक दल की सरकार तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। उनके अनुसार अलग-अलग समय में सत्ता में रही सरकारों के दौरान भी असहमति और विरोध की आवाजों को दबाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का भी किया जिक्र

उन्होंने 2012-13 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को याद करते हुए कहा कि उस आंदोलन के बाद देश में राजनीतिक बदलाव देखने को मिला था। हालांकि, उनके मुताबिक सरकार बदलने के बावजूद भ्रष्टाचार और अन्याय जैसी समस्याएं पूरी तरह खत्म नहीं हुईं। वांगचुक का दावा है कि समय के साथ ये समस्याएं नए रूप में सामने आई हैं और कई मामलों में पहले से अधिक गंभीर हो गई हैं।

शांतिपूर्ण क्रांति की जरूरत बताई

वांगचुक ने देश के राजनीतिक नेतृत्व को लेकर भी बदलाव की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसी शांतिपूर्ण क्रांति की आवश्यकता है, जिसके जरिए देश को बेहतर और सही नेतृत्व मिल सके। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से योग्य नेतृत्व चुनने की प्रक्रिया को मजबूत करना देश की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है।

निस्वार्थ और सक्षम लोगों की तलाश

एक्टिविस्ट ने लोगों से अपील की कि वे अपने क्षेत्र और देश में ऐसे लोगों की पहचान करें जो निस्वार्थ, निडर, चरित्रवान और सक्षम हों। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के नाम उनके लिए स्वतंत्रता दिवस का तोहफा होंगे। वांगचुक ने यह भी कहा कि वह ऐसे लोगों से मिलना चाहते हैं जो भारत के भविष्य और देश की नई दिशा तय करने में योगदान दे सकें।

शिक्षा व्यवस्था को बताया विकास की कुंजी

वांगचुक ने शिक्षा व्यवस्था को देश की तरक्की से सीधे जोड़ते हुए कहा कि जब तक शिक्षा क्षेत्र मजबूत नहीं होगा, तब तक भारत का भविष्य भी मजबूत नहीं हो सकता। उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद नए नेतृत्व से बड़े बदलाव की उम्मीद पर भी सवाल उठाया। उनके मुताबिक केवल मंत्री बदलने से नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत है।

28 जून से शुरू की थी भूख हड़ताल

सोनम वांगचुक ने 28 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। उन्होंने यह कदम NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों के समर्थन में उठाया था। आंदोलन के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने पर 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले गई थी।

सरकार के आश्वासन के बाद खत्म किया अनशन

बाद में वांगचुक को मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। सरकार की ओर से मिले आश्वासनों के बाद उन्होंने 24 जुलाई को अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी थी। इसके बाद उन्होंने देश के भविष्य और विकास से जुड़े मुद्दों पर अपना वीडियो संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने राजनीतिक, आर्थिक और शैक्षणिक सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया।

लद्दाख आंदोलन को लेकर भी रहे हैं चर्चा में

वांगचुक इससे पहले लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर लंबे आंदोलन के कारण भी चर्चा में रहे हैं। उनके खिलाफ सितंबर 2025 में लेह में हुई हिंसा को लेकर आरोप लगाए गए थे। सरकार ने उन पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया था। 26 सितंबर को उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लेकर जोधपुर जेल भेजा गया था।

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