SIR West Bengal : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी इस समय राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के दौरे पर हैं। ताजा जानकारी के अनुसार, वे कल यानी बुधवार को देश की सर्वोच्च अदालत, सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रह सकती हैं। मौका है पश्चिम बंगाल में चल रही मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) प्रक्रिया पर होने वाली महत्वपूर्ण सुनवाई का। मुख्यमंत्री की सुरक्षा टीम ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षा अधिकारियों से संपर्क साधा है और प्रोटोकॉल के अनुसार आवश्यक समन्वय किया है। ममता बनर्जी की इस संभावित उपस्थिति ने इस कानूनी लड़ाई को राजनीतिक गलियारों में और भी अधिक गरमा दिया है।
SIR प्रक्रिया के खिलाफ कानूनी जंग: ममता बनर्जी की याचिका के मुख्य बिंदु
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में जारी मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) को असंवैधानिक करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनकी इस याचिका में भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को मुख्य प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य में अपनाई जा रही SIR प्रक्रिया पूरी तरह से मनमानी, अलोकतांत्रिक और पारदर्शी नहीं है। ममता बनर्जी का तर्क है कि इस प्रक्रिया की वैधता संदिग्ध है और यह नागरिकों के मौलिक मताधिकार पर सीधा हमला है, इसलिए इस पर तत्काल रोक या न्यायिक समीक्षा की आवश्यकता है।
58 लाख मतदाताओं का मुद्दा: ‘जीवितों को मृत घोषित करने’ का गंभीर आरोप
ममता बनर्जी की याचिका में सबसे चौंकाने वाला दावा यह है कि SIR प्रक्रिया की आड़ में पश्चिम बंगाल के लगभग 58 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री का आरोप है कि चुनाव आयोग के अधिकारी बड़े पैमाने पर अनियमितताएं कर रहे हैं, जिसमें कई जीवित व्यक्तियों को दस्तावेजों में मृत दिखाकर उनका नाम वोटर लिस्ट से काटा जा रहा है। ममता बनर्जी का कहना है कि यह केवल तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि एक सुनियोजित प्रयास है ताकि एक विशेष वर्ग के मतदाताओं को आगामी चुनावों से पहले मताधिकार से वंचित किया जा सके।
चुनाव आयोग के साथ तल्ख बातचीत: बैठक बीच में छोड़कर बाहर निकलीं ममता
इस विवाद ने उस समय और उग्र रूप ले लिया जब सोमवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बीच हुई बैठक बेनतीजा रही। ममता बनर्जी ने आयोग के अधिकारियों पर “अहंकारी” होने का आरोप लगाया और कहा कि उनके प्रतिनिधिमंडल को बैठक के दौरान अपमानित किया गया। इसी अपमान का हवाला देते हुए वे बैठक को बीच में ही छोड़कर बाहर निकल आईं। मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि वे इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार के समझौते के मूड में नहीं हैं और अब वे सीधे न्यायपालिका से हस्तक्षेप की मांग कर रही हैं।
आयोग पर तीखा हमला: बीजेपी के ‘दलाल’ के रूप में काम करने का आरोप
निर्वाचन सदन से बाहर आने के बाद ममता बनर्जी ने मीडिया के सामने आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने चुनाव आयोग पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के इशारे पर काम करने का सीधा आरोप लगाया। ममता ने गुस्से में कहा, “आयोग बीजेपी के दलाल के रूप में व्यवहार कर रहा है। बंगाल में इतने लोग मारे गए, इसके लिए आखिर कौन जिम्मेदार है? आयोग ही इन सब परिस्थितियों के लिए उत्तरदायी है।” उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के बजाय विपक्षी दलों को परेशान करने की रणनीति अपना रहा है।
बुधवार की सुनवाई पर टिकीं सबकी निगाहें
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली यह सुनवाई पश्चिम बंगाल की भविष्य की राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। यदि अदालत ममता बनर्जी की दलीलों से सहमत होती है, तो चुनाव आयोग को अपनी पूरी प्रक्रिया पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है। वहीं, अगर याचिका खारिज होती है, तो ममता बनर्जी इस मुद्दे को ‘बंगाली अस्मिता’ और ‘लोकतंत्र की हत्या’ के नारे के साथ जनता के बीच ले जा सकती हैं। फिलहाल, राजधानी दिल्ली में राजनीतिक हलचल तेज है और हर कोई जस्टिस की बेंच द्वारा दिए जाने वाले आदेश का इंतजार कर रहा है।










