SIR Case Mamata Banerjee in Supreme Court: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर चल रहे विवाद ने राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल मचा दी है। इसी मामले की सुनवाई के लिए बुधवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं। वह सुबह तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के आवास से रवाना हुईं और सीधे शीर्ष अदालत पहुंचीं। सुप्रीम कोर्ट में इस सुनवाई के दौरान भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। ममता बनर्जी चीफ जस्टिस की कोर्ट यानी कोर्ट नंबर 1 में मौजूद रहीं और सबसे पीछे की पंक्ति में बैठकर कार्यवाही को देखा।
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सुप्रीम कोर्ट का पूर्व निर्देश

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग को तमिलनाडु में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान तार्किक विसंगति सूची में वर्गीकृत मतदाताओं के नाम प्रकाशित करने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था कि ग्राम पंचायत भवनों, उपमंडल के तालुका कार्यालयों और शहरी क्षेत्रों के वार्ड कार्यालयों में इन नामों को प्रदर्शित किया जाए। जिन लोगों के नाम सूची में हैं, वे प्रदर्शन की तिथि से 10 दिनों के भीतर व्यक्तिगत रूप से या अधिकृत प्रतिनिधियों के माध्यम से आवश्यक दस्तावेज जमा कर सकते हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात
सुनवाई से पहले ममता बनर्जी ने सोमवार को नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की थी। इस बैठक में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी, सांसद कल्याण बनर्जी और अन्य नेता भी मौजूद थे। सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य अधिकारियों ने विनम्र व्यवहार किया, लेकिन ममता बनर्जी ने उन पर झूठे आरोप लगाए और नाराज होकर मेज पटकी तथा बैठक से बाहर चली गईं।
एक सूत्र ने बताया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट किया कि कानून का शासन सर्वोपरि रहेगा। उन्होंने कहा कि कानून को अपने हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आयोग को प्रदत्त शक्तियों के अनुसार सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।
तमिलनाडु मामले में अदालत का रुख
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने तमिलनाडु में प्रक्रियात्मक अनियमितताओं के आधार पर SIR प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। अदालत ने निर्देश दिया कि मतदाता सूची में दर्ज नामों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाए ताकि लोग अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकें। अदालत ने यह भी कहा कि जिन लोगों के नाम सूची में हैं, वे निर्धारित समय सीमा के भीतर दस्तावेज जमा कर सकते हैं।
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