Silver Price Crash: सर्राफा बाजार में शुक्रवार को चांदी की कीमतों में अचानक और भयानक गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया। पिछले साल निवेशकों को 170 प्रतिशत का रिटर्न देने वाली चांदी ने इस बार MCX पर एक बड़ी उलटफेर की। मार्च एक्सपायरी वाली चांदी का भाव एक ही दिन में 1,07,968 रुपये या 27 प्रतिशत गिरकर 2,91,925 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ। यह गिरावट चांदी की कीमतों में अब तक की दूसरी सबसे बड़ी कमी मानी जा रही है।
इस गिरावट से चांदी 3 लाख रुपये के लेवल से काफी नीचे आ गई। दिलचस्प बात यह है कि चांदी का यह बुलबुला तब फूटा, जब इसकी कीमत गिरावट से एक दिन पहले ही 4 लाख रुपये के रिकॉर्ड हाई पर पहुंची थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट सिल्वर 28 प्रतिशत गिरकर 85 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर आ गया।
चांदी का बुलबुला फूटा! एक झटके में ₹1 लाख की गिरावट, सोने के भाव भी टूटे
मजबूत अमेरिकी डॉलर ने चांदी पर डाला दबाव

विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर में मजबूती चांदी की कीमतों में गिरावट का प्रमुख कारण रही। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने केविन वॉर्श को US फेडरल रिजर्व का नया चेयरमैन चुना है। वॉर्श के नामांकन के बाद डॉलर इंडेक्स 97 के स्तर से ऊपर चढ़ गया।
डॉलर का मजबूत होना सोने और चांदी दोनों के लिए नेगेटिव होता है, क्योंकि इनकी कीमत वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर में तय होती है। डॉलर मजबूत होने से विदेशी खरीदारों के लिए चांदी महंगी हो जाती है और इसकी मांग कम हो जाती है। इसके साथ ही बढ़ती इंटरेस्ट रेट्स भी नॉन-इंटरेस्ट देने वाले एसेट्स जैसे चांदी की अपील को कमजोर कर देते हैं।
सोने की बढ़ती कीमतों का प्रभाव
चांदी की कीमतें अक्सर सोने के रुझान का अनुसरण करती हैं। हफ्ते की शुरुआत में सोने की कीमतें रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गई थीं। स्पॉट गोल्ड ग्लोबल मार्केट में 5600 डॉलर प्रति औंस के करीब था। हालांकि, शुक्रवार को सोने की कीमतें 4.7 प्रतिशत गिरकर 5,143.40 डॉलर प्रति औंस पर आ गईं। MCX पर सोने का फरवरी वायदा 12 प्रतिशत या 20,514 रुपये गिरकर 1,50,440 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ।
केविन वॉर्श का नॉमिनेशन और मध्य अवधि का असर
सिटी रिसर्च के अनुसार, केविन वॉर्श का फेड में नामांकन यह संकेत देता है कि फेडरल रिजर्व स्वतंत्र रहेगा। इसे सोने के लिए मीडियम-टर्म बेयरिश फैक्टर माना गया। इस फैसले का असर चांदी के भाव पर भी पड़ा। वॉर्श को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में देखा जा रहा है, जो ट्रंप प्रशासन की नीतियों से सहमत होने के बावजूद संस्थागत स्वतंत्रता पर जोर देंगे। इसका मतलब यह है कि राजनीतिक दबाव में न रहते हुए वॉर्श अपने निर्णय आंकड़ों के आधार पर लेंगे। इससे निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ी और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट आई।
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