देश की आर्थिक मजबूती का संकेत: विदेशी मुद्रा भंडार 687 बिलियन डॉलर के पार

नई दिल्ली भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 9 जनवरी को समाप्त हुए हफ्ते में 392 मिलियन डॉलर बढ़कर 687 बिलियन डॉलर हो गया है। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से शुक्रवार को दी गई। आरबीआई ने कहा कि 9 जनवरी को समाप्त हुए हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार के अहम घटक गोल्ड रिजर्व की वैल्यू 1.56 बिलियन डॉलर बढ़कर 112.83 बिलियन डॉलर हो गई है। गोल्ड रिजर्व में बढ़ोतरी की एक वजह सोने की कीमतों का तेजी के बढ़ना है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने का दाम बीते एक हफ्ते में करीब 2.5 प्रतिशत और पिछले एक महीने

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Published On :

जनवरी 16, 2026

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नई दिल्ली
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 9 जनवरी को समाप्त हुए हफ्ते में 392 मिलियन डॉलर बढ़कर 687 बिलियन डॉलर हो गया है। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से शुक्रवार को दी गई। आरबीआई ने कहा कि 9 जनवरी को समाप्त हुए हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार के अहम घटक गोल्ड रिजर्व की वैल्यू 1.56 बिलियन डॉलर बढ़कर 112.83 बिलियन डॉलर हो गई है। गोल्ड रिजर्व में बढ़ोतरी की एक वजह सोने की कीमतों का तेजी के बढ़ना है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने का दाम बीते एक हफ्ते में करीब 2.5 प्रतिशत और पिछले एक महीने में करीब 5.5 प्रतिशत बढ़ चुका है।
विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े घटक फॉरेन करेंसी एसेट्स (एफसीए) की वैल्यू 1.12 बिलियन डॉलर कम होकर 550.86 बिलियन डॉलर रह गई है।
एफसीए में डॉलर के साथ दुनिया की अन्य बड़ी करेंसी जैसे येन, यूरो और पाउंड शामिल होती हैं, जिनकी वैल्यू को डॉलर में व्यक्त किया जाता है। आरबीआई के मुताबिक, 9 जनवरी को समाप्त हुए हफ्ते में एसडीआर की वैल्यू 39 मिलियन डॉलर कम होकर 18.73 बिलियन डॉलर हो गई है। आईएमएफ में रिसर्व पॉजिशन की वैल्यू 13 मिलियन डॉलर कम होकर 4.758 बिलियन डॉलर हो गई है।
किसी भी देश की लिए उसका विदेशी मुद्रा भंडार काफी महत्वपूर्ण होता है और इससे उस देश की आर्थिक स्थिति का पता लगता है। इससे अलावा यह मुद्रा की विनिमय दर को स्थिर रखने में बड़ी भूमिका निभाता है।
उदाहरण के लिए अगर किसी स्थिति में डॉलर के मुकाबले रुपए पर अधिक दबाव देखने को मिलता है और उसकी वैल्यू कम होती है तो केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल कर डॉलर के मुकाबले रुपए को गिरने से रोक सकता है और विनिमय दर को स्थिर रखता है। बढ़ता हुआ विदेशी मुद्रा भंडार यह भी दिखाता है कि देश में डॉलर की आवक बड़ी मात्रा में बनी हुई है और यह देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाता है। साथ ही इसके बढ़ने से देश के लिए विदेशों में व्यापार करना भी आसान हो जाता है।

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