Shiv Sena UBT Crisis: संसद से सड़क तक सियासी संग्राम, शिवसेना में उथल-पुथल

Shiv Sena UBT Crisis: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट में संभावित टूट और सांसदों के पाला बदलने की खबरों ने सियासी माहौल को गर्मा दिया है। इसी बीच राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सिब्बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी राय रखते हुए मौजूदा राजनीतिक स्थिति और दल-बदल की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। मुख्यमंत्री सैनी की बैठक में 1468 करोड़ के 32 विकास कार्यों को मंजूरी दी गई कपिल सिब्बल का

संसद से सड़क तक सियासी संग्राम

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जून 17, 2026

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Shiv Sena UBT Crisis: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट में संभावित टूट और सांसदों के पाला बदलने की खबरों ने सियासी माहौल को गर्मा दिया है। इसी बीच राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सिब्बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी राय रखते हुए मौजूदा राजनीतिक स्थिति और दल-बदल की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।

मुख्यमंत्री सैनी की बैठक में 1468 करोड़ के 32 विकास कार्यों को मंजूरी दी गई

कपिल सिब्बल का संवैधानिक सवाल

कपिल सिब्बल ने अपने बयान में कहा कि यदि किसी पार्टी के चुनाव चिन्ह पर चुना गया सांसद बाद में किसी अन्य चुनाव चिन्ह वाली पार्टी में शामिल हो जाता है, तो यह लोकतांत्रिक और संवैधानिक दृष्टि से सही नहीं माना जा सकता। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब कोई उम्मीदवार एक प्रतीक के आधार पर संसद में चुना जाता है, तो वह बाद में किसी अन्य राजनीतिक प्रतीक या दल में कैसे जा सकता है। उनके अनुसार यह स्थिति लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ है। सिब्बल ने इस प्रकरण को “अनैतिक, गैर-कानूनी और असंवैधानिक” बताते हुए कहा कि अब इस मामले का निर्णय न्यायालय के स्तर पर होना चाहिए।

उद्धव ठाकरे गुट में सांसदों के टूटने की चर्चा

दूसरी ओर, राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) से कुछ सांसद अलग हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में पार्टी के लगभग नौ सांसदों में से छह सांसद कथित रूप से दूसरे गुट के संपर्क में चले गए हैं। यदि यह आंकड़ा सही साबित होता है, तो पार्टी के पास केवल तीन सांसद ही बचेंगे।हालांकि, इस बीच यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी दावे अंतिम रूप से पुष्टि नहीं हुए हैं और स्थिति लगातार बदल रही है।

अटकलों और स्पष्टीकरणों का दौर

इस पूरे विवाद के बीच यह भी खबर सामने आई कि नासिक से सांसद राजाभाऊ वाजे का नाम भी टूट की अटकलों में शामिल था। लेकिन उन्होंने सार्वजनिक रूप से इन अफवाहों को खारिज करते हुए कहा कि वे पूरी तरह से उद्धव ठाकरे के साथ बने हुए हैं। इसी तरह पार्टी के भीतर असमंजस की स्थिति बनी हुई है, जहां अलग-अलग नेताओं को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं।

संसद में मुलाकात और कानूनी पहल

इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच उद्धव ठाकरे गुट के कुछ प्रमुख सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल में अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राज्यसभा सांसद संजय राउत शामिल थे। मुलाकात के बाद संजय राउत ने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें आश्वासन दिया है कि पूरे मामले पर कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।

शिंदे गुट के दावे और बढ़ता तनाव

इसी बीच शिंदे गुट की ओर से यह दावा भी किया गया है कि वे अभी भी 16 विधायकों के संपर्क में हैं। इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में तनाव और बढ़ गया है।लगातार बदलते घटनाक्रमों ने राज्य की सियासत को अनिश्चितता के दौर में ला दिया है, जहां आने वाले दिनों में और बड़े राजनीतिक बदलाव की संभावना जताई जा रही है।

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