Sheikh Hasina Press Conference: दिल्ली से दिए बयान के बाद बांग्लादेश में मचा सियासी बवाल, मीडिया में तीखी प्रतिक्रिया

ढाका  दिल्ली में बुधवार को शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बांग्लादेश में दो तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिली. एक तरफ अवामी लीग समर्थकों ने फिर से वापसी की उम्मीद देखनी शुरू की, तो दूसरी तरफ हसीना और अवामी लीग के विरोधियों की नाराजगी भी तेज हो गई. इसी बीच बांग्लादेश के क्रिकेटर शाकिब अल हसन के घर पर रात में बमबाजी और हमला हुआ।  इस पूरी घटना से पहले भी ढाका कई दिनों से आपत्ति जता रहा था, लेकिन भारत ने उस पर ध्यान नहीं दिया. विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि यह कार्यक्रम एक निजी संस्था

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Published On :

अगस्त 6, 2026

ढाका 

दिल्ली में बुधवार को शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बांग्लादेश में दो तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिली. एक तरफ अवामी लीग समर्थकों ने फिर से वापसी की उम्मीद देखनी शुरू की, तो दूसरी तरफ हसीना और अवामी लीग के विरोधियों की नाराजगी भी तेज हो गई. इसी बीच बांग्लादेश के क्रिकेटर शाकिब अल हसन के घर पर रात में बमबाजी और हमला हुआ। 

इस पूरी घटना से पहले भी ढाका कई दिनों से आपत्ति जता रहा था, लेकिन भारत ने उस पर ध्यान नहीं दिया. विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि यह कार्यक्रम एक निजी संस्था की पहल पर हुआ और इसमें सरकार किसी भी तरह से शामिल नहीं है. मामला पूरी तरह गैर सरकारी है। 

अब बड़ा सवाल यह है कि शेख हसीना के सार्वजनिक रूप से सामने आने और उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस को बांग्लादेशी मीडिया ने कैसे कवर किया. ज्यादातर बांग्लादेशी न्यूज प्लेटफॉर्म्स ने शेख हसीना के बयान से ज्यादा बीएनपी सरकार की नाराजगी को प्रमुखता दी। 

बांग्लादेशी मीडिया ने शेख हसीना के प्रेस कॉन्फ्रेंस को कैसे कवर किया?
'बांग्लादेश प्रतिदिन' ने इस आयोजन को नकारात्मक ढंग से पेश किया. अखबार ने मुख्य रूप से बांग्लादेश सरकार के गुस्से को सामने रखा. उसके पहले पन्ने की सुर्खी थी, 'दिल्ली के कार्यक्रम में दंडित हसीना को बयान देने की अनुमति पर नाराज प्रतिक्रिया। 

दूसरी तरफ, बांग्लादेश के लोकप्रिय अखबार 'प्रथम आलो' ने शेख हसीना के भाषण को कवर ही नहीं किया. उसने शाकिब अल हसन के घर पर हमले की खबर छापी. इस तरह यह दिखाया गया कि दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर बांग्लादेश के एक हिस्से में गुस्सा है. 'प्रथम आलो' में हसीना के भाषण पर कोई खबर नजर नहीं आई। 

'दैनिक इत्तेफाक' ने शेख हसीना के बयान के विरोध में बांग्लादेश में क्या क्या हुआ, इसी पर फोकस रखा. उसने बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहउद्दीन अहमद की टिप्पणी को मुख्य खबर बनाया. उनका कहना था, 'अवामी लीग की किस्मत तय करेगी अदालत। 

इसी रिपोर्ट में अवामी लीग सरकार के पूर्व गृह राज्य मंत्री तंजीम अहमद सोहेल ताज की टिप्पणी भी प्रमुख रही. उन्होंने हसीना को निशाना बनाते हुए कहा, 'अपने कामों की जिम्मेदारी स्वीकार किए बिना पार्टी को भ्रमित किया जा रहा है और देश लौटने का अवास्तविक सपना दिखाया जा रहा है। 

कई अखबारों ने शेख हसीना के बयान को कवर नहीं किया
'कालेर कंठ' ने भी ढाका की नाराजगी को ही उभारा. दिल्ली के कार्यक्रम को लेकर बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय की कड़ी प्रतिक्रिया को प्रमुखता दी, जबकि हसीना ने क्या कहा, इस पर कुछ भी प्रकाशित नहीं किया गया. 'जुगांतर' ने भी लगभग यही रास्ता अपनाया. उसने भी 'दैनिक इत्तेफाक' की तरह तंजीम अहमद सोहेल ताज की आलोचना को पहले पन्ने पर जगह दी। 

अंग्रेजी समाचार माध्यम 'ढाका ट्रिब्यून' ने भी हसीना के बयान की खबर से दूरी बनाई और बीएनपी सरकार के गुस्से को पहले पन्ने की मुख्य खबर के तौर पर छापा. उसने विस्तार से बताया कि हसीना के बयान से बांग्लादेश सरकार नाराज है। 

शेख हसीना ने बांग्लादेश लौटने का किया ऐलान
'बांग्लादेश पोस्ट' ने जमात ए इस्लामी के प्रमुख सॉफिकुर रहमान की चेतावनी को प्रमुखता दी. पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि वह इसी साल दिसंबर में शायद बांग्लादेश लौटेंगी. इसी को लेकर सॉफिकुर रहमान ने कहा कि एक और क्रांति सामने है. यानी उन्होंने जोरदार इशारा दिया कि बांग्लादेश फिर अशांत हो सकता है।