Sheetla Ashtami 2026: आज बुधवार, 11 मार्च 2026 को पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है। इसे लोक भाषा में ‘बसोड़ा’ भी कहा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पर्व हर साल चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आता है। मान्यता है कि ऋतु परिवर्तन के इस समय में माता शीतला की पूजा करने से चेचक, खसरा और हैजा जैसी संक्रामक बीमारियों से परिवार की रक्षा होती है।
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क्यों चढ़ाया जाता है बासी भोजन?

शीतला माता को ‘शीतलता’ का प्रतीक माना गया है। इस दिन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि माता को ताजा भोजन नहीं, बल्कि एक दिन पहले (सप्तमी की रात) बना हुआ बासी भोजन भोग के रूप में अर्पित किया जाता है। श्रद्धालु हलवा, पूरी, मीठे चावल और राबड़ी जैसे पकवान बनाकर माता को चढ़ाते हैं और स्वयं भी प्रसाद के रूप में बासी भोजन ही ग्रहण करते हैं। धार्मिक दृष्टिकोण से यह परंपरा शरीर को गर्मी से बचाने और शीतलता प्रदान करने का संदेश देती है।
भूल से भी न करें ये 7 गलतियां
शास्त्रों और लोक मान्यताओं के अनुसार, शीतला अष्टमी के दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य माना गया है। यदि इन नियमों की अनदेखी की जाए, तो माता शीतला रुष्ट हो सकती हैं और घर की सुख-शांति भंग हो सकती है।
1. अग्नि का प्रयोग पूरी तरह वर्जित
इस दिन घर में चूल्हा, गैस या किसी भी प्रकार की अग्नि जलाना वर्जित माना गया है। चूल्हा जलाने का अर्थ है ‘गर्मी’ पैदा करना, जो शीतला माता के स्वभाव के विपरीत है। इसलिए इस दिन घर की रसोई ठंडी रखी जाती है।
2. ताजा भोजन न बनाएं, न खाएं
बसोड़ा के दिन भूलकर भी ताजा और गरम भोजन नहीं करना चाहिए। सप्तमी की रात को तैयार किया गया भोजन ही पूरे दिन ग्रहण किया जाता है। माना जाता है कि इस दिन गर्म खाना खाने से स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
3. घर में साफ-सफाई और झाड़ू-पोछा
मान्यता है कि अष्टमी के दिन घर में झाड़ू लगाने या धूल उड़ाने से माता का अपमान होता है। इस दिन घर को शांत और शुद्ध रखने का विधान है, इसलिए भारी साफ-सफाई से बचना चाहिए।
4. सिलाई-कढ़ाई और नुकीली वस्तुओं का उपयोग
शीतला अष्टमी पर सुई-धागे का काम, सिलाई, कटाई या किसी चीज को पीसने (जैसे मसाला पीसना) जैसी क्रियाएं वर्जित हैं। इन कार्यों को इस पवित्र दिन पर अशुभ माना जाता है।
5. गर्म पानी से स्नान करने से बचें
चूंकि यह पर्व शीतलता को समर्पित है, इसलिए श्रद्धालुओं को केवल ठंडे या सामान्य ताजे पानी से ही स्नान करना चाहिए। गर्म पानी का उपयोग माता की पूजा के नियमों के विरुद्ध माना गया है।
6. तामसिक भोजन और व्यसनों से दूरी
इस दिन पूर्ण सात्विकता का पालन करना चाहिए। भोजन में प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का प्रयोग करना महापाप माना गया है। तामसिक प्रवृत्तियों से दूर रहकर ही माता की कृपा प्राप्त की जा सकती है।
7. बाल और नाखून काटना
शास्त्रों के अनुसार, किसी भी व्रत या विशेष पर्व पर बाल काटना, नाखून काटना या सिर धोना वर्जित होता है। शीतला अष्टमी पर भी इन नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिए।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।










