Sheetala Ashtami 2026: 11 या 12 मार्च कब है शीतला अष्टमी? जानें तारीख और शुभ मुहूर्त

चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला शीतला अष्टमी का पर्व इस वर्ष 11 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन माँ शीतला की पूजा की जाती है, जिन्हें आरोग्यता और स्वच्छता की देवी माना जाता है।

Sheetala Ashtami 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मार्च 5, 2026

Sheetala Ashtami 2026: सनातन धर्म में कई सारे व्रत त्योहार पड़ते हैं और सभी का अपना महत्व भी होता है। लेकिन शीतला अष्टमी को बेहद ही खास माना जाता है जो कि मां शीतला को समर्पित है। इस दिन भक्त उपवास रखकर देवी की विधिवत पूजा करते हैं। शीतला अष्टमी का व्रत हर साल चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को किया जाता है।

इस व्रत को बसौड़ा के नाम से भी जानते हैं, क्योंकि इस दिन देवी शीतला को बासी भोजन का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि इस पावन दिन पर पूजा पाठ और व्रत करने से सुख समृद्धि और शांति का आगमन होता है और कष्टों का निवारण हो जाता है। ऐसे में हम आपको अपने इस लेख द्वारा शीतला अष्टमी की तारीख और पूजा की सरल विधि बता रहे हैं तो आइए जानते हैं।

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शीतला अष्टमी की तारीख

Sheetala Ashtami 2026
11 या 12 मार्च कब है शीतला अष्टमी?

पंचांग के अनुसार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 11 मार्च को रात 1 बजकर 54 मिनट पर हो रही है और इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 12 मार्च को सुबह 4 बजकर 19 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि की मानें तो इस साल शीतला अष्टमी का व्रत 11 मार्च को रखा जाएगा।

शीतला अष्टमी पूजा मुहूर्त

शीतला अष्टमी के दिन शुभ मुहूर्त में माता की पूजा करना लाभकारी होता है। ऐसे में इस साल शीतला अष्टमी के दिन माता की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 36 मिनअ से आरंभ हो रहा है और इसका समापन शाम को 6 बजकर 27 मिनट पर हो जाएगा। इस दौरान देवी पूजा करना शुभ रहेगा।

पूजा की सरल विधि

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11 या 12 मार्च कब है शीतला अष्टमी?

शीतला अष्टमी के पावन दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और फिर साफ वस्त्रों को धारण कर भगवान सूर्यदेव को जल अर्पित करें। इसके बाद घर के मंदिर में चौकी पर माता शीतला देवी की प्रतिमा या तस्वीर रखें। इसके अलावा विधि विधान से माता की पूजा करें पूजा के दौरान देवी के समक्ष घी का दीपक और धूप जलाएं। देवी को रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित करें। फिर बासी भोजन का भोग चढ़ाएं। इसके बाद व्रत कथा का पाठ करें और अंत में आरती कर पूजा का समापन करें। माना जाता है कि इस विधि से पूजा पाठ करने से देवी प्रसन्न होकर कृपा करती हैं।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।