Share Market: 15 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार में मजबूत शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी 360 अंकों से अधिक की तेजी के साथ 24,228 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है, जो बाजार में आज तेजी के माहौल की ओर इशारा करता है। इससे पहले 14 अप्रैल को बाजार बंद था, जबकि 13 अप्रैल को भारी गिरावट देखने को मिली थी। उस दिन सेंसेक्स 702 अंक टूटकर 76,847 पर और निफ्टी 50 207 अंक गिरकर 23,842 पर बंद हुआ था।
हालांकि, अब वैश्विक बाजारों से मिल रहे सकारात्मक संकेतों के कारण सेंटीमेंट में सुधार देखा जा रहा है। अमेरिकी शेयर बाजार मजबूत बढ़त के साथ बंद हुए हैं, जिससे एशियाई बाजारों के साथ-साथ भारतीय बाजारों में भी आज तेजी की उम्मीद बन रही है।
अमेरिकी बाजार और डॉलर में कमजोरी से मिला सपोर्ट

अमेरिकी बाजारों की मजबूती भारतीय बाजार के लिए बड़ा सहारा बन रही है। नैस्डेक लगातार 10वें कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुआ, जो टेक्नोलॉजी शेयरों में मजबूत खरीदारी को दर्शाता है। वहीं S&P 500 अपने रिकॉर्ड हाई के करीब पहुंच चुका है, जिससे यह साफ है कि अमेरिकी बाजार अभी भी अपट्रेंड में हैं।
इसके साथ ही डॉलर इंडेक्स में लगातार गिरावट भी उभरते बाजारों के लिए सकारात्मक संकेत है। कमजोर डॉलर से विदेशी निवेशक (FII) भारत जैसे बाजारों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे बाजार में लिक्विडिटी बढ़ने की संभावना है। साथ ही रुपये को भी मजबूती मिल सकती है, जो आयात लागत को कम कर आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देता है।
भू-राजनीतिक तनाव में राहत और कच्चे तेल का स्थिर रुख
मध्य-पूर्व से जुड़े भू-राजनीतिक हालात भी फिलहाल बाजार के पक्ष में नजर आ रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की संभावनाएं बन रही हैं, जिससे तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है। इजराइल-ईरान संघर्ष में हाल ही में हुए सीजफायर और क्षेत्रीय बातचीत ने भी निवेशकों को राहत दी है।
कच्चे तेल की कीमतें हालांकि ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, लेकिन बाजार में फिलहाल किसी बड़ी घबराहट का माहौल नहीं है। ब्रेंट और WTI क्रूड नियंत्रित दायरे में कारोबार कर रहे हैं, जिससे वैश्विक बाजारों को स्थिरता मिल रही है।
घरेलू आर्थिक संकेतों से भी बाजार को समर्थन
भारतीय बाजार को घरेलू स्तर पर भी सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। बैंकिंग सेक्टर के मजबूत तिमाही नतीजों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है और इस सेक्टर में खरीदारी देखने को मिल रही है। इसके अलावा थोक महंगाई दर (WPI) के कमजोर आंकड़ों से यह संकेत मिलता है कि मुद्रास्फीति का दबाव कम हो रहा है।महंगाई में नरमी से भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ सकती है, जो शेयर बाजार के लिए एक बड़ा पॉजिटिव फैक्टर साबित हो सकता है।









