
Shardiya Navratri 2026: देशभर में धूमधाम से शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व मनाया जा रहा है। यह नौ दिन देवी दुर्गा की साधना आराधना को समर्पित होते हैं इस दौरान भक्त देवी मां के नौ अगल अलग रूपों की पूजा अर्चना करते हैं और उपवास भी रखते हैं, मान्यता है कि इस दौरान पूजा पाठ और व्रत करने से भक्तों की सारी मनोकामना पूरी हो जाती हैं और सुख समृद्धि का आशीर्वाद भी मिलता है। आज यानी 13 अक्टूबर दिन मंगलवार को शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन है जो कि माता के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा अर्चना को समर्पित है। ऐसे में हम आपको मां चंद्रघंटा के प्रिय भोग, मंत्र व पूजा विधि की जानकारी प्रदान कर रहे हैं तो आइए जानते हैं।
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मां चंद्रघंटा के प्रिय भोग

आपको बता दें कि देवी चंद्रघंटा को कुछ खास चीजें बेहद प्रिय है, अगर आप आज देवी की विधिवत पूजा कर रहे हैं तो माता को दूध से बनी चीजों का भोग जरूर लगाएं। आप देवी को गाय के दूध से बनी खीर या मिठाई का भोग लगा सकते हैं। इसके अलावा मखाने की खीर भी देवी मां को प्रिय है। आप बताशा और मिश्री का भी भोग लगा सकते हैं। मां चंद्रघंटा को शहद का भोग भी लगाना अच्छा रहेगा, मान्यता है कि ऐसा करने से देवी कृपा बरसती है। वहीं सफेद रंग की मिठाई का भी भोग देवी को लगाया जा सकता है।
नवरात्रि के तीसरे दिन ऐसे करें माता की पूजा

मां चंद्रघंटा की कृपा प्राप्त करने के लिए पूजा के दौरान कुछ विशेष नियमों और सामग्रियों का ध्यान रखना चाहिए। आज पूजा के समय सफेद, गोल्डन, लाल या पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। माता रानी को लाल रंग के फूल, विशेष तौर पर गुड़हल का फूल अत्यंत प्रिय है। पूजा में मां दुर्गा को रोली, सिंदूर, अक्षत और कुमकुम अवश्य चढ़ाएं। माता अंबे को एक साफ पान के पत्ते पर सुपारी, लौंग और इलायची रखकर अर्पित करें। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पान का पत्ता कहीं से भी कटा-फटा नहीं होना चाहिए।

मां को प्रसन्न करने के लिए उन्हें सुहाग की सामग्री जैसे लाल चूड़ियां, आलता, बिंदी और सिंदूर आदि भेंट करें। पूजा के दौरान मां चंद्रघंटा के इस पावन मंत्र का कम से कम 108 बार जाप अवश्य करें। पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकास्त्रकरयुक्ता। प्रसादं तनु मह्यं चंद्रघंतेति विश्रुता॥
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