Shankaracharya Controversy: क्या प्रशासन तय करेगा कौन होगा शंकराचार्य? अविमुक्तेश्वरानंद ने सरकार को दी खुली चुनौती

शंकराचार्य पद की नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन के दखल पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने साफ कहा कि शंकराचार्य की परंपरा शास्त्र और संत तय करते हैं, कोई सरकारी अधिकारी नहीं। आखिर इस विवाद के पीछे कौन सी बड़ी शक्ति है जो संतों को चुनौती दे रही है?

Shankaracharya Controversy

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 20, 2026

Shankaracharya Controversy: प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रशासन के बीच विवाद हल नहीं हो रहा है। अब मेला प्राधिकरण ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए नोटिस जारी किया है और 24 घंटे में जवाब मांगा है। नोटिस में पूछा गया है कि उन्होंने अपने नाम के आगे शंकराचार्य कैसे लगाया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट किया है कि शंकराचार्य वही हैं जिन्हें अन्य प्रमुख पीठों के शंकराचार्य मान्यता देते हैं।

द्वारका और श्रृंगेरी पीठ का समर्थन

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दावा किया कि द्वारका और श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य उन्हें शंकराचार्य मानते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले माघ मेले में दोनों शंकराचार्यों के साथ उन्होंने स्नान किया था। उनका कहना है कि जब अन्य प्रमुख पीठों के शंकराचार्य उन्हें शंकराचार्य मानते हैं, तो प्रशासन को कौन सा अतिरिक्त प्रमाण चाहिए।

प्रशासन की मान्यता पर सवाल

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी सवाल उठाया कि क्या प्रशासन तय करेगा कि वे शंकराचार्य हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री या भारत के राष्ट्रपति को भी यह अधिकार नहीं है कि वे शंकराचार्य कौन हैं, यह तय करें। उनका कहना है कि शंकराचार्य का निर्णय केवल अन्य शंकराचार्य और धर्मपीठ ही कर सकते हैं।स्वामी ने कहा कि पुरी के शंकराचार्य ने उनके बारे में कुछ नहीं कहा है। न तो उन्होंने उन्हें शंकराचार्य नहीं माना और न ही कहा कि वे शंकराचार्य हैं। इस तरह, पुरी पीठ इस विवाद में मौन है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट में जो हलफनामा उनकी ओर से दाखिल किया गया, उसमें विरोध का कोई जिक्र नहीं है।

लिखित समर्थन और चुनौती

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उन्हें दो पीठों का प्रत्यक्ष और लिखित समर्थन प्राप्त है। तीसरे पीठ का मौन समर्थन भी उनके पक्ष में है। उन्होंने चुनौती दी कि जो कोई कहे कि वे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं, वह आकर उनसे संवाद करे। उनका मानना है कि निर्विवाद रूप से वे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं और विवाद केवल दुर्भावनापूर्ण दृष्टिकोण से उत्पन्न हुआ है।स्वामी ने बताया कि प्रशासन देर रात उनके शिविर में पहुंचा और नोटिस चस्पा कर गया। उन्होंने आग्रह किया कि सुबह 9 बजे आएं, लेकिन नोटिस लगाकर चले गए। नोटिस में उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया कि उन्होंने अपने नाम के आगे शंकराचार्य कैसे लगाया।

वकील का पक्ष और सुप्रीम कोर्ट हवाला

स्वामी के वकील पीएन मिश्रा ने बताया कि नोटिस में सुप्रीम कोर्ट का हवाला गलत तरीके से दिया गया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य कहा है और उनके प्रचार-प्रसार पर रोक नहीं लगाई है। वकील ने चेतावनी दी कि नोटिस भेजना सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक कार्रवाई में दखलअंदाजी है और इसके लिए अधिकारियों पर कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट की कार्रवाई हो सकती है।

Read More: UP Election 2027: Hindu ही नहीं Muslim भी Yogi के मुरीद, Akhilesh Yadav की उड़ गई नींद!