Shankaracharya Case Update: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद यौन उत्पीड़न मामला,आशुतोष ब्रह्मचारी पर लगा झूठी FIR का आरोप

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर लगे आरोपों ने पूरे हिंदू समाज को झकझोर दिया था, लेकिन अब जांच की सुई शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी की ओर घूम गई है। सबूतों और गवाहों के आधार पर दावा किया जा रहा है कि यह FIR पूरी तरह फर्जी है। क्या शंकराचार्य को किसी सोची-समझी साजिश के तहत बदनाम किया गया?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 23, 2026

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Shankaracharya Case Update: ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति और धर्म जगत में उबाल आया हुआ है। जहाँ एक ओर गंभीर आपराधिक धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है, वहीं दूसरी ओर अब इस मामले में एक नया और सनसनीखेज मोड़ आ गया है। एक व्यक्ति ने सार्वजनिक रूप से सामने आकर आरोप लगाया है कि मुख्य शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने शंकराचार्य को फंसाने के लिए झूठा केस दर्ज कराने का षडयंत्र रचा था।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा खुलासा: लालच देकर फंसाने की कोशिश का आरोप

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में हरदोई के मूल निवासी और वर्तमान में शाहजहाँपुर में रहने वाले रमा शंकर दीक्षित पहुँचे। तीन बेटियों के पिता दीक्षित ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने उन्हें भारी लालच दिया था। आरोप है कि ब्रह्मचारी चाहते थे कि दीक्षित अपनी बेटियों के माध्यम से शंकराचार्य पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगवाएं। हालांकि, दीक्षित ने इस अनैतिक प्रस्ताव को ठुकरा दिया और अब सच्चाई सामने लाने का दावा किया है।

राजनीतिक हस्तक्षेप: अजय राय ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

यह मामला अब केवल अदालती गलियारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें राजनीतिक दलों की एंट्री भी हो गई है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने शंकराचार्य का समर्थन करते हुए इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। अजय राय ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने आशंका जताई है कि पूज्य शंकराचार्य की छवि को धूमिल करने के लिए यह एक सोची-समझी साजिश हो सकती है। उन्होंने मांग की है कि जांच ऐसी हो जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

विवाद की पृष्ठभूमि: नाबालिग के शोषण और पॉक्सो एक्ट का मामला

गौरतलब है कि प्रयागराज की एक विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत के आदेश के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी का दावा है कि माघ मेले के दौरान एक नाबालिग समेत दो पीड़ित उनके पास आए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘गुरु सेवा’ की आड़ में और धार्मिक प्रभाव का गलत इस्तेमाल करते हुए गुरुकुल और अन्य धार्मिक आयोजनों में उनका यौन शोषण किया गया।

प्रशासनिक कार्रवाई: भारतीय न्याय संहिता के तहत मुकदमा दर्ज

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह मामला अत्यंत संवेदनशील है। प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो कानून की गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इसमें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद के साथ-साथ दो-तीन अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस का कहना है कि वे सभी साक्ष्यों की जांच कर रहे हैं और पीड़ितों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है। दूसरी तरफ, शंकराचार्य के समर्थकों का कहना है कि यह धार्मिक प्रतिद्वंद्विता का परिणाम है।

धार्मिक जगत में दरार: आरोपों और प्रत्यारोपों का दौर

जगद्गुरु रामभद्राचार्य के खेमे और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अनुयायियों के बीच तनाव साफ देखा जा सकता है। जहाँ आशुतोष ब्रह्मचारी इसे पीड़ितों को न्याय दिलाने की लड़ाई बता रहे हैं, वहीं शंकराचार्य के समर्थक इसे सनातन धर्म के एक शीर्ष पद को अपमानित करने का प्रयास मान रहे हैं। रमा शंकर दीक्षित जैसे गवाहों के सामने आने के बाद अब जांच एजेंसियों के सामने इस साजिश के पहलू को सुलझाने की भी बड़ी चुनौती है।

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