Avimukteshwaranand: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर यौन शोषण का आरोप, साजिश या सच्चाई? जानें पूरा मामला

जगतगुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर बच्चों के यौन शोषण का सनसनीखेज आरोप लगाया है। प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट में दो कथित पीड़ितों को भी पेश किया गया है। क्या यह शंकराचार्य की छवि बिगाड़ने की कोई बड़ी साजिश है या फिर धर्म के नाम पर चल रहे काले खेल का पर्दाफाश?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 12, 2026

Avimukteshwaranand: धर्म और अध्यात्म की नगरी प्रयागराज से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने संत समाज और आम जनता को झकझोर कर रख दिया है. ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं. जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने शंकराचार्य के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन पर यौन शोषण जैसे घृणित कृत्य का आरोप लगाया है. इन आरोपों के बाद हिंदू धर्मगुरुओं के बीच वैचारिक और कानूनी युद्ध छिड़ गया है.

गंभीर आरोपों का अंबार: नाबालिगों के शोषण का दावा

आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर बेहद सनसनीखेज आरोप लगाए हैं. उनका दावा है कि अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में रहने वाले नाबालिग बच्चों का शारीरिक और यौन शोषण किया जाता है. आशुतोष ब्रह्मचारी ने न केवल सार्वजनिक रूप से ये आरोप लगाए, बल्कि इस मामले को कानूनी चौखट तक भी पहुँचा दिया है. उन्होंने दावा किया है कि उनके पास इस कृत्य के पुख्ता प्रमाण हैं और वे पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं.

अविमुक्तेश्वरानंद का पलटवार: “नीचता की हद पार कर चुके हैं विरोधी”

इन आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे एक सोची-समझी साजिश करार दिया है. उन्होंने कहा कि उनके विरोधी अब “नीचता की पराकाष्ठा” पर उतर आए हैं. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अनुसार, जब विरोधी उन्हें सैद्धांतिक या धार्मिक स्तर पर पराजित नहीं कर पाए, तो अब उनके चरित्र पर कीचड़ उछालने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने जोर देकर कहा कि यह ज्योतिष पीठ की गरिमा को धूमिल करने और उनकी आवाज को दबाने का एक घृणित षड्यंत्र है.

गौरक्षा आंदोलन और राजनीतिक एंगल: “सरकार को पसंद नहीं आ रहे मेरे मुद्दे”

शंकराचार्य ने इन आरोपों के पीछे एक गहरा राजनीतिक और सामाजिक कारण भी बताया है. उन्होंने कहा, “मैं जो मुद्दे उठा रहा हूँ, विशेषकर गौरक्षा और हिंदू धर्म की मर्यादा के प्रश्न, वे सरकार और कुछ शक्तिशाली समूहों को पसंद नहीं आ रहे हैं.” उनका मानना है कि सरकार उनके गौरक्षा आंदोलन की सफलता से डरी हुई है. अविमुक्तेश्वरानंद के मुताबिक, आंदोलन की धार को कुंद करने के लिए उन पर “कॉकटेल प्रहार” (विभिन्न दिशाओं से सामूहिक हमला) किया जा रहा है ताकि जनता का ध्यान मूल मुद्दों से भटक जाए.

कानूनी लड़ाई: पॉक्सो कोर्ट में साक्ष्य और दलीलें

यह विवाद अब प्रयागराज की ‘स्पेशल पॉक्सो कोर्ट’ की दहलीज पर पहुँच चुका है. आशुतोष ब्रह्मचारी ने 8 फरवरी को अदालत में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी और दो नाबालिग पीड़ितों को कोर्ट के समक्ष पेश करने का दावा किया था. इसके जवाब में, 10 फरवरी को शंकराचार्य के वकीलों ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा. उन्होंने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे आधारहीन बताया. शंकराचार्य ने कहा, “हमने अपनी बेगुनाही के साक्ष्य कोर्ट को सौंप दिए हैं. सच जल्द ही सबके सामने आएगा.”

धर्म और न्याय के बीच फंसा मामला

संत परंपरा में इस तरह के आरोपों का लगना बेहद दुर्लभ और दुखद है. एक ओर जहाँ आशुतोष ब्रह्मचारी पीड़ितों को न्याय दिलाने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शंकराचार्य इसे अपनी छवि खराब करने का षड्यंत्र बता रहे हैं. फिलहाल मामला विचाराधीन है और पूरी दुनिया की नजरें पॉक्सो कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं. क्या यह वास्तव में एक बड़ी साजिश है या इसके पीछे कोई कड़वी सच्चाई छिपी है, इसका फैसला अब साक्ष्यों के आधार पर कानून ही करेगा.

Read More: Kim Jong Un Successor: उत्तर कोरिया के तानाशाह ने बेटी को सौंपा उत्तराधिकार, 9वीं पार्टी कांग्रेस में अहम भूमिका