Shankaracharya Avimukteshwaranand Refuse To Snan: प्रयागराज में मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर रविवार को संगम तट पर अप्रत्याशित विवाद देखने को मिला। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने स्नान करने से इनकार कर दिया। उनका आरोप है कि पुलिस ने उनके शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की और बदसलूकी की, जिसके चलते उन्हें स्नान से रोका गया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब वे बिना स्नान किए ही वापस लौटेंगे।
Magh Mela 2026: मौनी अमावस्या पर संगम में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
शंकराचार्य का आरोप

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उनके साथ और उनके शिष्यों के साथ प्रशासन ने अनुचित व्यवहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके अनुयायियों को जबरन रोका और धक्का-मुक्की की। इस घटना से वे आहत हुए और उन्होंने स्नान न करने का निर्णय लिया।
पुलिस-प्रशासन का पक्ष
पुलिस और प्रशासन ने इस विवाद पर अपनी सफाई दी। अधिकारियों का कहना है कि मौनी अमावस्या के कारण माघ मेले में संगम तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी। सुरक्षा और व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने शंकराचार्य से अनुरोध किया कि वे रथ से उतरकर पैदल तट तक जाएं। लेकिन उनके समर्थक और भक्त इस आग्रह को मानने के बजाय आगे बढ़ने लगे। इसी दौरान पुलिस और समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति उत्पन्न हो गई। फिलहाल शंकराचार्य का जुलूस रुका हुआ है और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद हैं।
श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा

इस बीच माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान पर्व पर श्रद्धालुओं और साधु-संतों पर पुष्प वर्षा की गई। उत्तर प्रदेश सरकार ने हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की व्यवस्था कराई। इस पुष्प वर्षा ने श्रद्धालुओं और संतों को भावविभोर कर दिया। योगी सरकार ने इस आयोजन के माध्यम से सनातन धर्म की आस्था का सम्मान किया।
आस्था और व्यवस्था का टकराव
यह घटना स्पष्ट करती है कि आस्था और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण है। एक ओर लाखों श्रद्धालु संगम तट पर स्नान के लिए उमड़े, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण प्रशासन की प्राथमिकता रही। इसी बीच शंकराचार्य और उनके अनुयायियों के साथ हुई झड़प ने विवाद का रूप ले लिया।










